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TMC के 20 बागी सांसदों में हिम्मत होती तो इस्तीफा देते: हुमायूं कबीर का तीखा तंज

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TMC के 20 बागी सांसदों में हिम्मत होती तो इस्तीफा देते: हुमायूं कबीर का तीखा तंज

सारांश

TMC के 20 बागी सांसदों का त्रिपुरा की अज्ञात पार्टी NCPI में शामिल होना बंगाल की राजनीति में नई उथल-पुथल का संकेत है। AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने सीधे पूछा — अगर हिम्मत थी तो इस्तीफा क्यों नहीं दिया? जनता ही असली जनादेश की कसौटी है।

मुख्य बातें

AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने TMC के 20 बागी सांसदों को चुनौती दी कि हिम्मत होती तो पहले लोकसभा से इस्तीफा देते।
बागी सांसदों ने रविवार को त्रिपुरा की लगभग अज्ञात पार्टी 'नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने की घोषणा की।
सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर आधिकारिक अनुरोध किया।
हुमायूं कबीर ने काकोली घोष दस्तीदार और कल्याण बनर्जी पर सवाल उठाए — दोनों TMC चुनाव चिह्न पर जीते थे।
ममता बनर्जी के रेजीनगर या बशीरहाट से चुनाव लड़ने पर कबीर ने समर्थन का संकेत दिया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों के नई पार्टी में शामिल होने के कदम पर आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने मंगलवार, 17 जून 2025 को कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि इन सांसदों में वास्तव में साहस होता, तो वे पहले लोकसभा से इस्तीफा देते और जनता को नए सिरे से अपना भविष्य तय करने का अवसर देते।

बागी सांसदों का कदम और हुमायूं कबीर की प्रतिक्रिया

रविवार को TMC के 20 बागी सांसदों ने त्रिपुरा की लगभग अज्ञात राजनीतिक पार्टी 'नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर आधिकारिक अनुरोध किया। हुमायूं कबीर ने इस पूरे घटनाक्रम को 'धोखेबाजी और बेईमानी' करार देते हुए कहा कि ये सांसद TMC के चुनाव चिह्न पर जीते थे और अब उस जनादेश की अनदेखी कर रहे हैं।

काकोली घोष और कल्याण बनर्जी पर सवाल

TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार और कल्याण बनर्जी के संदर्भ में हुमायूं कबीर ने कहा कि दोनों नेता एक ही पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि आज किस उद्देश्य से ये मुद्दे उठाए जा रहे हैं और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र क्यों लिखा जा रहा है — इसका जवाब तो संबंधित नेता ही दे सकते हैं।

जनता के बीच जाने की चुनौती

AJUP प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे स्वयं संसद के सदस्य नहीं हैं, इसलिए संसदीय मामलों पर विस्तृत टिप्पणी करना उचित नहीं समझते। परंतु उनका मानना है कि इन सांसदों को जनता के बीच जाना चाहिए — जनता ही तय करेगी कि उनके दावे और आरोप कितने सही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि काकोली घोष और अन्य बागी सांसद दो महीने तक कहाँ थे — इस तरह की राजनीतिक चालबाजी से उनका करियर स्वयं समाप्त हो जाएगा।

राम मंदिर चंदा विवाद और ममता बनर्जी पर रुख

राम मंदिर के चंदे से जुड़े विवाद पर हुमायूं कबीर ने कहा कि यह राम भक्तों का पैसा है और इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए तथा दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनाव लड़ने की संभावना पर उन्होंने कहा कि यह निर्णय ममता बनर्जी को स्वयं करना है। यदि वे रेजीनगर से चुनाव लड़ती हैं तो वे उनकी जीत के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। यदि वे बशीरहाट से चुनाव लड़ती हैं और उनका समर्थन माँगती हैं, तो वे अपनी पार्टी से कोई प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।

आगे क्या होगा

TMC के भीतर यह विद्रोह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई उथल-पुथल का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ शुरू होने वाली हैं। गौरतलब है कि NCPI जैसी लगभग अज्ञात पार्टी में 20 सांसदों का एक साथ शामिल होना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी आश्चर्य का विषय बना हुआ है। इस घटनाक्रम का असर TMC की संसदीय ताकत और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा पर पड़ना तय माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर एक संवैधानिक प्रश्न भी है: क्या दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में ये सांसद आते हैं? NCPI जैसी पार्टी का चुनाव — जिसका अस्तित्व लगभग नगण्य है — यह सुझाता है कि यह कदम राजनीतिक आदर्श से कम और सुरक्षित पैंतरेबाजी से अधिक है। बंगाल में विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह विद्रोह TMC के लिए संगठनात्मक चुनौती तो है, लेकिन बिना जनाधार वाली नई पार्टी में जाकर ये सांसद खुद कितनी ताकत हासिल करेंगे — यह देखना बाकी है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

TMC के 20 बागी सांसदों ने कौन सी पार्टी जॉइन की?
TMC के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने त्रिपुरा की लगभग अज्ञात पार्टी 'नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) में शामिल होने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी सौंपा।
हुमायूं कबीर ने TMC बागी सांसदों पर क्या कहा?
AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने कहा कि यदि इन सांसदों में वास्तव में साहस होता तो वे TMC के चुनाव चिह्न पर मिले जनादेश को वापस करते हुए लोकसभा से इस्तीफा देते और जनता को नए चुनाव के जरिए फैसला करने देते। उन्होंने इस कदम को 'धोखेबाजी और बेईमानी' बताया।
काकोली घोष दस्तीदार और कल्याण बनर्जी इस विवाद में कैसे जुड़े हैं?
हुमायूं कबीर ने इन दोनों TMC सांसदों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि दोनों TMC के चुनाव चिह्न पर जीते थे, फिर अब किस उद्देश्य से मुद्दे उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका जवाब संबंधित नेता ही दे सकते हैं।
ममता बनर्जी के चुनाव लड़ने पर हुमायूं कबीर का क्या रुख है?
हुमायूं कबीर ने कहा कि यदि ममता बनर्जी रेजीनगर से चुनाव लड़ती हैं तो वे उनकी जीत के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। यदि वे बशीरहाट से चुनाव लड़ती हैं और उनका समर्थन माँगती हैं, तो AJUP अपना कोई प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार नहीं उतारेगी।
NCPI पार्टी क्या है और इसका महत्व क्यों है?
नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) त्रिपुरा की एक लगभग अज्ञात राजनीतिक पार्टी है, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर कोई उल्लेखनीय जनाधार नहीं है। TMC के 20 सांसदों का इसमें एक साथ शामिल होना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए असामान्य घटनाक्रम माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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