कर्नाटक कांग्रेस में उभरा नया संकट, एमएलसी अब्दुल जब्बार को पार्टी विरोधी गतिविधियों पर निलंबित किया गया
सारांश
Key Takeaways
- अब्दुल जब्बार को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किया गया।
- यह कार्रवाई डी.के. शिवकुमार द्वारा हस्ताक्षरित की गई।
- पार्टी में खींचतान बढ़ने की संभावना है।
- नसीर अहमद को भी इसी कारण हटाया गया।
- राज्य में कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं तेज हैं।
बेंगलुरु, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) ने बुधवार को महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए एमएलसी अब्दुल जब्बार को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया।
यह निलंबन आदेश उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। आदेश में कहा गया है कि दावणगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के हालिया उपचुनाव के दौरान एंटी-पार्टी गतिविधियों में शामिल होने के कारण यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से की गई है।
अब्दुल जब्बार राज्य कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष भी थे। उनसे पहले ही इस्तीफा मांगा गया था, जिसे स्वीकार करने के बाद डी.के. शिवकुमार ने पूरे अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ को भंग कर दिया।
यह ध्यान देने योग्य है कि कांग्रेस एमएलसी नसीर अहमद को भी इसी तरह के कारणों से 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के राजनीतिक सलाहकार पद से हटा दिया गया था।
इस घटनाक्रम से पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज होने की संभावना है, खासकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के खेमों के बीच।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नसीर अहमद और अब्दुल जब्बार को सिद्धारमैया खेमे का करीबी माना जाता है और वे आवास एवं वक्फ मंत्री जमीर अहमद खान के भी नजदीकी हैं।
बताया जा रहा है कि राज्य में संभावित कैबिनेट फेरबदल से पहले सियासी हलचल तेज है। सूत्रों के अनुसार, जमीर अहमद खान ने दावणगेरे दक्षिण सीट पर पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ माहौल बनाने की कथित कोशिश की। उन्होंने इस सीट से मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की मांग की थी, लेकिन पार्टी ने वरिष्ठ नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के पोते समर्थ मल्लिकार्जुन को टिकट दिया।
सूत्रों का दावा है कि जमीर अहमद खान, अब्दुल जब्बार और नसीर अहमद ने मिलकर पार्टी उम्मीदवार को हराने की साजिश रची, ताकि हाईकमान को यह संदेश दिया जा सके कि राज्य में मुस्लिम वोटों के लिए उनका नेतृत्व महत्वपूर्ण है। हालांकि, जमीर अहमद खान ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह उस समय केरल में व्यस्त थे।
बताया जा रहा है कि उपचुनाव के दौरान कर्नाटक आए AICC नेताओं ने इन घटनाओं की रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को सौंपी है। नसीर अहमद को पद से हटाए जाने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को जमीर अहमद खान के साथ करीब दो घंटे की बैठक भी की।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान इस पूरे मामले से नाराज है और मुख्यमंत्री ने जमीर अहमद खान से व्यक्तिगत रूप से अपनी भूमिका स्पष्ट करने को कहा है।