एकेजी भवन में पुलिस प्रवेश पर राज्यसभा में हंगामा, नड्डा बोले — आपातकाल में मुझे भी कक्षा से गिरफ्तार किया गया
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा में 29 जुलाई को नई दिल्ली स्थित मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मुख्यालय एकेजी भवन में दिल्ली पुलिस के प्रवेश को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। माकपा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए बताया कि पुलिस वहाँ एक छात्र नेता को गिरफ्तार करने पहुँची थी। इस पर सदन के नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सरकार का पक्ष रखा और घटना को सामान्य कानून-व्यवस्था की कार्रवाई बताया।
नड्डा का बयान: आपातकाल में मैं भी गिरफ्तार हुआ था
जेपी नड्डा ने कहा कि इस घटना को अनावश्यक रूप से तूल दिया जा रहा है। उन्होंने अपने छात्र जीवन का हवाला देते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान उन्हें स्वयं दो बार कक्षा से गिरफ्तार किया गया था। नड्डा ने कहा, 'उन्हें एक बार नहीं, बल्कि दो बार कक्षा से गिरफ्तार किया गया।'
उन्होंने आगे कहा कि छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहने वालों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है और पुलिस ने अपने कर्तव्य के अनुसार काम किया है। उनके अनुसार, इस घटना को 'लोकतंत्र पर हमला' बताना उचित नहीं है।
खड़गे की तीखी प्रतिक्रिया
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने डॉ. ब्रिटास के वक्तव्य का समर्थन करते हुए इस घटना को 'बेहद शर्मनाक' करार दिया। खड़गे ने कहा कि किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में इस तरह पुलिस का प्रवेश स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने चेताया कि 'आज अगर माकपा के कार्यालय में घुसा जा सकता है, तो कल किसी अन्य राजनीतिक दल के कार्यालय में भी ऐसा किया जा सकता है — यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं।' खड़गे ने सभापति से आग्रह किया कि जिन्होंने यह कार्रवाई की और जिनके निर्देश पर पुलिस वहाँ पहुँची, उनके विरुद्ध उचित कदम उठाए जाएँ।
सदन में हंगामा, दो बार स्थगन
इस विवाद के चलते राज्यसभा में लगातार हंगामा होता रहा। सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित की गई, लेकिन 12 बजे पुनः शुरू होने पर भी स्थिति नहीं सुधरी। इसके बाद कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए एक बार फिर स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष की माँग
विपक्षी दलों ने सरकार से माँग की कि पूरे मामले की जानकारी सदन के सामने रखी जाए — विशेष रूप से यह स्पष्ट किया जाए कि पुलिस को एकेजी भवन में भेजने का आदेश किसने दिया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच संसद के भीतर पहले से ही तनाव बना हुआ है।