बिहार में 'नहाय-खाय' के साथ चैती छठ का महापर्व शुरू, व्रतियों की भारी भीड़ जुटी

Click to start listening
बिहार में 'नहाय-खाय' के साथ चैती छठ का महापर्व शुरू, व्रतियों की भारी भीड़ जुटी

सारांश

बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में चैती छठ महापर्व का आगाज़ 'नहाय-खाय' से हुआ। व्रतियों ने गंगा तट पर पहुंचकर स्नान कर प्रसाद ग्रहण किया। इस महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।

Key Takeaways

  • चैती छठ चार दिनों का महापर्व है।
  • पहला दिन नहाय-खाय के रूप में मनाया जाता है।
  • श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।
  • मुख्यमंत्री ने पर्व के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं।
  • यह पर्व आत्मानुशासन का प्रतीक है।

पटना, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की राजधानी पटना और राज्य के अन्य क्षेत्रों में रविवार को 'नहाय-खाय' के साथ चैती छठ का महापर्व शुरू हो गया है, जो चार दिनों तक चलेगा। पहले दिन, पटना के गंगा तटों पर सुबह से ही छठव्रती पहुंचने लगे हैं।

इस पवित्र त्योहार के पहले दिन, व्रति पुरुष और महिलाएं शुद्धिकरण के लिए नदियों और तालाबों में स्नान करने के बाद अरवा चावल, चने की दाल और लौकी (कद्दू) की सब्जी का प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। नहाय-खाय से इस पर्व की शुरुआत होती है। व्रती चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के पहले दिन स्नान करके शुद्ध भोजन करती हैं, जिसे नहाय-खाय कहा जाता है।

बिहार के अतिरिक्त, झारखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य कुछ प्रदेशों में भी इस त्योहार को बड़े श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। चैती छठ के आयोजन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि महापर्व छठ साल में दो बार मनाया जाता है। आमतौर पर, लोग कार्तिक मास में मनाए जाने वाले छठ को अधिक जानते हैं, लेकिन साल में दो बार सूर्य देव की पूजा का यह महापर्व मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाए जाने वाले इस पर्व को चैती छठ कहा जाता है।

महापर्व के दूसरे दिन, सोमवार को श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर सूर्यास्त के बाद खरना का आयोजन करेंगे। इसके बाद, तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य और चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हुए यह महापर्व संपन्न होगा। श्रद्धालु भगवान सूर्य की पूजा कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे। सूर्य नगरी के रूप में प्रसिद्ध औरंगाबाद के देव में इस महापर्व को लेकर बड़ी संख्या में व्रती एकत्रित हुए हैं। इस बार अनुमान लगाया गया है कि इस छठ पर्व में पांच से सात लाख श्रद्धालु पहुंचेंगे।

औरंगाबाद जिला प्रशासन ने मेले के आयोजन के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की है। जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों के बीच जिम्मेदारियाँ बांटते हुए समितियों का गठन किया है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए पांच प्रमुख स्थानों पर आवास स्थल बनाए गए हैं, जहां एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिए भी व्यापक प्रबंध किए गए हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चैती छठ के अवसर पर राज्यवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने शुभकामना संदेश में कहा है कि छठ आत्मानुशासन का पर्व है, जिसमें लोग आत्मिक शुद्धि और निर्मल मन से अस्ताचलगामी और उदीयमान भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। उन्होंने कामना की कि चैती छठ राज्यवासियों के लिए सुख, समृद्धि और शांति लेकर आए।

Point of View

जो न केवल धार्मिक आस्था बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। इस महापर्व में महिलाएं और पुरुष मिलकर सूर्य देव की पूजा करते हैं, जो हमें आत्मीयता और आत्मशुद्धि की सीख देता है।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

चैती छठ कब मनाया जाता है?
चैती छठ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है।
नहाय-खाय क्या है?
नहाय-खाय चैती छठ महापर्व का पहला दिन होता है, जब व्रती स्नान करके शुद्ध भोजन करती हैं।
छठ पर्व का दूसरा दिन क्या होता है?
दूसरे दिन श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद खरना करते हैं।
इस महापर्व में कितने श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है?
इस बार अनुमान है कि पांच से सात लाख श्रद्धालु इस महापर्व में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री का संदेश क्या था?
मुख्यमंत्री ने छठ पर्व को आत्मानुशासन का पर्व बताते हुए राज्यवासियों के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।
Nation Press