शिवपाल यादव ने अखिलेश को बताया सर्वश्रेष्ठ, लोहिया ट्रस्ट की अध्यक्षता भतीजे को सौंपने पर बोले — 'ऐसा विजन किसी में नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और विधायक शिवपाल यादव ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को इटावा में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जैसा आधुनिक विकास का नजरिया उत्तर प्रदेश की किसी भी राजनीतिक पार्टी में किसी के पास नहीं है। यह बयान उस वक्त आया जब अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव की जगह लोहिया ट्रस्ट का नेतृत्व संभाला है।
लोहिया ट्रस्ट की अध्यक्षता में बदलाव
शिवपाल यादव ने स्पष्ट किया कि अखिलेश यादव को लोहिया ट्रस्ट का प्रमुख बनाने का प्रस्ताव उन्होंने ही रखा था। उन्होंने कहा, 'मैंने एक बैठक बुलाई थी, जिसमें मैंने इस पद के लिए अखिलेश यादव का नाम प्रस्तावित किया था, जिसे बाद में मंजूरी मिल गई।' उनके अनुसार अखिलेश के नेतृत्व में ट्रस्ट न केवल तरक्की करेगा, बल्कि समाजवादी विचारक राम मनोहर लोहिया के विचारों को आम जनता तक पहुँचाने में भी सक्षम होगा।
शिवपाल यादव ने यह भी दावा किया कि इस बदलाव से लोहिया ट्रस्ट और समाजवादी पार्टी, दोनों संगठनात्मक रूप से मज़बूत होंगे।
राजभर के बयान पर पलटवार
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया था कि अखिलेश यादव अपने चाचा शिवपाल यादव पर भरोसा नहीं करते, क्योंकि अतीत में दोनों के बीच गंभीर राजनीतिक मतभेद रहे हैं। इस पर शिवपाल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'वे (राजभर) डरे हुए हैं।'
गौरतलब है कि शिवपाल यादव एक समय सपा से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया (पीएसपीएल) बना चुके हैं और कुछ समय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ भी जुड़े रहे। उस दौर में उन्होंने सपा को 'चोरों और बदमाशों की पार्टी' तक कह दिया था और माफिया के कब्जे का आरोप लगाया था। राजभर ने इन्हीं पुराने बयानों का हवाला देते हुए सवाल उठाए थे।
सरकार पर निशाना और 2027 का दावा
शिवपाल यादव ने उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने दावा किया, 'पूरे उत्तर प्रदेश में सरकार और एनडीए गठबंधन की असल स्थिति सभी के सामने है। राज्य में जबरन वसूली, रिश्वतखोरी, बेईमानी और भ्रष्टाचार के बिना कोई काम नहीं होता।' उन्होंने यह भी कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी सत्ता में वापसी करेगी।
मंत्री अनिल राजभर ने भी सपा प्रमुख की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को किसी पर भरोसा नहीं — यहाँ तक कि खुद पर भी नहीं।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और सभी दल अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटे हैं। शिवपाल यादव का अखिलेश के पक्ष में इस तरह मुखर होना सपा की एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि चाचा-भतीजे की यह नज़दीकी चुनावी गणित से प्रेरित है।