16 सितंबर 2026
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अखिलेश पर संजय निषाद का तीखा प्रहार: 'खून के रिश्तों पर भरोसा नहीं, दूसरों के साथ क्या करेंगे'

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अखिलेश पर संजय निषाद का तीखा प्रहार: 'खून के रिश्तों पर भरोसा नहीं, दूसरों के साथ क्या करेंगे'

सारांश

यूपी के मंत्री संजय निषाद ने अखिलेश यादव को 'अहंकारी' बताते हुए दोहरे मोर्चे पर घेरा — लोहिया ट्रस्ट से शिवपाल को हटाने और यूसीसी के विरोध पर। सवाल सीधा है: जो नेता अपने ही परिवार पर भरोसा नहीं करता, वह जनता का विश्वास कैसे जीतेगा?

मुख्य बातें

संजय निषाद ने 16 सितंबर 2026 को अखिलेश यादव को 'अहंकारी' बताते हुए लोहिया ट्रस्ट विवाद पर तीखा हमला किया।
शिवपाल सिंह यादव को हटाकर अखिलेश का लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनना विवाद का केंद्र बना।
निषाद ने यूसीसी विरोध को गलत बताया; कहा — उत्तराखंड, असम और गुजरात में यूसीसी लागू, वहाँ लोग संतुष्ट।
उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हवाला देते हुए समान कानून की वकालत की।
14,429 प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की यूपी सरकार की योजना का स्वागत करते हुए इसे गरीब बच्चों के लिए जरूरी बताया।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने 16 सितंबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर कड़ा हमला बोला — लोहिया ट्रस्ट विवाद और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर अखिलेश के विरोध को लेकर। निषाद ने अखिलेश को 'अहंकारी' करार देते हुए कहा कि जो नेता अपने परिजनों पर भरोसा नहीं करता, वह आम जनता के साथ क्या न्याय करेगा।

लोहिया ट्रस्ट विवाद पर सीधा निशाना

शिवपाल सिंह यादव को हटाकर अखिलेश यादव के स्वयं लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने पर संजय निषाद ने कहा, 'यह आज के दिन में अहंकार है। ट्रस्ट का नाम ही न्यास है और न्यास का मतलब भरोसा या विश्वास होता है। अगर आपको अपने ही खून के रिश्तों पर भरोसा नहीं है, तो आप दूसरों के साथ क्या करेंगे?' निषाद ने यह भी जोड़ा कि राजनीति भी भरोसे का एक रूप है — जनता अपने नेता, अपनी पार्टी और अपने क्षेत्र पर भरोसा करती है। जब नेतृत्व के शीर्ष स्तर पर ही विश्वास का अभाव हो, तो जनता के प्रति जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

यूसीसी पर अखिलेश की आलोचना

समान नागरिक संहिता के विरोध पर निषाद ने कहा, 'उनके पास जैसे सलाहकार हैं, उसी वजह से वे आज सत्ता से बाहर हैं।' उन्होंने तर्क दिया कि संविधान हमेशा सामाजिक न्याय की बात करता है और सामाजिक न्याय तभी संभव है जब समान नागरिक संहिता और समान अधिकार लागू हों। निषाद ने सीधा सवाल उठाया — 'क्या मुस्लिम महिलाएं मतदाता नहीं हैं? क्या वे इस देश की महिलाएं नहीं हैं?' उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति, धर्म और लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और संविधान में धर्म की नहीं, समानता की जगह है।

उत्तराखंड, असम, गुजरात का उदाहरण

निषाद ने बताया कि यूसीसी उत्तराखंड, असम और गुजरात में पहले ही लागू हो चुका है और वहाँ के लोग इससे संतुष्ट हैं। उनका कहना था कि इसी आधार पर यह कानून अन्य राज्यों में भी लागू होना चाहिए और सभी को इसका स्वागत करना चाहिए। यूसीसी का विरोध करना, उनके शब्दों में, 'गलत है।' यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी राष्ट्रीय राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है और विपक्ष लगातार इस पर आपत्तियाँ दर्ज कर रहा है।

स्मार्ट स्कूल योजना पर निषाद का बयान

उत्तर प्रदेश में 14,429 प्राइमरी स्कूलों को 'स्मार्ट' स्कूल बनाने के सरकारी निर्णय पर संजय निषाद ने कहा कि यह कदम समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े बच्चों के लिए है। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के 'अंत्योदय' दर्शन का संदर्भ देते हुए कहा कि गरीब परिवार में जन्म लेने वाले बच्चे को भी स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा मिलनी चाहिए। गौरतलब है कि यह योजना भाजपा की समावेशी शिक्षा नीति का हिस्सा बताई जा रही है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

संजय निषाद का यह हमला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से शुरू हो गई हैं। सपा-भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है और लोहिया ट्रस्ट में परिवर्तन ने सपा के भीतर के कलह को भी सार्वजनिक कर दिया है। आने वाले हफ्तों में यूसीसी और पारिवारिक राजनीति का यह मुद्दा और गर्म होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा है — सपा की पारिवारिक दरारों को जनता के सामने उजागर करना। लोहिया ट्रस्ट प्रकरण सपा के लिए सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल नहीं, यह यादव परिवार की पुरानी दरारों की सार्वजनिक पुनरावृत्ति है। यूसीसी का मुद्दा उठाकर निषाद ने मुस्लिम महिलाओं को केंद्र में रखा — जो विपक्ष के लिए जवाब देना आसान नहीं होगा। 2027 चुनाव से पहले इस तरह के बयान सपा को रक्षात्मक स्थिति में धकेलने की सुनियोजित कोशिश है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निषाद ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
संजय निषाद ने अखिलेश यादव को 'अहंकारी' बताते हुए कहा कि वे शिवपाल सिंह यादव जैसे अपने ही खून के रिश्तेदारों पर भरोसा नहीं करते, इसलिए उन्हें लोहिया ट्रस्ट से हटाया। उन्होंने कहा कि जो नेता परिजनों पर विश्वास नहीं करता, वह जनता के साथ क्या व्यवहार करेगा।
लोहिया ट्रस्ट विवाद क्या है?
अखिलेश यादव ने शिवपाल सिंह यादव को लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से हटाकर स्वयं यह जिम्मेदारी ले ली। इस कदम को संजय निषाद ने परिवार के भीतर अविश्वास और अहंकार का प्रतीक बताया।
संजय निषाद ने यूसीसी पर क्या कहा?
निषाद ने कहा कि यूसीसी सामाजिक न्याय के लिए जरूरी है और इसका विरोध करना गलत है। उन्होंने बताया कि यूसीसी उत्तराखंड, असम और गुजरात में पहले ही लागू है और वहाँ के लोग संतुष्ट हैं।
क्या उत्तर प्रदेश में यूसीसी लागू होगा?
संजय निषाद ने संकेत दिया कि जिस तरह अन्य राज्यों में यूसीसी सफल रहा है, उसी आधार पर उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू करना उचित होगा। हालाँकि, अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
यूपी के 14,429 प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट बनाने की योजना क्या है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने 14,429 प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने का फैसला किया है। संजय निषाद ने इसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 'अंत्योदय' सोच से जोड़ते हुए कहा कि गरीब बच्चों को भी स्मार्ट क्लासरूम में पढ़ने का अधिकार मिलना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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