हुमायूं कबीर का एनसीपीआई अल्पसंख्यक सांसदों पर हमला: '2029 में जनता देगी करारा जवाब'
सारांश
मुख्य बातें
आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने 6 अगस्त को मुर्शिदाबाद में एनसीपीआई के अल्पसंख्यक सांसदों की राजनीतिक चाल पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जो सांसद भाजपा विरोध के नाम पर जनता का वोट लेकर अब एनडीए की राह पकड़ रहे हैं, उन्हें 2029 के आम चुनाव में मुर्शिदाबाद की जनता मुँहतोड़ जवाब देगी।
किन सांसदों पर साधा निशाना
एनसीपीआई के जिन अल्पसंख्यक सांसदों पर हुमायूं कबीर ने निशाना साधा, उनमें मुर्शिदाबाद से अबू ताहेर खान, जंगीपुर से खलीलुर रहमान और बहरामपुर से यूसुफ पठान शामिल हैं। कबीर ने कहा, 'वे भाजपा के खिलाफ थे, इसलिए जनता ने वोट डालकर उन्हें जिताया। अब वे एनडीए के साथ जा रहे हैं और एनसीपीआई में शामिल हो रहे हैं। फिर वे एनडीए की बैठकों में नहीं जा रहे और मुख्यमंत्री की बैठकों में जा रहे हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे दोहरे आचरण का हिसाब जनता अगले चुनाव में ज़रूर माँगेगी।
तस्लीमा नसरीन पर कबीर का रुख
बांग्लादेश से लौटीं लेखिका तस्लीमा नसरीन के बयानों पर भी हुमायूं कबीर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने याद दिलाया कि तस्लीमा नसरीन को करीब 19 साल पहले बांग्लादेश में विवादित टिप्पणियों के कारण आम जनता के विरोध के चलते देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वे भारत आईं और कोलकाता में रहीं, जहाँ तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार ने उनकी मदद की, लेकिन मुस्लिम समुदाय के विरोध के बाद उन्हें शहर भी छोड़ना पड़ा।
कबीर ने कहा कि भाजपा सरकार उन्हें वापस लाई है, और उनकी गरिमा बनी रहनी चाहिए, लेकिन 'किसी को भी किसी धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने या नफरत फैलाने का अधिकार नहीं है।'
मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने पर आपत्ति
पश्चिम बंगाल में पुलिस द्वारा कई मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के मामले पर हुमायूं कबीर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर स्पष्ट आदेश है और संविधान सभी धर्मों का सम्मान करता है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह विकास कार्यों पर ध्यान देने के बजाय 'कभी लाउडस्पीकर, कभी जानवरों की कुर्बानी और कभी अजान' जैसे मुद्दों को हवा दे रही है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा सरकार और विपक्षी दलों के बीच अल्पसंख्यक मतदाताओं को लेकर सियासी खींचतान तेज़ हो गई है। एनसीपीआई के अल्पसंख्यक सांसदों का एनडीए बैठकों से दूरी बनाते हुए मुख्यमंत्री से मिलना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। गौरतलब है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में मुर्शिदाबाद जैसी सीटें अल्पसंख्यक मतदाताओं के रुझान के लिहाज़ से निर्णायक मानी जाती हैं।