कीव पर रूसी बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बीच अमेरिकी संसद ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पारित किया
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने 17 सितंबर 2026 को बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' पारित कर दिया है — ठीक उसी वक्त जब रूस ने कीव पर एक और भीषण बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया और ओडेसा पर भी नए हमले किए। सिबिहा ने कहा कि रूस के आतंक को रोकने का यही सही तरीका है।
कानून में क्या है
इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है। साथ ही, रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं और रूस के सैन्य अभियानों का समर्थन करने वाली विदेशी संस्थाओं को सीधे निशाना बनाया गया है। यह विधेयक अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा, जिनके इसे कानून बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
यूक्रेन की प्रतिक्रिया
सिबिहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, 'यह मतदान ठीक उसी समय हुआ जब रूस ने कीव पर एक और भीषण बैलिस्टिक मिसाइल हमला किया और ओडेसा पर भी नए हमले किए।' उन्होंने कहा कि आक्रमणकारी देश पर कड़ा दबाव बनाना और उसके युद्ध के लिए इस्तेमाल होने वाले आर्थिक संसाधनों को सीमित करना ही सही जवाब है।
सिबिहा ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी कांग्रेस ने एक साफ संदेश दिया है: रूस अपनी आक्रामक कार्रवाई बिना किसी परिणाम के जारी नहीं रख सकता। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति पुतिन जितने लंबे समय तक यह युद्ध जारी रखेंगे, उनके और उनकी सरकार के लिए इसकी कीमत उतनी ही बढ़ती जाएगी।'
सीनेटर लिंडसे ग्राहम को श्रेय
यूक्रेन ने इस कानून का समर्थन करने वाले प्रतिनिधि सभा के दोनों दलों — रिपब्लिकन और डेमोक्रेट — के नेताओं और सभी सदस्यों के प्रति गहरी सराहना व्यक्त की। बयान में सीनेटर लिंडसे ग्राहम की विरासत को भी सम्मान दिया गया और कहा गया कि उनका नाम अब आज़ादी की रक्षा और शांति को मजबूत करने के इस महत्वपूर्ण प्रयास से जुड़ गया है।
यूक्रेन की साझेदार देशों से अपील
यूक्रेन ने अपने साझेदार देशों से रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की माँग की है। इनमें शामिल हैं: रूस पर पूर्ण व्यापारिक प्रतिबंध, रूसी लड़ाकों और सैन्य कर्मियों के प्रवेश पर पूर्ण रोक, रूस के तथाकथित 'शैडो फ्लीट' पर पूर्ण प्रतिबंध और रूस के सैन्य-औद्योगिक ढाँचे पर पूर्ण वित्तीय प्रतिबंध।
गौरतलब है कि यह कानून ऐसे समय में पारित हुआ है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के तीन वर्ष से अधिक बीत चुके हैं और मोर्चे पर स्थिति अभी भी गतिरोध में है। यदि राष्ट्रपति ट्रंप इस विधेयक पर हस्ताक्षर करते हैं, तो यह रूसी ऊर्जा क्षेत्र पर अब तक का सबसे कड़ा पश्चिमी आर्थिक दबाव होगा।