लोहिया ट्रस्ट विवाद: भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर बोले — शिवपाल का अपमान, अखिलेश पर परिवार का भरोसा नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक नंद किशोर गुर्जर ने 14 सितंबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। लोहिया ट्रस्ट की अध्यक्षता शिवपाल सिंह यादव की जगह अखिलेश यादव को सौंपे जाने को गुर्जर ने 'शिवपाल का बड़ा अपमान' करार दिया और कहा कि यह घटना सपा के भीतर गहरे राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा करती है।
लोहिया ट्रस्ट विवाद और शिवपाल का अपमान
गुर्जर ने कहा कि शिवपाल सिंह यादव ने मुलायम सिंह यादव के संघर्ष में और समाजवादी पार्टी को खड़ा करने में निर्णायक भूमिका निभाई थी। उन्होंने शिवपाल को मुलायम के दीर्घकालिक विश्वासपात्र और पार्टी की नींव रखने वाले नेता के रूप में रेखांकित किया। गुर्जर ने कहा, 'जिस व्यक्ति ने पार्टी और उसके संस्थापक को वर्षों तक थामे रखा, उसे ट्रस्ट की अध्यक्षता से हटाना उनके योगदान का अपमान है।'
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट के अध्यक्ष भी अखिलेश यादव हैं, और अब लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी भी उनके पास आ गई है। गुर्जर ने सवाल उठाया कि अखिलेश यादव अपने ही परिवार के वरिष्ठ नेताओं पर भरोसा क्यों नहीं कर पा रहे। उन्होंने शिवपाल को सुझाव दिया कि वे भाजपा में शामिल हों या अलग राजनीतिक दल बनाएं, और कहा कि यादव समाज तथा मुलायम के समर्थकों की भावनाएं शिवपाल से जुड़ी हुई हैं।
डुप्लीकेट मतदाता विवाद और सपा पर चुनावी आरोप
इटावा विधानसभा क्षेत्र के 458 पोलिंग स्टेशनों पर तीन हजार से अधिक कथित डुप्लीकेट मतदाताओं की जांच की सपा की मांग पर गुर्जर ने कहा कि मतदाता सूची को पारदर्शी रखना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मतदाताओं को 'डुप्लीकेट' बताया जा रहा है, वे सपा के अपने राजनीतिक आधार से जुड़े हो सकते हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान उनकी विधानसभा में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें उन्होंने बाहरी या अवैध रूप से जोड़े गए मतदाता बताया। गुर्जर ने सपा पर चुनाव से पहले मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर संदेह पैदा करने की 'सोची-समझी रणनीति' अपनाने का आरोप लगाया।
2027 चुनाव: सपा की रथयात्रा रणनीति पर सवाल
सपा द्वारा आगामी चुनाव में लंबी दूरी की रथयात्रा के बजाय विधानसभा स्तर पर प्रचार अभियान चलाने के फैसले पर गुर्जर ने कहा कि यह पार्टी की कमजोर होती स्थिति का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा को बहुत कम सीटें मिलेंगी। गुर्जर के अनुसार, जनता विकास, कानून-व्यवस्था और शासन के आधार पर मतदान करेगी — और इन तीनों मोर्चों पर भाजपा की स्थिति मजबूत है।
जयंत चौधरी के बयान पर प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय लोक दल (RLD) प्रमुख जयंत चौधरी के उस बयान पर — कि सपा के साथ गठबंधन के दौरान बंद कमरों में हुई बातें सार्वजनिक होने पर अखिलेश यादव के लिए उत्तर प्रदेश में राजनीतिक जमीन नहीं बचेगी — गुर्जर ने कहा कि जयंत चौधरी 'गंभीर और पढ़े-लिखे नेता हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेताओं की ओर से विभिन्न सामाजिक समूहों को लेकर 'आपत्तिजनक टिप्पणियाँ' की गई हैं। गुर्जर ने कहा कि जयंत चौधरी के खिलाफ किसी भी राजनीतिक टिप्पणी का किसान, मजदूर और युवा विरोध करेंगे, और सपा पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पुराने सहयोगियों का सम्मान न करने का आरोप भी लगाया।
लोनी मामला, बुलडोजर कार्रवाई और यूसीसी
लोनी से जुड़े एक कथित यौन उत्पीड़न मामले में प्रशासन द्वारा आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई पर गुर्जर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रभावित परिवारों के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात की और परिवारों को सरकारी कार्रवाई का आश्वासन मिला। गुर्जर ने कहा, 'पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कठोर कार्रवाई आवश्यक है।'
असदुद्दीन ओवैसी के समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भाजपा पर लगाए गए आरोपों पर गुर्जर ने कहा कि देश संविधान और कानून के आधार पर चलेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में लिए गए फैसलों का हवाला देते हुए UCC का समर्थन किया और कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार इस दिशा में प्रतिबद्धता दिखा चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब UCC पर राष्ट्रीय बहस तेज हो रही है।
गौरतलब है कि सपा के भीतर परिवार-विरोध की यह पहली कड़वाहट नहीं है — शिवपाल और अखिलेश के बीच वर्षों पुरानी राजनीतिक खींचतान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक परिचित विषय रहा है। 2027 के चुनाव नजदीक आते-आते यह विवाद सपा के लिए नई चुनौती बन सकता है।