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ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर कड़ा प्रहार, वोटर लिस्ट विवाद को लेकर गंभीर आरोप

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ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर कड़ा प्रहार, वोटर लिस्ट विवाद को लेकर गंभीर आरोप

सारांश

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि विशेष पुनरीक्षण के दौरान धार्मिक और चैरिटी संगठनों के सदस्यों को मतदाता सूची से हटाया गया है। यह विवाद राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित कर रहा है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान धार्मिक संगठनों की सदस्यता प्रभावित अल्पसंख्यक समुदायों की वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए तृणमूल कांग्रेस की वोटरों को मदद देने की प्रतिबद्धता कम्युनिस्ट पार्टी पर भाजपा के साथ गठबंधन का आरोप

कोलकाता, ७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर तीखा आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान आयोग ने विभिन्न धार्मिक और चैरिटी संगठनों के सदस्यों को भी नहीं बख्शा।

मुख्यमंत्री ने नदिया और उत्तर २४ परगना जिलों में तीन चुनावी रैलियों को संबोधित किया। इन रैलियों में, आयोग पर हमले करते हुए उन्होंने विशेष रूप से स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन, तथा मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि यह जानकर उन्हें दुःख हुआ कि एसआईआर के दौरान मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़े 300 लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए।

सीएम ने कहा, "रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के भिक्षुओं को भी नहीं बख्शा गया।"

उनके अनुसार, एसआईआर के दौरान आयोग ने विशेष रूप से उन जिलों को निशाना बनाया, जहां अल्पसंख्यकों और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों की संख्या अधिक है। इन क्षेत्रों से सबसे अधिक नाम हटाए गए।

उन्होंने बताया कि मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण २४ परगना, उत्तर २४ परगना और नदिया जैसे जिलों में सबसे अधिक नाम हटाए गए हैं। उत्तर २४ परगना के बनगांव उप-मंडल में, मतुआ समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया। नदिया के चकदाहा और हरिणघाटा जैसे क्षेत्रों और उत्तर २४ परगना के गाइघाटा में वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए थे।

मुख्यमंत्री ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) पर कई विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के साथ गुपचुप समझौता करने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने कहा कि सीपीआई(एम) के नेताओं को पता था कि वे जीत नहीं पाएंगे, इसलिए वे भाजपा विरोधी वोटों को बांटकर भाजपा की जीत पक्की करने की कोशिश करेंगे। 2021 के विधानसभा चुनावों में पूरी तरह से साफ हो जाने के बाद भी सीपीआई(एम) के नेता बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, और इस बार भी उन्हें पूरी तरह से साफ कर देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस उन सभी वोटरों को हर संभव मदद देगी जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, ताकि वे इस उद्देश्य के लिए बनाए गए अपीलीय ट्रिब्यूनल में जाकर अपने वोट देने के अधिकार वापस पा सकें। भाजपा और आयोग का एकमात्र मकसद चयनित तरीके से वोटरों के नाम हटाना है। वह उन्हें इस उद्देश्य में कभी सफल नहीं होने देंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह समाज के विभिन्न वर्गों के बीच मतदाता अधिकारों के सवाल को भी उठाता है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कई धार्मिक और चैरिटी संगठनों के सदस्यों को वोटर लिस्ट से हटा दिया।
इस विवाद का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण यह है कि अल्पसंख्यक और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों के सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।
ममता बनर्जी ने किस प्रकार के समुदायों पर जोर दिया?
उन्होंने उन जिलों का जिक्र किया जहां अल्पसंख्यक और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों की संख्या अधिक है।
क्या तृणमूल कांग्रेस वोटरों की मदद करेगी?
जी हां, ममता बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस उन सभी वोटरों को मदद देगी जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।
कम्युनिस्ट पार्टी पर क्या आरोप लगे हैं?
ममता ने कम्युनिस्ट पार्टी पर भाजपा के साथ गुपचुप समझौता करने का आरोप लगाया है।
राष्ट्र प्रेस
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