निर्मला सीतारमण से मिले सुवेंदु अधिकारी, NCPI सांसदों संग संसद भवन में विकास और 27 लाख नामों पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से 4 अगस्त को संसद भवन में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य ने मुलाकात की। इस बैठक की जानकारी वित्त मंत्री के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। बैठक में संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों के साथ-साथ मतदाता सूची से 27 लाख नामों को हटाए जाने का मुद्दा भी केंद्र में रहा।
बैठक से पहले बंगाल भवन में भोजन
संसद भवन में वित्त मंत्री से मुलाकात से पूर्व बंगाल भवन में करीब 20 नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) सांसदों के साथ दोपहर के भोजन का आयोजन हुआ। सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि इस अनौपचारिक बैठक में विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ और उन्होंने सांसदों के सुझावों तथा संभावनाओं को ध्यान से सुना।
27 लाख नामों का मुद्दा रहा केंद्र में
NCPI सांसद यूसुफ पठान ने बैठक के बाद बताया कि चर्चा का प्रमुख विषय मतदाता सूची से 27 लाख नाम हटाए जाने का मामला था। उन्होंने कहा कि उन्हें आश्वासन दिया गया है कि अदालत में अपील करने वाले सभी लोगों के मामलों पर विचार किया जाएगा। यह मुद्दा पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है।
सांसदों ने बताया सकारात्मक
NCPI सांसद रचना बनर्जी ने बैठक को 'काफी सकारात्मक और सार्थक' बताया। उनके अनुसार मुख्य रूप से अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई और उन्हें कई सुझाव मिले हैं, जिन पर आगे काम किया जाएगा।
NCPI सांसद प्रसून बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वे सभी लोगों से मिलते हैं और सभी को सहयोग देते हैं तथा काम करने का अवसर प्रदान करते हैं।
प्रशासनिक रुकावटों पर मिला आश्वासन
NCPI सांसद जून मालिया ने बताया कि सुवेंदु अधिकारी ने वादा किया है कि यदि किसी भी सांसद को प्रशासनिक स्थिति या रुकावट का सामना करना पड़े, तो वे हमेशा मदद के लिए उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा, 'उन्होंने NCPI और NDA में शामिल सभी सांसदों से यह वादा किया है कि अपने चुनाव क्षेत्रों में काम करते समय हमें किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।'
आगे क्या
इस बैठक के बाद यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि 27 लाख नामों को मतदाता सूची से हटाए जाने के मुद्दे पर अदालती प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और संसदीय क्षेत्रों के विकास से जुड़े सुझावों को केंद्र सरकार किस रूप में लागू करती है।