पटना में चैती छठ की तैयारियाँ अंतिम चरण में, आठ घाट असुरक्षित घोषित
सारांश
Key Takeaways
- चैती छठ की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।
- पटना के आठ घाट असुरक्षित घोषित किए गए हैं।
- सुरक्षा के लिए प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं।
- महापर्व का महत्व और अनुष्ठान की प्रक्रिया।
- 22 मार्च से 25 मार्च तक मनाया जाएगा चैती छठ।
पटना, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। लोकआस्था के प्रमुख पर्व चैती छठ की तैयारियाँ अब अंतिम चरण में हैं। चार दिनों के इस पर्व के लिए प्रशासन और आम जन दोनों ही सक्रियता से जुटे हैं। पटना के गंगा तट पर जिला प्रशासन व्रतियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तैयारियों में लगा हुआ है।
इसी बीच, पटना जिला प्रशासन ने गंगा किनारे के आठ छठ घाटों को खतरनाक घोषित किया है। सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जिन घाटों को खतरनाक माना गया है, उनमें एलसीटी घाट, राजापुर पुल घाट, पहलवान घाट, बांस घाट, शिव घाट, दीदारगंज घाट पूर्वी, रिकाबगंज घाट और बुंदेलटोली घाट शामिल हैं।
यह ध्यान देने योग्य है कि महापर्व छठ साल में दो बार मनाया जाता है। लोग सामान्यतः कार्तिक मास के छठ को बड़े स्तर पर जानते हैं, लेकिन यह पर्व साल में दो बार सूर्य देव की पूजा का महोत्सव है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाए जाने वाले इस पर्व को 'चैती छठ' कहा जाता है। वर्ष 2026 में चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च से होगी। महापर्व की शुरुआत 22 मार्च को नहाय-खाय से शुरू होगी, इसके बाद 23 मार्च को व्रती खरना का अनुष्ठान करेंगे। व्रत के तीसरे दिन, यानी 24 मार्च को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन होगा।
चैती छठ को लेकर पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन एस. एम. ने गुरुवार को गंगा के विभिन्न घाटों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को मानकों के अनुसार दण्डाधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति करने, नदी घाटों पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ की टीमें तथा गोताखोरों को तैनात रखने, रिवर पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने, मेडिकल टीम को सक्रिय रखने और सीसीटीवी कैमरा तथा ड्रोन से निगरानी करने का निर्देश दिया है।
22 मार्च से 25 मार्च तक नदियों में निजी नावों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। जिलाधिकारी ने सभी अनुमंडल पदाधिकारियों, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को इसका अनुपालन सुनिश्चित कराने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। विभिन्न अनुमंडलों में स्थित नदी घाटों को कई सेक्टर में विभाजित कर दो-दो मोटर बोट और अन्य आवश्यक संसाधनों सहित गोताखोरों और जवानों के साथ आठ टीमों को तैनात किया गया है।