पोप लियो XIV का तानाशाही पर कड़ा बयान: धर्म का दुरुपयोग मानवता के लिए खतरा
सारांश
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कैमरून, १६ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कैमरून में आगमन पर पोप लियो चौदहवें ने तानाशाही को मानवता के लिए एक गंभीर खतरा बताया। यह बयान उन्होंने कैमरून के बामेंडा शहर में दिया।
पोप लियो ने आशा व्यक्त की कि दुनिया में शांति स्थापित हो। इसके साथ ही, उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो "अपने सैन्य, आर्थिक और राजनीतिक लाभ के लिए धर्म और ईश्वर का गलत उपयोग करते हैं, और जो पवित्रता को अंधेरे और गंदगी में धकेलते हैं।"
वेटिकन न्यूज़ के अनुसार, पोप लियो ने कहा कि युद्ध को बढ़ावा देने वाले लोग इस सच्चाई को नकारते हैं कि विनाश में एक पल लगता है, लेकिन उसे पुनर्निर्माण में एक पूरी जिंदगी भी कम पड़ जाती है।
कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च गुरु ने कहा, "कुछ तानाशाह" यह स्वीकार नहीं करते कि "विनाश करने में सिर्फ एक पल लगता है, लेकिन सब कुछ पुनः बनाने के लिए जीवन भर की मेहनत भी कम पड़ती है।" पोप ने इस पर अफसोस जताया कि सत्ता में बैठे लोग हत्या और विनाश पर अरबों डॉलर खर्च कर देते हैं, "फिर भी उपचार, शिक्षा और पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक संसाधन कहीं नहीं मिलते।"
उन्होंने आगे कहा कि लोग अफ्रीका के संसाधनों का उपयोग हथियार खरीदने के लिए करते हैं, "जिससे अस्थिरता और मृत्यु के अंतहीन चक्र को बनाए रखा जाता है।"
पोप ने ये टिप्पणियां कैमरून में जातीय संघर्ष के संदर्भ में की। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैथोलिक चर्च के सर्वोच्च गुरु पर की गई टिप्पणियाँ भी चर्चा का विषय रही हैं।
इस विवाद की शुरुआत ईस्टर के समय हुई, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी धमकियाँ देना शुरू किया। इसके जवाब में, पोप लियो ने अपने 'पाम संडे' संदेश में कहा कि ईश्वर उन लोगों की प्रार्थनाओं को अस्वीकृत कर देता है जो युद्ध छेड़ते हैं।
ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पोप की टिप्पणियों की खुलकर आलोचना की। रविवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोप को कमजोर बताया। कैथोलिक धर्म को अपनाने वाले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि पोप लियो को धर्मशास्त्र पर बोलते समय सतर्क रहना चाहिए।