मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, कनॉट प्लेस में CPI-M सांसद जॉन ब्रिटास हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में 11 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की माँग कर रहे थे। इस दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M) के सांसद जॉन ब्रिटास और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद ब्रिटास को हिरासत में ले लिया गया।
मुख्य घटनाक्रम
कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के दौरान CPI-M सांसद जॉन ब्रिटास को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। CPI और CPI-M दोनों दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार व पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की।
CPI-M सांसद एए रहीम ने इस हिरासत को गैरकानूनी बताया और कहा कि इससे भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का हनन हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में सांसदों को प्राप्त विशेषाधिकारों और संवैधानिक छूट का भी सम्मान नहीं किया जा रहा।
नेताओं की प्रतिक्रिया
CPI के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा, 'हमें हिरासत में लेने दें। हम डरते नहीं हैं। हमारी पार्टी ने ब्रिटिश, फ्रांसीसी और पुर्तगाली शासन देखा है। हमने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और देश को आजाद कराया।' राजा ने हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज न करने की माँग की।
CPI सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा कि सही मकसद के लिए संघर्ष करने वालों को हिरासत या एफआईआर का कोई भय नहीं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों और युवाओं पर बल प्रयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
CPI नेता एनी राजा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संविधान को कमजोर करने का प्रयास कर रही है और एफआईआर को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन दिल्ली से लेकर कश्मीर और कन्याकुमारी तक फैल रहा है और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा।
सांसद के अधिकारों पर सवाल
सांसद एए रहीम ने देश में 'अघोषित आपातकाल' जैसी स्थिति का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को उसके संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए हिरासत में लिया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और निर्वाचन आयोग के बीच तनाव का माहौल है।
आगे क्या
CPI और CPI-M के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा। गौरतलब है कि इस प्रदर्शन ने निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की स्थिति तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी है।