मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा के पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया, पुनर्वासितों से चर्चा की
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्र का दौरा किया और पुनर्वासितों से संवाद किया।
- सुकमा में नक्सल पुनर्वास नीति का प्रभावी कार्यान्वयन हो रहा है।
- कौशल विकास प्रशिक्षण से पुनर्वासितों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।
- सरकार की प्राथमिकता पुनर्वासितों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है।
- पुनर्वास के तहत 1775 आवास स्वीकृत किए गए हैं।
सुकमा, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय में जिला अस्पताल के निकट स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा किया, जहाँ उन्होंने वहाँ चल रहे पुनर्वास और कौशल विकास कार्यों का अवलोकन किया। इस अवसर पर, उन्होंने पुनर्वासित व्यक्तियों से संवाद करते हुए उनके अनुभवों को जाना और उन्हें मुख्यधारा से जुड़कर एक नया जीवन आरंभ करने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुकमा में नक्सल पुनर्वास नीति के सफल क्रियान्वयन से सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। अब तक 2392 नक्सलियों ने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। उन्होंने जानकारी दी कि 361 पुनर्वासितों ने नया जीवन आरंभ किया है, जिन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण के जरिए आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, कपड़ा सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चालक जैसे कई ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे पुनर्वासितों का भविष्य उज्जवल हो रहा है। वर्ष 2026 में अब तक 307 लोगों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, और मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को प्रतिमाह 10,000 रुपए का स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
जिला प्रशासन की पहल पर 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए हैं, ताकि वे आधुनिक तकनीक और संचार माध्यमों से जुड़े रहें। इसी प्रकार, पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ रही 115 महिलाएं प्रशिक्षण और मोबाइल वितरण के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
इसके अलावा, नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के आश्रितों को भी सहायता प्रदान की गई है। अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में 20 तथा जिला प्रशासन द्वारा 95 व्यक्तियों को सरकारी सेवा में अवसर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह है कि पुनर्वासितों को सम्मानजनक जीवन, रोजगार और समाज में समान अवसर मिले, जिससे सुकमा जैसे क्षेत्रों में शांति और विकास को नई दिशा मिल सके।
इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बस्तर महेश कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष मगम्मा सोयम, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष हुंगाराम मरकाम, महिला आयोग की सदस्य दीपिका सोरी समेत कई गणमान्य नेता और अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुनर्वासित जनों को राजमिस्त्री किट और मोबाइल वितरित किए। उन्होंने नक्सली बारसे देवा के भाई बारसे बुधरा को पुवर्ती के पास के गांव सिलगेर में शिक्षादूत के रूप में नियुक्ति पत्र प्रदान किया। पूर्व नक्सली पापाराव की निमलगुंडा निवासी बहू सुन्नम सेंतो ने स्व-सहायता समूह के माध्यम से इमली की खरीद में दो क्विंटल इमली खरीदी, जिससे उन्होंने पांच हजार रुपए अर्जित किए। इनको भी मुख्यमंत्री ने शाल देकर सम्मानित किया।
सीएम ने नक्सल पीड़ितों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिसमें ग्राम ढोंडरा कोंटा निवासी मौसम संजना, नागारास जगरगुंडा निवासी भरत कुमार हेमला समेत अन्य बारह व्यक्तियों को अनुकंपा नियुक्ति दी गई। साथ ही अन्य विभागों के 6 लोगों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ, और उल्लास साक्षरता प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम में पुनर्वासित लोगों को आवास योजना के तहत वेटटी कोसा और रीना सोमडू को चाबी दी गई। अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विशेष रूप से पुनर्वासित लोगों को सुकमा जिले में 1775 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 44 पूर्ण हो चुके हैं। कार्यक्रम में 25 हितग्राहियों को आवास की चाबी, पूर्णता प्रमाण पत्र, शाल-श्रीफल से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने 'बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर, पुनर्वास से विकास तक' नामक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। पुनर्वास केंद्र में स्थित कला केंद्र में मुख्यमंत्री ने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की।