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संबित पात्रा का आरोप: कांग्रेस राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर कर रही है

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संबित पात्रा का आरोप: कांग्रेस राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर कर रही है

सारांश

चुनाव आयोग ने तीनों आयुक्तों की बैठक के बाद प्रेस विज्ञप्ति जारी कर एसआईआर पर सर्वसम्मति की पुष्टि की। BJP के संबित पात्रा ने कांग्रेस पर राजनीतिक स्वार्थ के लिए संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया — और कहा, 'आज दूध का दूध, पानी का पानी हो गया।'

मुख्य बातें

संबित पात्रा ने 26 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर में कांग्रेस पर चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने का आरोप लगाया।
चुनाव आयोग ने प्रेस विज्ञप्ति में पुष्टि की कि एसआईआर पर तीनों निर्वाचन आयुक्तों की पूर्ण सर्वसम्मति थी।
एसआईआर 24 जून 2025 को जारी हुआ था; 27 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने इसे वैध घोषित किया था।
कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ बैठक किसी नीतिगत मुद्दे पर नहीं, बल्कि डेपुटेशन अधिकारी से जुड़े औपचारिक विषय पर थी।
पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 2014 के बाद से सेना, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग — हर संस्था पर हमला किया है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद डॉ. संबित पात्रा ने 26 सितंबर 2026 को भुवनेश्वर, ओडिशा में मीडिया को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) अपने राजनीतिक हितों के लिए चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को जानबूझकर नुकसान पहुँचा रही है। उनका यह बयान उस दिन आया जब चुनाव आयोग ने तीनों निर्वाचन आयुक्तों की बैठक के बाद एक सार्वजनिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया।

चुनाव आयोग की प्रेस विज्ञप्ति और एसआईआर विवाद

चुनाव आयोग ने अपनी विज्ञप्ति में स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर तीनों निर्वाचन आयुक्तों की पूर्ण एवं सर्वसम्मत सहमति थी। एसआईआर 24 जून 2025 को देश के 30 राज्यों के लिए लागू किया गया था और 27 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने इसे वैध ठहराते हुए कहा था कि एसआईआर की प्रक्रिया संवैधानिक रूप से उचित है।

डॉ. पात्रा ने कहा कि कांग्रेस ने एक नामी अंग्रेज़ी अखबार में छपे लेखों के आधार पर यह दावा किया था कि तीनों आयुक्तों के बीच एसआईआर को लेकर आपसी मतभेद है — एक ऐसा आरोप जिसे आज की विज्ञप्ति ने पूरी तरह नकार दिया।

कैबिनेट सेक्रेटरी से बैठक का स्पष्टीकरण

विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ हुई बैठक किसी नीतिगत मुद्दे या आईटी विभाग से जुड़े विषय पर नहीं, बल्कि डेपुटेशन पर आए एक अधिकारी से संबंधित एक औपचारिक प्रशासनिक विषय पर थी। डॉ. पात्रा ने ज़ोर देते हुए कहा कि यह बैठक पूरी तरह दस्तावेज़ीकृत और दिनचर्या की एक सामान्य प्रक्रिया थी।

उन्होंने कहा, 'कांग्रेस ने इस प्रशासनिक बैठक को असहमति का प्रमाण बताकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की, जबकि तथ्य बिल्कुल अलग हैं।'

कांग्रेस पर संस्थाओं को कमज़ोर करने का आरोप

डॉ. पात्रा के अनुसार, 2014 के बाद से कांग्रेस ने हर प्रमुख संवैधानिक संस्था — चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय, यहाँ तक कि सेना — पर हमले किए हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के सबूत माँगे थे और डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस) जैसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को झूठा व एजेंट कहा था।

भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को कठपुतली बताया — यह उनके शब्दों में 'किसी भी लोकतंत्र में अस्वीकार्य व्यवहार' है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संवैधानिक संस्थाओं पर इस प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप लोकतांत्रिक विश्वसनीयता के लिए चिंताजनक हैं। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि विपक्ष का यह दायित्व है कि वह संस्थाओं की स्वायत्तता पर निगरानी रखे — विशेषकर चुनावी प्रक्रियाओं में।

आगे की राजनीतिक दिशा

डॉ. पात्रा ने कहा कि देश की जनता समझदार है और जानती है कि विपक्ष इस तरह के हमले क्यों कर रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का एकमात्र लक्ष्य 'किसी भी कीमत पर सत्ता प्राप्त करना' है और इसके लिए वे लोकतांत्रिक खेल को बिगाड़ने से भी नहीं चूकते। BJP का कहना है कि चुनाव आयोग की आज जारी विज्ञप्ति में तीनों आयुक्तों की साझा तस्वीर इस पूरे विवाद में 'दूध का दूध, पानी का पानी' साबित करती है। यह राजनीतिक विवाद आगामी चुनावी मौसम में और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्तारूढ़ पक्ष उसे 'संस्था-विरोधी' ठहरा देता है। असल सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग की स्वयं जारी की गई विज्ञप्ति — जो कि एक सरकारी संस्था की स्व-स्पष्टीकरण है — सभी संदेहों को खारिज करने के लिए पर्याप्त है, या स्वतंत्र ऑडिट की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है। एसआईआर जैसी व्यापक मतदाता सूची प्रक्रिया पर पारदर्शी और सत्यापन-योग्य डेटा सार्वजनिक होना चाहिए — ताकि आरोप और प्रत्यारोप दोनों के बजाय तथ्य केंद्र में रहें।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) क्या है और इसका विवाद क्यों हुआ?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक चुनावी मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया है, जिसे चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को 30 राज्यों के लिए जारी किया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि तीनों आयुक्तों में इस पर मतभेद है, जिसे आयोग ने 26 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति में पूरी तरह नकार दिया।
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर 2026 को क्या स्पष्ट किया?
चुनाव आयोग ने तीनों निर्वाचन आयुक्तों की बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति में कहा कि एसआईआर पर सभी की पूर्ण सहमति थी। साथ ही, कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ हुई बैठक किसी नीतिगत विषय पर नहीं, बल्कि डेपुटेशन पर आए एक अधिकारी से संबंधित औपचारिक प्रशासनिक मामले पर थी।
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर पर क्या निर्णय दिया था?
27 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था और कहा था कि यह प्रक्रिया किए जाने योग्य है। यह निर्णय उस याचिका के जवाब में आया था जिसमें एसआईआर को न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
डॉ. पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी का लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना है और इसके लिए वे चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और सेना जैसी संस्थाओं पर हमला करते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी ने डीजीएमओ जैसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को झूठा और एजेंट कहा था।
BJP ने इस पूरे विवाद में प्रेस वार्ता क्यों बुलाई?
एक नामी अंग्रेज़ी अखबार में चुनाव आयोग पर लेख छपने के बाद कांग्रेस ने भाजपा और चुनाव आयोग पर मिलीभगत के आरोप लगाए थे। भाजपा ने तथ्यों को जनता के सामने रखने और संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा बनाए रखने के उद्देश्य से प्रेस वार्ता बुलाई।
राष्ट्र प्रेस
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