क्या बेगुनाह लोगों को हिरासत में रखना पूरी तरह गलत है? हुसैन दलवई का बयान

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क्या बेगुनाह लोगों को हिरासत में रखना पूरी तरह गलत है? हुसैन दलवई का बयान

सारांश

दिल्ली दंगों के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज होने पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने बेगुनाहों की हिरासत को गलत बताया। उनकी बातें समाज में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाती हैं। क्या हमें न्याय व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है?

Key Takeaways

  • बेगुनाह लोगों की हिरासत गलत है।
  • सुप्रीम कोर्ट को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
  • लव जिहाद पर विचार करने की आवश्यकता है।
  • जाति और धर्म के आधार पर निर्णय लेना अनुचित है।
  • जांच के लिए उचित समय सीमा होनी चाहिए।

मुंबई, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली दंगों से संबंधित उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट द्वारा अस्वीकृत किए जाने पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बेगुनाह लोगों को हिरासत में रखना पूरी तरह से गलत है।

मुंबई में राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए हुसैन दलवई ने कहा कि उनके अनुसार यह निर्णय एकदम अनुचित है। पांच साल का समय गुजर चुका है। क्या किसी मामले की जांच में इतना लंबा समय लगना चाहिए? उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है, वे अपराधी नहीं हैं। वे तो छात्र हैं। मुझे नहीं लगता कि वे ऐसा कुछ करेंगे। उन्हें जेल में इसलिए रखा जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान हैं। जांच के नाम पर किसी को पांच साल तक जेल में रखना बिल्कुल गलत है। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

हुसैन दलवई ने कहा कि जिस प्रकार का निर्णय दिया गया है, ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग की तरह ही सुप्रीम कोर्ट भी कार्य कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन्होंने हिंसा की है, उन्हें सजा दी जानी चाहिए। बेगुनाह लोगों को हिरासत में रखना एकदम गलत है। क्या किसी मामले की जांच और निर्णय लेने में पांच साल लगते हैं? ऐसा प्रतीत होता है कि इस मामले में कोई ठोस सबूत नहीं है। पुलिस द्वारा दायर की गई प्राथमिकी में तथ्य मौजूद नहीं हैं।

संगठन प्रमुख मोहन भागवत के लव जिहाद पर दिए गए बयान पर कांग्रेस नेता ने कहा कि मोहन भागवत प्यार के बारे में क्या जानते हैं, उन्होंने कभी इसका अनुभव नहीं किया। महिलाएं तो उनकी शाखाओं में जाती भी नहीं हैं, लड़कियों को मनाही है। एक तरफ आप मनुस्मृति को मानते हैं, जो महिलाओं को कोई जगह नहीं देती। फिर ऐसी बातें क्यों करते हैं? यह ब्राह्मणवादी सोच है, जो ब्राह्मण महिलाओं के साथ भी अन्याय करती है।

वास्तव में, मोहन भागवत ने कहा है कि लव जिहाद को रोकने की शुरुआत परिवार और घर से होनी चाहिए। परिवार में संवाद की कमी और मूल्यों की अनदेखी के कारण ऐसे मामलों में लोग प्रभावित होते हैं। ऐसे अपराधों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 40 दिन की पैरोल मिलने पर हुसैन दलवई ने कहा कि जाति या धर्म के आधार पर निर्णय लेना गलत है।

Point of View

यह हमारे लिए आवश्यक है कि हम न्याय व्यवस्था की कठिनाइयों और गरीबों की स्थिति पर ध्यान दें। बेगुनाह लोगों की हिरासत और न्याय का विलंब एक गंभीर समस्या है, जिसे हमें सुलझाने की आवश्यकता है।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

हुसैन दलवई ने बेगुनाहों की हिरासत पर क्या कहा?
हुसैन दलवई ने कहा कि बेगुनाह लोगों को हिरासत में रखना पूरी तरह गलत है और यह न्याय प्रणाली की विफलता को दर्शाता है।
क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला गलत था?
दलवई के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला अनुचित है और इसमें सुधार की आवश्यकता है।
लव जिहाद पर मोहन भागवत का क्या कहना है?
उन्होंने कहा कि लव जिहाद को रोकने की शुरुआत परिवार से होनी चाहिए। लेकिन दलवई ने उनकी सोच पर सवाल उठाए।
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