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दिल्ली में जॉन ब्रिटास की कथित पुलिस हिरासत पर उमर अब्दुल्ला की कड़ी निंदा

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दिल्ली में जॉन ब्रिटास की कथित पुलिस हिरासत पर उमर अब्दुल्ला की कड़ी निंदा

सारांश

दिल्ली के कनॉट प्लेस में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग पर निकले प्रदर्शन में सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास की कथित पुलिस हिरासत और बल प्रयोग ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर वीडियो शेयर कर इसे 'निंदनीय क्रूरता' करार दिया।

मुख्य बातें

सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास को 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के कनॉट प्लेस में कथित तौर पर पुलिस ने हिरासत में लिया और बल प्रयोग किया।
प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग कर रहे थे।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर वीडियो शेयर कर इस कार्रवाई को 'अस्वीकार्य और अनुचित' बताया।
सीपीआई (एम) सांसद एए रहीम ने हिरासत को गैरकानूनी करार दिया और संसदीय विशेषाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाया।
सीपीआई और सीपीआई (एम) दोनों ने केंद्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की।

नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में 11 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास को कथित तौर पर दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया और बल प्रयोग किया। इस घटना की जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

मुख्य घटनाक्रम

कनॉट प्लेस में भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसी दौरान सांसद जॉन ब्रिटास और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस हुई, जब पुलिस उन्हें हिरासत में लेने का प्रयास कर रही थी।

सीपीआई (एम) ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस ने सांसद ब्रिटास के साथ कथित तौर पर बर्बरतापूर्ण मारपीट की और बाद में उन्हें सड़क किनारे छोड़ दिया। पार्टी के अनुसार इस घटना में ब्रिटास बुरी तरह घायल हो गए और उन्हें चलने-फिरने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ा।

उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सांसद ब्रिटास की वीडियो साझा करते हुए इस घटना की कड़ी निंदा की। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा: 'दिल्ली पुलिस द्वारा बल का यह प्रयोग अस्वीकार्य है। निहत्थे प्रदर्शनकारी की पिटाई करना, भले ही पीड़ित एक निर्वाचित सांसद हो, किसी भी परिस्थिति में अस्वीकार्य और अनुचित है। मैं अपने सभी नेशनल कॉन्फ्रेंस के सहयोगियों के साथ इस निंदनीय क्रूरता की निंदा करता हूँ।'

सीपीआई (एम) की आपत्ति और संवैधानिक सवाल

सीपीआई (एम) सांसद एए रहीम ने ब्रिटास की हिरासत की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा: 'कुछ ही मिनट पहले देश के एक सांसद और प्रमुख राजनीतिक नेता जॉन ब्रिटास को हिरासत में लिया गया।' रहीम ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए आरोप लगाया कि इससे भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

रहीम ने यह भी कहा कि देश में सांसदों को जो विशेषाधिकार और संवैधानिक छूट प्राप्त हैं, उनका भी सम्मान नहीं किया जा रहा। उन्होंने देश में 'अघोषित आपातकाल' जैसी स्थिति होने का आरोप भी लगाया। सीपीआई और सीपीआई (एम) दोनों के नेताओं ने केंद्र सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

आम जनता और राजनीतिक असर

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब विपक्षी दल भारत निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता और नियुक्ति प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब किसी सांसद की विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत पर राजनीतिक विवाद छिड़ा हो, लेकिन कथित शारीरिक बल प्रयोग के आरोपों ने इस बार विवाद को और गहरा बना दिया है।

क्या होगा आगे

विपक्षी दलों ने इस मामले की निष्पक्ष जाँच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की माँग की है। यह घटना संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह प्रतिध्वनित हो सकती है, खासकर तब जब सांसद विशेषाधिकार और पुलिस आचरण के सवाल केंद्र में हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या दिल्ली पुलिस ने सांसद विशेषाधिकार संबंधी संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया। विपक्ष का 'अघोषित आपातकाल' वाला आरोप राजनीतिक है, लेकिन बल प्रयोग के दावों की स्वतंत्र जाँच की माँग वैध है और इसे नज़रअंदाज़ करना लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए महँगा पड़ सकता है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जॉन ब्रिटास को दिल्ली में क्यों हिरासत में लिया गया?
सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के कनॉट प्लेस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें कथित तौर पर हिरासत में लिया।
उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर क्या कहा?
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि निहत्थे प्रदर्शनकारी की पिटाई किसी भी परिस्थिति में अस्वीकार्य और अनुचित है। उन्होंने इसे 'निंदनीय क्रूरता' बताया और नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से निंदा की।
क्या सांसदों को प्रदर्शन के दौरान हिरासत से छूट मिलती है?
भारतीय संविधान और संसदीय विशेषाधिकार कानून सांसदों को कुछ संरक्षण प्रदान करते हैं। सीपीआई (एम) सांसद एए रहीम ने इस हिरासत को इन्हीं प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए इसे गैरकानूनी करार दिया है।
इस विरोध प्रदर्शन का कारण क्या था?
प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ दिल्ली के कनॉट प्लेस में जमा हुए थे और उनके इस्तीफे की माँग कर रहे थे। सीपीआई और सीपीआई (एम) दोनों दल इस प्रदर्शन में शामिल थे।
सीपीआई (एम) ने पुलिस की कार्रवाई पर क्या आरोप लगाए?
सीपीआई (एम) का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने सांसद ब्रिटास के साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट की और उन्हें सड़क किनारे छोड़ दिया, जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए। पार्टी ने इसे संविधान प्रदत्त अधिकारों का हनन बताया।
राष्ट्र प्रेस
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