मुर्शिदाबाद मतदाता सूची विवाद: एनसीपीआई सांसद खलीलुर रहमान और अबू ताहेर खान ने CM सुवेंदु अधिकारी से नबान्ना में की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए मुर्शिदाबाद के दोनों लोकसभा सांसद खलीलुर रहमान और अबू ताहेर खान ने 8 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से राज्य सचिवालय नबान्ना में भेंट की। बैठक का केंद्रीय मुद्दा मुर्शिदाबाद जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने और ट्रिब्यूनल के फैसलों में हो रही देरी से जुड़ा था।
मुख्य घटनाक्रम
खलीलुर रहमान और अबू ताहेर खान दोनों मुर्शिदाबाद जिले से निर्वाचित लोकसभा सांसद हैं, जो हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए हैं। उल्लेखनीय है कि दोनों नेता एनसीपीआई के भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जुड़ने के पक्ष में नहीं हैं।
इसके बावजूद दोनों सांसद एक दिन पहले 7 अगस्त को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर आयोजित उस बैठक में शामिल हुए, जिसमें TMC से एनसीपीआई में आए सभी 20 लोकसभा सांसद उपस्थित थे।
मतदाता सूची विवाद: असली मुद्दा
शनिवार की बैठक का मुख्य एजेंडा मुर्शिदाबाद में SIR के बाद मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और संबंधित ट्रिब्यूनल मामलों में देरी का था। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले 7 अगस्त को TMC के 'बागी' गुट — जिसका नेतृत्व निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे थे — के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी नबान्ना में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर यही मुद्दा उठाया था।
यह ऐसे समय में आया है जब मुर्शिदाबाद की अल्पसंख्यक-बहुल सीटों पर राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और मतदाता सूची का मामला कई दलों के लिए साझा चिंता का विषय बन गया है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए उनकी सरकार इसमें सीधा हस्तक्षेप नहीं करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन लोगों के मामले ट्रिब्यूनल में लंबित हैं, उन्हें सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा।
हालाँकि, अधिकारी ने यह भी दोहराया कि जिन लोगों के नाम SIR के बाद सूची से हटे हैं और जिन्होंने अभी तक ट्रिब्यूनल में आवेदन नहीं किया है, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा।
यूसुफ पठान का रुख
मुर्शिदाबाद के तीसरे अल्पसंख्यक सांसद और क्रिकेटर से राजनेता बने यूसुफ पठान ने भी स्पष्ट किया है कि एनसीपीआई के NDA में शामिल होने के विरोध के बावजूद वे अपने लोकसभा क्षेत्र के विकास के लिए सुवेंदु अधिकारी सरकार के साथ समन्वय बनाए रखेंगे। यह रुख तीनों अल्पसंख्यक सांसदों की व्यावहारिक राजनीति को दर्शाता है — वैचारिक दूरी बनाए रखते हुए प्रशासनिक सहयोग की राह चुनना।
राजनीतिक महत्व
राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एनसीपीआई सांसदों का NDA-विरोधी रुख बनाए रखते हुए BJP-नेतृत्व वाली राज्य सरकार के मुख्यमंत्री से मिलना, पश्चिम बंगाल की राजनीति में उभर रही नई व्यावहारिक धाराओं का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ये सांसद एनसीपीआई की राष्ट्रीय राजनीति और राज्य-स्तरीय प्रशासनिक ज़रूरतों के बीच किस तरह संतुलन बनाते हैं।