एनसीपीआई सांसद खलीलुर रहमान और अबू ताहेर खान ने नबान्ना में CM सुवेंदु अधिकारी से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए मुर्शिदाबाद के दोनों लोकसभा सांसद — खलीलुर रहमान और अबू ताहेर खान — ने शनिवार, 8 अगस्त को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से राज्य सचिवालय नबान्ना में मुलाकात की। यह बैठक मुर्शिदाबाद जिले में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और ट्रिब्यूनल के फैसलों में देरी के संवेदनशील मुद्दे पर केंद्रित रही।
बैठक का मुख्य एजेंडा
बैठक में प्रमुख रूप से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मुर्शिदाबाद जिले में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का मुद्दा उठाया गया। इसके साथ ही इन मामलों में ट्रिब्यूनल के फैसलों में हो रही देरी पर भी चर्चा हुई। उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व शुक्रवार को TMC के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग प्रतिनिधिमंडल भी नबान्ना में मुख्यमंत्री से इसी मुद्दे पर मिल चुका था।
मुख्यमंत्री का रुख
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए राज्य सरकार इसमें सीधा हस्तक्षेप नहीं कर सकती। हालाँकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन लोगों के मामले ट्रिब्यूनल में लंबित हैं, उन्हें सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा। साथ ही अधिकारी ने यह भी दोहराया कि जिन लोगों ने अब तक ट्रिब्यूनल में आवेदन नहीं किया है, वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा सकेंगे।
राजनीतिक संदर्भ: NDA से दूरी, फिर भी समन्वय
रहमान और खान दोनों एनसीपीआई के भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। इसके बावजूद दोनों ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर आयोजित उस बैठक में भाग लिया, जिसमें TMC से एनसीपीआई में आए सभी 20 लोकसभा सांसद मौजूद थे। यह राजनीतिक विरोधाभास — NDA विरोध और PM आवास पर उपस्थिति — राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यूसुफ पठान का स्पष्टीकरण
मुर्शिदाबाद के तीसरे अल्पसंख्यक सांसद और क्रिकेटर से राजनेता बने यूसुफ पठान ने भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि वे एनसीपीआई के NDA में शामिल होने के विरोधी हैं, परंतु अपने लोकसभा क्षेत्र के विकास के लिए वे सुवेंदु अधिकारी सरकार के साथ कार्यात्मक समन्वय बनाए रखेंगे। यह रुख तीनों सांसदों की साझा रणनीति को दर्शाता है — वैचारिक दूरी बनाए रखते हुए व्यावहारिक सहयोग।
आगे क्या
मतदाता सूची का यह विवाद पश्चिम बंगाल में आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक-बहुल जिले में। ट्रिब्यूनल के फैसलों की गति और राज्य सरकार के रुख पर सभी पक्षों की नज़र बनी रहेगी।