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शिवपाल यादव ने अखिलेश को बताया सर्वश्रेष्ठ, लोहिया ट्रस्ट की अध्यक्षता भतीजे को सौंपने पर बोले — 'ऐसा विजन किसी में नहीं'

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शिवपाल यादव ने अखिलेश को बताया सर्वश्रेष्ठ, लोहिया ट्रस्ट की अध्यक्षता भतीजे को सौंपने पर बोले — 'ऐसा विजन किसी में नहीं'

सारांश

चाचा शिवपाल यादव ने भतीजे अखिलेश यादव को लोहिया ट्रस्ट का मुखिया बनाने का प्रस्ताव खुद रखा और कहा — यूपी में उनके जैसा विकास का नजरिया किसी में नहीं। 2027 चुनाव से पहले यह बयान सपा की एकजुटता का सबसे बड़ा संकेत है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर चाचा शिवपाल यादव की जगह ली।
शिवपाल यादव ने खुद बैठक बुलाकर अखिलेश का नाम प्रस्तावित किया, जिसे बाद में मंजूरी मिली।
शिवपाल ने कहा — 'अखिलेश यादव जैसा आधुनिक विकास का विजन उत्तर प्रदेश में किसी के पास नहीं।' मंत्री ओम प्रकाश राजभर के भरोसे वाले बयान पर शिवपाल ने पलटवार करते हुए कहा — 'वे डरे हुए हैं।' शिवपाल ने यूपी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और 2027 में सपा की सरकार बनने का दावा किया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और विधायक शिवपाल यादव ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को इटावा में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जैसा आधुनिक विकास का नजरिया उत्तर प्रदेश की किसी भी राजनीतिक पार्टी में किसी के पास नहीं है। यह बयान उस वक्त आया जब अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव की जगह लोहिया ट्रस्ट का नेतृत्व संभाला है।

लोहिया ट्रस्ट की अध्यक्षता में बदलाव

शिवपाल यादव ने स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव को लोहिया ट्रस्ट का प्रमुख बनाने का प्रस्ताव उन्होंने ही रखा था। उन्होंने कहा, 'मैंने एक बैठक बुलाई थी, जिसमें मैंने इस पद के लिए अखिलेश यादव का नाम प्रस्तावित किया था, जिसे बाद में मंजूरी मिल गई।' उनके अनुसार अखिलेश के नेतृत्व में ट्रस्ट न केवल तरक्की करेगा, बल्कि समाजवादी विचारक राम मनोहर लोहिया के विचारों को आम जनता तक पहुँचाने में भी सक्षम होगा।

शिवपाल यादव ने यह भी दावा किया कि इस बदलाव से लोहिया ट्रस्ट और समाजवादी पार्टी, दोनों संगठनात्मक रूप से मज़बूत होंगे।

राजभर के बयान पर पलटवार

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया था कि अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल यादव पर भरोसा नहीं करते, क्योंकि अतीत में दोनों के बीच गंभीर राजनीतिक मतभेद रहे हैं। इस पर शिवपाल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'वे (राजभर) डरे हुए हैं।'

गौरतलब है कि शिवपाल यादव एक समय सपा से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया (पीएसपीएल) बना चुके हैं और कुछ समय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ भी जुड़े रहे। उस दौर में उन्होंने सपा को 'चोरों और बदमाशों की पार्टी' तक कह दिया था और माफिया के कब्जे का आरोप लगाया था। राजभर ने इन्हीं पुराने बयानों का हवाला देते हुए सवाल उठाए थे।

सरकार पर निशाना और 2027 का दावा

शिवपाल यादव ने उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने दावा किया, 'पूरे उत्तर प्रदेश में सरकार और एनडीए गठबंधन की असल स्थिति सभी के सामने है। राज्य में जबरन वसूली, रिश्वतखोरी, बेईमानी और भ्रष्टाचार के बिना कोई काम नहीं होता।' उन्होंने यह भी कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी सत्ता में वापसी करेगी।

मंत्री अनिल राजभर ने भी सपा प्रमुख की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को किसी पर भरोसा नहीं — यहाँ तक कि खुद पर भी नहीं।

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और सभी दल अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटे हैं। शिवपाल यादव का अखिलेश के पक्ष में इस तरह मुखर होना सपा की एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि चाचा-भतीजे की यह नज़दीकी चुनावी गणित से प्रेरित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि रणनीतिक भी है — 2027 के करीब आते चुनाव में सपा को एकजुट दिखाना ज़रूरी है। लेकिन मुख्यधारा की कवरेज एक अहम तथ्य को नज़रअंदाज़ करती है: शिवपाल यादव ने कभी खुलेआम सपा को 'चोरों और माफिया की पार्टी' कहा था, और अब वही पार्टी और उसके नेता को वे 'सर्वश्रेष्ठ विजनरी' बता रहे हैं। यह यू-टर्न उत्तर प्रदेश की जाति-आधारित राजनीति की जटिलता को उजागर करता है, जहाँ सैद्धांतिक मतभेद चुनावी समझौतों के सामने अक्सर गौण हो जाते हैं। राजभर का पलटवार दरअसल एनडीए की उस चिंता को भी दर्शाता है कि यादव परिवार की एकजुटता उनके लिए चुनावी चुनौती बन सकती है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष कैसे बने?
शिवपाल यादव ने खुद एक बैठक बुलाकर अखिलेश यादव का नाम लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया, जिसे बाद में मंजूरी दे दी गई। इस तरह अखिलेश ने अपने चाचा शिवपाल यादव की जगह ट्रस्ट का नेतृत्व संभाला।
शिवपाल यादव ने अखिलेश की तारीफ में क्या कहा?
शिवपाल यादव ने इटावा में पत्रकारों से कहा कि उत्तर प्रदेश में कई पार्टियाँ रही हैं, लेकिन अखिलेश यादव जैसा आधुनिक विकास का विजन किसी के पास नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश के नेतृत्व में लोहिया ट्रस्ट और सपा दोनों मज़बूत होंगे।
ओम प्रकाश राजभर ने शिवपाल-अखिलेश पर क्या कहा?
मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल पर भरोसा नहीं करते, क्योंकि शिवपाल ने अतीत में सपा छोड़ी, अलग पार्टी बनाई और सपा के खिलाफ तीखे बयान दिए। इस पर शिवपाल यादव ने कहा कि राजभर 'डरे हुए हैं।'
शिवपाल यादव ने यूपी सरकार पर क्या आरोप लगाए?
शिवपाल यादव ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में एनडीए सरकार के कार्यकाल में जबरन वसूली, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार बिना किसी काम नहीं होता। उन्होंने 2027 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने का दावा भी किया।
प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया (पीएसपीएल) क्या है?
पीएसपीएल वह पार्टी है जो शिवपाल यादव ने सपा से अलग होने के बाद बनाई थी। इस दौरान उन्होंने सपा पर कड़े आरोप भी लगाए थे। बाद में वे फिर सपा के साथ जुड़ गए और अब अखिलेश यादव का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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