उमर खालिद को बिना ट्रायल छह साल जेल में रखना अन्याय: एआईएमआईएम नेता वारिस पठान
सारांश
मुख्य बातें
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मुंबई में कहा कि जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को बिना ट्रायल के छह साल से अधिक समय तक जेल में रखना स्पष्ट अन्याय है और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। पठान ने यह भी कहा कि कानून का मूल सिद्धांत है — 'जमानत नियम है, जेल अपवाद है।'
क्या बोले वारिस पठान
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता ने कहा, 'मैं एक वकील हूँ, और कानून कहता है — जमानत नियम है, जेल अपवाद है। आप किसी को बिना ट्रायल के सालों तक जेल में नहीं रख सकते। यह ट्रायल से पहले ही दोषी ठहराने जैसा है।' उन्होंने आगे कहा, 'वे — खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम — छह साल से जेल में हैं। वे सरकार की नीतियों से नाखुश थे, इसलिए उन्होंने अपनी आवाज उठाई।'
पठान ने कहा, 'कोई भी वीडियो देखकर पता लगा सकता है कि उन्होंने कुछ गलत कहा था या नहीं। बार-बार सुनवाई के बावजूद उन्हें जमानत नहीं दी जा रही है। ट्रायल शुरू होने दें, उन्हें कोर्ट के सामने सबूत पेश करने दें — फिर फैसला सुनाया जाए। उन्हें कुछ भी साबित करने का मौका नहीं दिया जा रहा, यह अपने आप में एक सजा है।'
किस संदर्भ में आई यह प्रतिक्रिया
पठान की यह टिप्पणी कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख बीके हरिप्रसाद के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने उमर खालिद को 'राष्ट्रवादी' बताया था। साथ ही उन्होंने बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) में छात्र एक्टिविस्ट पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की आलोचना की थी। गौरतलब है कि उमर खालिद 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में सितंबर 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं।
धर्म का मुद्दा और पठान का दावा
पठान ने यह भी दावा किया, 'कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि वह मुस्लिम हैं, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा रही है।' उनके इस दावे को कथित तौर पर विवादास्पद माना जा सकता है, क्योंकि न्यायालय ने विभिन्न सुनवाइयों में जमानत के लिए मामले की प्रकृति और जाँच की स्थिति को आधार बताया है।
दिशा सालियान और मसूद अजहर पर भी बोले पठान
एआईएमआईएम नेता ने इस अवसर पर दिशा सालियान की मृत्यु के मामले पर भी टिप्पणी की और लोगों से इसका राजनीतिकरण न करने की अपील की। उन्होंने कहा, 'यह एक ऐसे पिता की बात है जो छह साल से अपनी बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। अब उच्च न्यायालय के आदेश पर मामला सीबीआई को सौंप दिया गया है और एफआईआर दर्ज हो चुकी है।'
जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के बारे में जानकारी देने पर पाकिस्तान द्वारा इनाम की रकम 70 लाख पीकेआर करने के संदर्भ में पठान ने पाकिस्तान को 'आतंकवाद की जड़' बताया। उन्होंने कहा, 'भारत ने पुलवामा, 26/11 और पहलगाम जैसी घटनाएँ देखी हैं। हम चाहते हैं कि सरकार ऑपरेशन सिंदूर की तरह दोबारा कार्रवाई करे और आतंकवाद को जड़ से खत्म करे।'
आगे क्या होगा
उमर खालिद का मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है और ट्रायल की प्रक्रिया धीमी गति से आगे बढ़ रही है। पठान के बयान ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि लंबी न्यायिक हिरासत के दौरान आरोपी के मूल अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। यह मामला भारत में यूएपीए के अंतर्गत जमानत के मानकों पर व्यापक संवैधानिक सवाल उठाता है।