पेजेश्कियन का पोप लियो को संदेश: ईरान कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध, अमेरिका-इज़राइल पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शनिवार, 16 मई को पोप लियो XIV को संदेश भेजकर स्पष्ट किया कि तेहरान क्षेत्रीय संघर्षों के शांतिपूर्ण और कूटनीतिक समाधान के प्रति दृढ़ है। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने इस संदेश की पुष्टि की।
पेजेश्कियन का संदेश: कूटनीति पर ज़ोर
पेजेश्कियन ने पोप लियो के 'नैतिक रुख' की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका और इज़राइल की ओर से किए गए हमलों ने 'अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया और कूटनीतिक प्रयासों को कमज़ोर किया।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ईरान संवाद और शांतिपूर्ण वैध समाधान के प्रति गंभीर है, साथ ही अपनी आत्मरक्षा के अधिकार को भी बनाए रखेगा।
पेजेश्कियन ने पोप की 'न्यायपूर्ण शांति' के प्रति प्रतिबद्धता की भी प्रशंसा की और कहा कि 'तमाम टकराव और तनाव के बीच भी ईरान कूटनीतिक तरीकों से शांति स्थापित करने में विश्वास रखता है।'
अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से आग्रह
ईरानी राष्ट्रपति ने वैश्विक समुदाय से अपील की कि वह 'संयुक्त राज्य अमेरिका की अवैध मांगों और खतरनाक नीतियों' का विरोध करे और एक यथार्थवादी एवं न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाए। उनके अनुसार, अमेरिका और इज़राइल का रुख अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवीय मूल्यों और प्रमुख धर्मों की शिक्षाओं के लिए एक गंभीर चुनौती है।
वेटिकन और ट्रंप के बीच तनाव की पृष्ठभूमि
यह संदेश ऐसे समय में आया है जब वेटिकन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। वेटिकन लगातार मासूम नागरिकों पर हमलों को धर्म-विरुद्ध बताता रहा है। पोप लियो XIV ने एक प्रार्थना सभा में बाइबल उद्धृत करते हुए कहा था कि ऐसी हिंसा ईसा मसीह की शिक्षाओं के अनुरूप नहीं है।
इसके बाद ट्रंप काफी मुखर हो गए। उन्होंने पोप लियो पर सार्वजनिक रूप से आलोचना करते हुए दावा किया कि पोप ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति देने के पक्ष में प्रतीत होते हैं — जिसे अमेरिका कभी स्वीकार नहीं करेगा।
ट्रंप का स्पष्ट रुख
पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'जहाँ तक पोप की बात है, बात बहुत सरल है — चाहे मैं उन्हें खुश करूँ या नहीं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।' यह बयान वैश्विक कूटनीतिक हलकों में व्यापक रूप से चर्चित हुआ।
आगे की संभावनाएँ
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता की पृष्ठभूमि में पेजेश्कियन का यह संदेश महत्वपूर्ण संकेत है। विश्लेषकों के अनुसार, तेहरान एक साथ कूटनीतिक लचीलापन और आत्मरक्षा की दृढ़ता का संयोजन दिखाने की कोशिश कर रहा है — जो आने वाले हफ्तों में वार्ता की दिशा तय करेगा।