13 अगस्त 2026
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उमर खालिद-शरजील इमाम की बिना ट्रायल हिरासत असंवैधानिक: कांग्रेस नेता हुसैन दलवई

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उमर खालिद-शरजील इमाम की बिना ट्रायल हिरासत असंवैधानिक: कांग्रेस नेता हुसैन दलवई

सारांश

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने उमर खालिद (~6 वर्ष) और शरजील इमाम (~7 वर्ष) की बिना ट्रायल हिरासत को संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया और न्यायपालिका से हस्तक्षेप की माँग की। यूएपीए के दुरुपयोग पर उनका यह बयान विपक्ष की बढ़ती आवाज़ का हिस्सा है।

मुख्य बातें

हुसैन दलवई ने 13 अगस्त को मुंबई में उमर खालिद (~ 6 वर्ष ) और शरजील इमाम (~ 7 वर्ष ) की बिना ट्रायल हिरासत को असंवैधानिक बताया।
उन्होंने यूएपीए के इस्तेमाल पर गंभीर सार्वजनिक बहस की माँग की और दोनों की जल्द रिहाई का आह्वान किया।
उमर खालिद के झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र में आदिवासी समुदायों पर किए गए क्षेत्रीय शोध का हवाला देते हुए दलवई ने बौद्धिक स्वतंत्रता की पैरवी की।
एफसीआरए संशोधन विधेयक को JPC के पास भेजे जाने को दलवई ने विपक्ष की आपत्तियों की स्वीकृति बताया।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच यूपी चुनाव गठबंधन की संभावना पर दलवई ने अंतिम घोषणा से परहेज किया, लेकिन बातचीत के संकेत दिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने 13 अगस्त को मुंबई में यूएपीए (UAPA) के तहत वर्षों से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की हिरासत को लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के लिहाज से गंभीर विषय बताया। उन्होंने मांग की कि न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी नागरिक को अनिश्चितकाल तक बिना सुनवाई के कारावास में न रखा जाए।

मुख्य घटनाक्रम

दलवई ने कहा कि उमर खालिद को करीब छह वर्षों से और शरजील इमाम को करीब सात वर्षों से जेल में रखा गया है, जबकि उनका मुकदमा अभी तक आगे नहीं बढ़ा है। उनके अनुसार, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने लंबे समय तक किसी व्यक्ति को बंदी बनाए रखने का क्या औचित्य है। उन्होंने दोनों को जल्द राहत देने की माँग की।

यह ऐसे समय में आया है जब यूएपीए के तहत लंबी हिरासत और जमानत की कठिनाई को लेकर नागरिक अधिकार संगठनों की आलोचना लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय भी कई मामलों में लंबित ट्रायल पर चिंता व्यक्त कर चुका है।

न्यायपालिका और यूएपीए पर टिप्पणी

दलवई ने कहा कि न्यायपालिका का मूल दायित्व नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। उनके अनुसार, यदि वर्षों में भी मुकदमा शुरू नहीं हो पाया है, तो अदालत को मामले की गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने यूएपीए जैसे कानून के इस्तेमाल पर भी गंभीर चर्चा की आवश्यकता बताई।

उमर खालिद के अकादमिक कार्यों का उल्लेख करते हुए दलवई ने कहा कि उन्होंने झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र के आदिवासी समुदायों पर क्षेत्रीय शोध किया है। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति को उसके विचारों या शोध के आधार पर वर्षों तक जेल में रखना उचित नहीं है और देश में बौद्धिक व अकादमिक परंपरा को मजबूत किए जाने की जरूरत है।

आजम खान और अन्य राजनीतिक मुद्दे

समाजवादी पार्टी नेता शिवपाल यादव की आजम खान को गृह मंत्री बनाए जाने संबंधी टिप्पणी पर दलवई ने कहा कि भविष्य के पदों का सवाल अलग राजनीतिक विषय है, लेकिन आजम खान के साथ जिस तरह का व्यवहार हो रहा है, वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आजम खान द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय को नुकसान पहुंचाने की बात गलत है और शिक्षण संस्थानों को मजबूत किया जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच संभावित गठबंधन पर दलवई ने कहा कि फिलहाल कोई अंतिम घोषणा नहीं की जा सकती, लेकिन संकेत दिया कि दोनों दल इंडिया गठबंधन के सदस्य हैं और सीटों व रणनीति पर बातचीत हो सकती है।

कंगना रनौत और एफसीआरए विधेयक

हिमाचल प्रदेश सरकार पर भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के आरोपों पर दलवई ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उनकी राजनीतिक टिप्पणियों को विशेष महत्व देने से इनकार किया।

एफसीआरए संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजे जाने के फैसले पर दलवई ने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि सरकार को विपक्ष और अन्य पक्षों की आपत्तियों को ध्यान में रखना पड़ा। उन्होंने कहा कि JPC में विस्तृत चर्चा के बाद ही विधेयक के अंतिम स्वरूप पर निर्णय होगा।

आगे क्या

दलवई के बयान ने यूएपीए हिरासत और न्यायिक विलंब पर बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले अदालतों में विचाराधीन हैं और अगली सुनवाई की तारीखें निर्धारित हैं। विपक्ष की यह माँग आने वाले हफ्तों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह गूँजने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे केवल सरकार पर आरोप लगाकर नहीं सुलझाया जा सकता — अदालतों की क्षमता और विशेष अदालतों की कमी भी उतनी ही जिम्मेदार है। मुख्यधारा की कवरेज इस बहस को केवल 'सरकार बनाम विपक्ष' के चश्मे से देखती है, जबकि असली सवाल यह है कि यूएपीए के तहत जमानत की संरचनात्मक बाधाएँ किस तरह न्यायिक स्वतंत्रता को प्रभावित करती हैं।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर खालिद और शरजील इमाम को किस कानून के तहत जेल में रखा गया है?
दोनों को गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) के तहत हिरासत में रखा गया है। हुसैन दलवई के अनुसार, उमर खालिद करीब छह वर्षों से और शरजील इमाम करीब सात वर्षों से बिना ट्रायल जेल में हैं।
हुसैन दलवई ने क्या माँग की है?
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जल्द राहत देने की माँग की है। उन्होंने न्यायपालिका से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि किसी नागरिक को अनिश्चितकाल तक बिना सुनवाई के कारावास में न रखा जाए।
यूएपीए के तहत लंबी हिरासत क्यों विवादास्पद है?
यूएपीए में जमानत की शर्तें अत्यंत कठोर हैं, जिससे आरोपी वर्षों तक बिना ट्रायल जेल में रह सकते हैं। आलोचकों का कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।
एफसीआरए संशोधन विधेयक को JPC के पास क्यों भेजा गया?
दलवई के अनुसार, सरकार का JPC को विधेयक भेजने पर सहमत होना इस बात का संकेत है कि विपक्ष और अन्य पक्षों की आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सका। JPC में विस्तृत चर्चा के बाद विधेयक के अंतिम स्वरूप पर निर्णय होगा।
यूपी चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन की क्या स्थिति है?
हुसैन दलवई ने कहा कि इस पर अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं की जा सकती। हालाँकि, उन्होंने संकेत दिया कि दोनों दल इंडिया गठबंधन के सदस्य हैं और सीटों व रणनीति पर बातचीत की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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