23 सितंबर 2026
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संबित पात्रा का विपक्ष पर पलटवार: चुनाव आयोग पर आरोप लोकतंत्र को बदनाम करने की साजिश

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संबित पात्रा का विपक्ष पर पलटवार: चुनाव आयोग पर आरोप लोकतंत्र को बदनाम करने की साजिश

सारांश

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्ष के चुनाव आयोग पर लगाए आरोपों को 'लोकतंत्र बदनाम करने की साजिश' करार दिया। SIR पर सर्वसम्मति, पश्चिम बंगाल के सीट-वार आँकड़े और 2009 के नवीन चावला प्रकरण को सामने रखकर कांग्रेस के दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

संबित पात्रा ने 23 सितंबर 2026 को भाजपा मुख्यालय, नई दिल्ली में विपक्ष पर चुनाव आयोग (ECI) की छवि बिगाड़ने का आरोप लगाया।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिया गया था — पात्रा ने ECI के प्रेस नोट का हवाला दिया।
पश्चिम बंगाल की 20 सीटों पर सर्वाधिक मत-कटौती में TMC ने 13, कांग्रेस ने 1 और BJP ने 6 सीटें जीतीं — पात्रा ने 'वोट चोरी' के आरोप को खारिज किया।
2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन.
गोपालस्वामी ने नवीन चावला को हटाने की सिफारिश की थी, पर कांग्रेस सरकार ने उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया।
पात्रा ने कांग्रेस पर अतीत में ECI को प्रभावित करने और अब उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाने का दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी दलों पर चुनाव आयोग (ECI) की साख को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद से विपक्ष लगातार चुनाव हारता आया है और अब वह संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर लोकतंत्र की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहा है।

विपक्ष की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पात्रा का जवाब

पात्रा ने कहा कि उसी दिन कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग को लेकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, लेकिन उनके अनुसार विपक्ष अपने ही लगाए आरोपों के जाल में उलझ गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को 'तानाशाही' का प्रतीक बताने पर तुला है, जबकि चुनाव आयोग पूरी तरह संवैधानिक और लोकतांत्रिक ढाँचे के भीतर काम करता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की कोई भी संवैधानिक संस्था किसी की मनमर्जी के अधीन नहीं है, बल्कि संविधान के दायरे में अपने दायित्व निभा रही है।

SIR पर सर्वसम्मति का दावा

पात्रा ने चुनाव आयोग की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस नोट का हवाला देते हुए बताया कि उसके पहले ही अनुच्छेद में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का निर्णय सभी आधिकारिक और लोकतांत्रिक विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से लिया गया था। उन्होंने रेखांकित किया कि तीनों चुनाव आयुक्त इस फैसले पर एकमत थे और उनके बीच किसी प्रकार का मतभेद नहीं था।

पात्रा ने यह भी कहा कि यदि तीनों आयुक्त आपस में संवाद और पत्राचार करते हैं, तो यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा है — इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है।

पश्चिम बंगाल के आँकड़ों से वोट चोरी के आरोपों का खंडन

विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों पर पात्रा ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण सामने रखा। उनके अनुसार राज्य की जिन 20 विधानसभा सीटों पर सबसे अधिक मतों की कटौती हुई, उनमें से 13 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC), एक सीट पर कांग्रेस और छह सीटों पर भाजपा विजयी रही। उनके मुताबिक यह आँकड़ा स्वयं सिद्ध करता है कि वोट चोरी का आरोप तथ्यों पर टिका नहीं है।

कांग्रेस के इतिहास पर पात्रा का पलटवार

पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए 2005 और 2009 की घटनाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार 2005 में सोनिया गांधी ने नवीन चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने की घोषणा की थी, जबकि वे किसी संवैधानिक पद पर नहीं थीं।

उन्होंने दावा किया कि 2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर नवीन चावला को पद से हटाने की सिफारिश की थी और उन पर कांग्रेस के लिए कार्य करने तथा गोपनीय सूचनाएँ साझा करने के आरोप लगाए थे। पात्रा के मुताबिक कांग्रेस सरकार ने हटाने की बजाय नवीन चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया और उन्हीं की देखरेख में 2009 का लोकसभा चुनाव कराया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। पात्रा ने कहा कि जो पार्टी अतीत में खुद चुनाव आयोग को प्रभावित करने की कोशिश कर चुकी है, वही आज उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है — यह विरोधाभास जनता के सामने है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तर्क कि जीत के आधार पर वोट-कटौती की वैधता तय होती है, मूल प्रश्न को टालता है — असल सवाल यह है कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी और सहभागी थी या नहीं। 2009 के नवीन चावला प्रकरण का उल्लेख ऐतिहासिक रूप से प्रासंगिक है, पर इसे वर्तमान आरोपों के जवाब के रूप में इस्तेमाल करना 'हमने भी किया' वाली राजनीति है, जो संस्था की विश्वसनीयता को मजबूत नहीं करती। गौरतलब है कि चुनाव आयोग पर दोनों ओर से लगाए जाने वाले आरोप एक गहरे संस्थागत संकट की ओर इशारा करते हैं, जिसे केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं सुलझाया जा सकता।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संबित पात्रा ने चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों के बारे में क्या कहा?
BJP प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने 23 सितंबर 2026 को कहा कि विपक्षी दल 2014 के बाद से लगातार चुनाव हारने के बाद अब ECI जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर लोकतंत्र को बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने ECI के प्रेस नोट का हवाला देते हुए कहा कि SIR का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। विपक्ष ने इस प्रक्रिया में मतों की कटौती को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि पात्रा ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से यह निर्णय लिया गया था और इसमें कोई मतभेद नहीं था।
पात्रा ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण क्यों दिया?
पात्रा ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जिन 20 सीटों पर सबसे अधिक मत काटे गए, वहाँ TMC ने 13, कांग्रेस ने 1 और BJP ने 6 सीटें जीतीं। उनके अनुसार यह आँकड़ा विपक्ष के 'BJP के पक्ष में वोट चोरी' के दावे को खारिज करता है।
नवीन चावला और 2009 का विवाद क्या था, जिसका पात्रा ने उल्लेख किया?
पात्रा के अनुसार 2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर नवीन चावला को कांग्रेस के लिए काम करने और गोपनीय जानकारी साझा करने के आरोप में हटाने की सिफारिश की थी। कांग्रेस सरकार ने इस सिफारिश को नकारते हुए चावला को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया और उनकी देखरेख में 2009 का लोकसभा चुनाव कराया।
BJP का कांग्रेस पर 'दोहरे मानदंड' का आरोप क्या है?
पात्रा ने तर्क दिया कि 2005 में सोनिया गांधी ने बिना किसी संवैधानिक पद के नवीन चावला की नियुक्ति की घोषणा की और 2009 में हटाने की सिफारिश के बावजूद उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया। अब वही कांग्रेस ECI की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है — BJP इसे दोहरा मानदंड बताती है।
राष्ट्र प्रेस
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