हुमायूं कबीर ने कहा: मतदाता सूची के मुद्दे पर मैं ट्रिब्यूनल नहीं जाऊंगा

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हुमायूं कबीर ने कहा: मतदाता सूची के मुद्दे पर मैं ट्रिब्यूनल नहीं जाऊंगा

सारांश

कोलकाता में हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया कि वह मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर ट्रिब्यूनल नहीं जाएंगे। उनका कहना है कि इससे वोटरों को लम्बे समय तक अपने अधिकार से वंचित रहना पड़ेगा। जानें कबीर के इस निर्णय के पीछे की वजह।

Key Takeaways

  • हुमायूं कबीर का ट्रिब्यूनल न जाने का निर्णय वोटरों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए है।
  • प्रोटेस्ट में उनकी उपस्थिति और विचारों ने इस मुद्दे को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
  • बंगाल की राजनीतिक स्थिति में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

कोलकाता, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से हटाए गए व्यक्तियों की अपील सुनने के लिए एक ट्रिब्यूनल गठित करने का निर्देश दिया है। हालांकि, आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने बुधवार को स्पष्ट किया कि वह ट्रिब्यूनल का रुख नहीं करेंगे।

कबीर ने कहा, 'मैं कभी ट्रिब्यूनल नहीं जाऊंगा।'

बुधवार को, आम जनता उन्नयन पार्टी ने मुर्शिदाबाद जिले के बरहमपुर में टेक्सटाइल मोड़ पर एसआईआर के खिलाफ एक विरोध सभा और डेप्युटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया। हुमायूं कबीर ने इस प्रोटेस्ट में भाग लिया और ट्रिब्यूनल के बारे में अपनी राय व्यक्त की।

भरतपुर के विधायक ने यह भी बताया कि वह ट्रिब्यूनल जाने के पक्ष में क्यों नहीं हैं। उन्होंने कहा, "ट्रिब्यूनल का सहारा लेने का मतलब है कि इस मुद्दे का समाधान पाने में तीन से चार वर्ष लग सकते हैं। इस अवधि में वोटरों को अपने मतदान अधिकार से वंचित रहना पड़ेगा।"

हुमायूं कबीर ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो वह अपने समर्थकों के साथ मिलकर और तेज़ी से विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा, "यदि आवश्यकता पड़ी, तो मैं उन वोटरों के साथ ब्लॉक दर ब्लॉक धरने पर बैठूंगा जिनके नाम अंतिम वोटर सूची में हैं।"

कबीर, जिन्हें पहले तृणमूल कांग्रेस से निलंबित किया गया था, ने इस स्थिति का जिम्मेदार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ठहराया।

प्रोटेस्ट के दौरान, एक लॉरी को अस्थायी मंच के रूप में उपयोग किया गया, जिससे कबीर ने पार्टी समर्थकों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में पार्टी के कई प्रमुख नेता भी मौजूद थे। उन्होंने दावा किया कि मुर्शिदाबाद जिले में लगभग 11 लाख वोटरों के नाम पर निर्णय लिया जा रहा है।

बाद में, आठ लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपने गया। हालांकि जिला मजिस्ट्रेट उपस्थित नहीं थे, लेकिन अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने उनके द्वारा ज्ञापन स्वीकार कर लिया।

मीटिंग के एक दिन पहले, मंगलवार को, शक्तिपुर पुलिस स्टेशन ने कबीर और उनकी पत्नी को एक नोटिस जारी कर पुलिस के सामने पेश होने का निर्देश दिया। बताया जा रहा है कि यह नोटिस सरकारी रिकॉर्ड में भूमि उपयोग स्थिति में बदलाव के बिना एक ड्रेनेज चैनल पर घर बनाने के आरोपों के संदर्भ में जारी किया गया था।

नोटिस का जवाब देते हुए, कबीर ने कहा, "मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है। वे जो कर सकते हैं, करेंगे। 22 साल बाद वे जागे हैं। मुझे भी पता है कि कौन क्या कर रहा है, और बाकी सब जानते हैं। मैं मुख्यमंत्री की विदाई की घंटी बजाऊंगा।"

Point of View

वे मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे को ट्रिब्यूनल में ले जाने के खिलाफ हैं। उनकी चिंता यह है कि इससे वोटरों को लम्बे समय तक अपने अधिकार से वंचित रहना पड़ेगा। यह स्थिति राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
NationPress
14/03/2026

Frequently Asked Questions

हुमायूं कबीर ने ट्रिब्यूनल जाने से क्यों मना किया?
उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल जाने का मतलब है कि इस मुद्दे को सुलझाने में तीन से चार साल लगेंगे, जिससे वोटरों को अपने अधिकार से वंचित रहना पड़ेगा।
प्रोटेस्ट में कबीर ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो वह वोटरों के साथ धरने पर बैठेंगे और इस मुद्दे को उठाएंगे।
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