6 अगस्त 2026
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हुमायूं कबीर का एनसीपीआई अल्पसंख्यक सांसदों पर हमला: '2029 में जनता देगी करारा जवाब'

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हुमायूं कबीर का एनसीपीआई अल्पसंख्यक सांसदों पर हमला: '2029 में जनता देगी करारा जवाब'

सारांश

एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर ने एनसीपीआई के उन अल्पसंख्यक सांसदों को खुली चेतावनी दी जो भाजपा-विरोध के नाम पर जीते, लेकिन अब एनडीए की राह पकड़ रहे हैं। मुर्शिदाबाद से बोलते हुए उन्होंने तस्लीमा नसरीन और मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे पर भी भाजपा सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

एजेयूपी विधायक हुमायूं कबीर ने 6 अगस्त को मुर्शिदाबाद में एनसीपीआई के अल्पसंख्यक सांसदों पर निशाना साधा।
एनसीपीआई के तीन सांसद — अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद), खलीलुर रहमान (जंगीपुर) और यूसुफ पठान (बहरामपुर) — एनडीए बैठकों से दूर रहकर मुख्यमंत्री से मिल रहे हैं।
कबीर ने चेतावनी दी कि 2029 के चुनाव में मुर्शिदाबाद की जनता इन सांसदों को सबक सिखाएगी।
लेखिका तस्लीमा नसरीन की वापसी पर कहा — गरिमा बनी रहे, लेकिन किसी धर्म के खिलाफ नफरत फैलाने का अधिकार नहीं।
पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने पर भाजपा सरकार को विकास से भटकाव का दोषी ठहराया।

आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने 6 अगस्त को मुर्शिदाबाद में एनसीपीआई के अल्पसंख्यक सांसदों की राजनीतिक चाल पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जो सांसद भाजपा विरोध के नाम पर जनता का वोट लेकर अब एनडीए की राह पकड़ रहे हैं, उन्हें 2029 के आम चुनाव में मुर्शिदाबाद की जनता मुँहतोड़ जवाब देगी।

किन सांसदों पर साधा निशाना

एनसीपीआई के जिन अल्पसंख्यक सांसदों पर हुमायूं कबीर ने निशाना साधा, उनमें मुर्शिदाबाद से अबू ताहेर खान, जंगीपुर से खलीलुर रहमान और बहरामपुर से यूसुफ पठान शामिल हैं। कबीर ने कहा, 'वे भाजपा के खिलाफ थे, इसलिए जनता ने वोट डालकर उन्हें जिताया। अब वे एनडीए के साथ जा रहे हैं और एनसीपीआई में शामिल हो रहे हैं। फिर वे एनडीए की बैठकों में नहीं जा रहे और मुख्यमंत्री की बैठकों में जा रहे हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे दोहरे आचरण का हिसाब जनता अगले चुनाव में ज़रूर माँगेगी।

तस्लीमा नसरीन पर कबीर का रुख

बांग्लादेश से लौटीं लेखिका तस्लीमा नसरीन के बयानों पर भी हुमायूं कबीर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने याद दिलाया कि तस्लीमा नसरीन को करीब 19 साल पहले बांग्लादेश में विवादित टिप्पणियों के कारण आम जनता के विरोध के चलते देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वे भारत आईं और कोलकाता में रहीं, जहाँ तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार ने उनकी मदद की, लेकिन मुस्लिम समुदाय के विरोध के बाद उन्हें शहर भी छोड़ना पड़ा।

कबीर ने कहा कि भाजपा सरकार उन्हें वापस लाई है, और उनकी गरिमा बनी रहनी चाहिए, लेकिन 'किसी को भी किसी धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने या नफरत फैलाने का अधिकार नहीं है।'

मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने पर आपत्ति

पश्चिम बंगाल में पुलिस द्वारा कई मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के मामले पर हुमायूं कबीर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर स्पष्ट आदेश है और संविधान सभी धर्मों का सम्मान करता है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह विकास कार्यों पर ध्यान देने के बजाय 'कभी लाउडस्पीकर, कभी जानवरों की कुर्बानी और कभी अजान' जैसे मुद्दों को हवा दे रही है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा सरकार और विपक्षी दलों के बीच अल्पसंख्यक मतदाताओं को लेकर सियासी खींचतान तेज़ हो गई है। एनसीपीआई के अल्पसंख्यक सांसदों का एनडीए बैठकों से दूरी बनाते हुए मुख्यमंत्री से मिलना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। गौरतलब है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में मुर्शिदाबाद जैसी सीटें अल्पसंख्यक मतदाताओं के रुझान के लिहाज़ से निर्णायक मानी जाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यक मतदाताओं के बिखराव की गहरी चिंता को दर्शाता है। एनसीपीआई के सांसदों का एनडीए बैठकों से किनारा करना और मुख्यमंत्री से मिलना यह संकेत देता है कि वे दोनों खेमों में पैर रखने की कोशिश कर रहे हैं — एक जोखिम भरी रणनीति जो 2029 में उल्टी भी पड़ सकती है। तस्लीमा नसरीन और लाउडस्पीकर जैसे मुद्दों को एक ही बयान में उठाकर कबीर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अल्पसंख्यक भावनाओं की प्रवक्ता बनने की कोशिश में है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है कि मुर्शिदाबाद जैसी सीटों पर अल्पसंख्यक वोट का विभाजन ही भाजपा के लिए सबसे बड़ा अवसर है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हुमायूं कबीर ने एनसीपीआई के किन सांसदों पर निशाना साधा?
हुमायूं कबीर ने एनसीपीआई के तीन अल्पसंख्यक सांसदों — मुर्शिदाबाद से अबू ताहेर खान, जंगीपुर से खलीलुर रहमान और बहरामपुर से यूसुफ पठान — पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि ये सांसद भाजपा-विरोध के नाम पर जीते, लेकिन अब एनडीए के साथ जा रहे हैं और मुख्यमंत्री की बैठकों में शामिल हो रहे हैं।
हुमायूं कबीर ने 2029 के चुनाव को लेकर क्या कहा?
कबीर ने कहा कि 2029 के चुनाव में मुर्शिदाबाद की जनता इन सांसदों को करारा जवाब देगी। उनके अनुसार जनता ने भाजपा-विरोध में वोट दिया था, और अब एनडीए की तरफ जाना उस जनादेश का विश्वासघात है।
तस्लीमा नसरीन की वापसी पर हुमायूं कबीर का क्या रुख है?
कबीर ने कहा कि तस्लीमा नसरीन की गरिमा और सम्मान बना रहना चाहिए, लेकिन किसी को भी किसी धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी या नफरत फैलाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि नसरीन को करीब 19 साल पहले बांग्लादेश में विवादित टिप्पणियों के कारण देश छोड़ना पड़ा था।
मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने पर कबीर ने क्या कहा?
कबीर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का लाउडस्पीकर उपयोग पर स्पष्ट आदेश है और संविधान सभी धर्मों का सम्मान करता है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह विकास के बजाय लाउडस्पीकर, कुर्बानी और अजान जैसे मुद्दों को हवा देती रहती है।
आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) क्या है?
आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) पश्चिम बंगाल की एक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है जिसके प्रमुख हुमायूं कबीर हैं, जो स्वयं विधायक भी हैं। यह पार्टी मुख्यतः मुर्शिदाबाद क्षेत्र में अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच अपनी पहचान रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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