चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से विपक्ष के आरोप खारिज: BJP के पंकज चौधरी का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने 27 सितंबर 2026 को लखनऊ में कहा कि चुनाव आयोग के संयुक्त बयान ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के तमाम आरोपों की हवा निकाल दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाकर भ्रम की राजनीति कर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।
आयोग का संयुक्त बयान और मुख्य तथ्य
भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान पंकज चौधरी ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एवं दोनों चुनाव आयुक्तों की 26 सितंबर को हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सहित आयोग के सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि SIR के मूल आदेश और विभिन्न चरणों की समय-सारणी पर भी तीनों सदस्यों की पूर्ण सहमति थी।
कैबिनेट सचिव पत्र विवाद पर सफाई
कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए चौधरी ने कहा कि आयोग के अनुसार यह पत्र किसी नीतिगत विषय या SIR से संबंधित नहीं था। यह केवल प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़ा एक आंतरिक प्रशासनिक मामला था। इस प्रकार, चौधरी के अनुसार, विपक्ष ने एक सामान्य प्रशासनिक पत्राचार को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की।
फॉर्म-6 और मतदाता सूची विवाद
फॉर्म-6 को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर पंकज चौधरी ने कहा कि आयोग अपनी प्रक्रिया पहले ही विस्तार से स्पष्ट कर चुका है और इस पर बेबुनियाद शंका फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आयोग हर पात्र नागरिक का मताधिकार सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहा है।
कांग्रेस पर संस्थाविरोधी राजनीति का आरोप
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष चुनावी पराजय के बाद से लगातार ईवीएम, चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का प्रयास करता रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है और इससे लोकतांत्रिक ढाँचे को कमजोर करने का जोखिम पैदा होता है।
आगे की स्थिति
पंकज चौधरी ने कहा कि चुनाव आयोग की सफाई के बाद अब कांग्रेस को तथ्यों का सम्मान करना चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ बयानबाजी बंद करनी चाहिए। यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है और विपक्षी दलों ने इस पर कई सवाल उठाए हैं।