क्या उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में गुलदार की दहशत बढ़ रही है?
सारांश
Key Takeaways
- गुलदार की गतिविधियों में वृद्धि
- वन विभाग की सक्रियता
- गुलदार को पकड़ने की प्रक्रिया
- स्थानीय लोगों का डर
- मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान
ऊधम सिंह नगर, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में हाल के दिनों में रिहायशी क्षेत्रों में गुलदार की गतिविधियों ने लोगों में डर का माहौल बना दिया है। चेतावनी के तौर पर, वन विभाग ने विभिन्न स्थानों पर पिंजरे लगाए हैं ताकि गुलदार को पकड़ा जा सके। इसी क्रम में, शनिवार को काशीपुर में वन विभाग के पिंजरे में एक और गुलदार फंस गया।
यह घटना काशीपुर के द्रोणासागर टीले के समीप हुई, जहां गुलदार की मौजूदगी की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, गुलदार को सुरक्षित तरीके से पिंजरे में कैद किया गया है। इसके बाद, टीम ने उसे रेस्क्यू सेंटर भेजा है, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल जांच के बाद गुलदार को सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ दिया जाएगा, ताकि वह रिहायशी इलाकों में लोगों के लिए खतरा न बने।
सूत्रों के मुताबिक, काशीपुर और उसके आसपास पिछले कुछ समय से गुलदार की गतिविधियां बढ़ी हैं। इससे पहले, 9 जनवरी को काशीपुर के चैती गांव में एक गुलदार ने एक कुत्ते को शिकार बना लिया था, जिससे वहां के लोगों में भय का माहौल फैल गया। इसी तरह, रुद्रपुर में भी गुलदार की मौजूदगी देखी गई थी, जहां स्थानीय विधायक शिव अरोरा और वन विभाग की टीम ने मिलकर उसे पकड़ा था।
इसके अलावा, पंतनगर क्षेत्र में भी गुलदार की आमद सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। काशीपुर में लगभग एक महीने पहले भी द्रोणासागर टीले के पास वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में गुलदार फंस चुका था। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं को देखते हुए, वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गुलदार को पकड़ने और सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।