पोप लियो XIV की वैश्विक नेताओं से शांति की अपील, ट्रंप विवाद की पृष्ठभूमि में संबोधन
सारांश
मुख्य बातें
पोप लियो XIV ने 31 मई 2026 को वेटिकन सिटी के अपोस्टोलिक पैलेस से अपने साप्ताहिक संबोधन में एक बार फिर वैश्विक नेताओं से न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में कदम उठाने की अपील की। उन्होंने प्रार्थना की कि ईश्वर सत्ता में बैठे लोगों के विवेक को प्रकाशित करे और उनके निर्णयों को शांति की ओर ले जाए। यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब पोप और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पश्चिम एशिया नीति पर तनातनी जारी है।
मई माह की शांति-प्रार्थना का संदर्भ
पोप लियो ने अपने संबोधन में कहा, 'प्रिय भाइयों और बहनों, मई महीने के दौरान पूरे चर्च से शांति के लिए एक स्वर में प्रार्थना उठी है। रोजरी की प्रार्थना के जरिए, लगातार और बिना रुके, लोगों ने युद्ध झेल रहे लोगों को वर्जिन मैरी की मदद और प्रार्थना के भरोसे पर सौंप दिया है।' उन्होंने पोलैंड के प्रसिद्ध मैरियन तीर्थस्थल में एकत्र हुए तीर्थयात्रियों का भी विशेष अभिवादन किया।
देखभाल और करुणा का आह्वान
पोप ने इस अवसर पर इटली के 25वें 'रिलीफ डे' का उल्लेख किया, जिसका इस वर्ष का विषय 'आई टेक केयर' है। उन्होंने कहा, 'मैं उन लोगों के करीब हूँ जो बीमार हैं और उन सभी के भी जो उनकी देखभाल करते हैं। मैं उन सभी का धन्यवाद करता हूँ और उन्हें प्रोत्साहित करता हूँ जो नज़दीकी और देखभाल की संस्कृति को फैलाने में मदद करते हैं।' गौरतलब है कि पोप ने बीमारों के प्रति कल्याण-भाव और सामाजिक करुणा को अपने संदेश का केंद्रीय हिस्सा बनाया।
ट्रंप से विवाद की पृष्ठभूमि
पश्चिम एशिया संकट पर पोप लियो XIV लगातार शांति वार्ता की पक्षधरता करते रहे हैं। इसी कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर खुलकर आरोप लगाए थे कि वह ईरान की मदद कर रहे हैं और अपनी टिप्पणियों से दुनिया को अधिक असुरक्षित बना रहे हैं। ट्रंप ने यहाँ तक आरोप लगाया था कि पोप ईरान को परमाणु हथियार संपन्न होने की वकालत कर रहे हैं — एक ऐसा दावा जिसे पोप ने सार्वजनिक रूप से खारिज किया।
पोप का स्पष्टीकरण
पोप लियो ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि ईरान को परमाणु हथियार मिलने चाहिए। उन्होंने केवल शांति वार्ता की अपील की है और आम नागरिकों पर बड़े हमलों की धमकियों की आलोचना की है। पत्रकारों से बातचीत में पोप ने कहा था, 'कैथोलिक चर्च वर्षों से सभी तरह के परमाणु हथियारों के खिलाफ बोलता आया है, इसमें कोई संदेह नहीं। चर्च का मिशन शांति का प्रचार करना है। यदि कोई इसके लिए मेरी आलोचना करना चाहता है, तो वह सच बोलकर करे।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वह किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की भाँति नहीं, बल्कि बाइबिल और चर्च की शिक्षाओं के आधार पर बोल रहे हैं।
आगे की राह
पोप लियो XIV के इस संबोधन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैश्विक नेता, विशेषकर संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में, उनकी अपील पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं। चर्च की ओर से शांति के लिए यह अभियान आने वाले महीनों में भी जारी रहने की संभावना है।