29 जुलाई 2026
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एकेजी भवन में दिल्ली पुलिस की बिना वर्दी एंट्री पर राज्यसभा में माकपा सांसद ब्रिटास ने उठाए सवाल

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एकेजी भवन में दिल्ली पुलिस की बिना वर्दी एंट्री पर राज्यसभा में माकपा सांसद ब्रिटास ने उठाए सवाल

सारांश

दिल्ली पुलिस का बिना वर्दी एकेजी भवन में प्रवेश — माकपा के लिए नहीं, पूरे विपक्ष के लिए चेतावनी की घंटी। राज्यसभा में उठे इस मुद्दे ने राजनीतिक दलों की स्वायत्तता और पुलिस प्रक्रिया दोनों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बातें

जॉन ब्रिटास ने 29 जुलाई को राज्यसभा में एकेजी भवन में दिल्ली पुलिस के प्रवेश का मामला उठाया।
दिल्ली पुलिस की टीम वर्ष 2021 के पुराने मामले में जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने पहुँची थी।
ब्रिटास की प्रमुख आपत्ति: पुलिसकर्मी बिना वर्दी के आए, जो दिल्ली पुलिस की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का उल्लंघन है।
सांसद ने इसे सभी राजनीतिक दलों की स्वतंत्रता और संसदीय लोकतंत्र से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
केंद्रीय गृह मंत्री से सदन में पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण देने की माँग की गई।

माकपा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने 29 जुलाई को राज्यसभा में दिल्ली पुलिस द्वारा नई दिल्ली स्थित माकपा (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी – मार्क्सवादी) के राष्ट्रीय मुख्यालय एकेजी भवन में प्रवेश के मामले को गंभीर संसदीय मुद्दे के रूप में उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना वर्दी के आए पुलिसकर्मी जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने के इरादे से वहाँ पहुँचे थे।

मुख्य घटनाक्रम

केरल से राज्यसभा सांसद डॉ. ब्रिटास ने सदन को बताया कि मंगलवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम एकेजी भवन पहुँची। पुलिसकर्मियों का उद्देश्य वर्ष 2021 में जेएनयू परिसर में हुए एक प्रदर्शन से जुड़े पुराने मामले में आइशी घोष की गिरफ्तारी करना था। ब्रिटास ने बताया कि वे स्वयं उस समय एकेजी भवन में उपस्थित थे और उन्होंने पुलिस अधिकारियों से सीधे पूछा कि वे एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय में किस कानूनी अधिकार के तहत प्रवेश कर रहे हैं।

बिना वर्दी पुलिस पर गंभीर आपत्ति

ब्रिटास ने स्पष्ट किया कि उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा कानून-सम्मत कार्रवाई पर कोई आपत्ति नहीं है। उनकी मुख्य आपत्ति यह थी कि गिरफ्तारी के लिए आए पुलिसकर्मी बिना वर्दी के थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) निर्धारित है, जिसके अनुसार गिरफ्तारी करने वाले अधिकारियों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए। उनके अनुसार इस प्रक्रिया का उल्लंघन संविधान और नागरिक स्वतंत्रता के लिए चिंताजनक है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं पर व्यापक सवाल

ब्रिटास ने इस घटना को किसी एक दल का मुद्दा मानने से इनकार करते हुए कहा कि भारत का संसदीय लोकतंत्र बहुदलीय व्यवस्था पर टिका है और किसी भी राजनीतिक दल के मुख्यालय में इस तरह का प्रवेश सभी दलों की स्वतंत्रता के लिए खतरनाक मिसाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की कार्रवाई से युवाओं में भय का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। गौरतलब है कि आइशी घोष पर आरोप है कि उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में भाग लिया था।

सरकार से स्पष्टीकरण की माँग

माकपा सांसद ने राज्यसभा सभापति के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री से माँग की कि वे पूरे घटनाक्रम पर सदन में स्पष्टीकरण दें। यह मामला ऐसे समय में उठा है जब विपक्षी दल केंद्र सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग के आरोप लगाते रहे हैं। अब देखना होगा कि गृह मंत्रालय इस मामले में संसद के भीतर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे मामला कितना भी पुराना हो, SOP का स्पष्ट उल्लंघन है जिसे किसी भी दल को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग की बहस पहले से चल रही है। गृह मंत्रालय की चुप्पी या टालमटोल वाला जवाब इस मामले को और राजनीतिक रंग दे सकता है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकेजी भवन में दिल्ली पुलिस के प्रवेश का मामला क्या है?
मंगलवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम माकपा के राष्ट्रीय मुख्यालय एकेजी भवन में पहुँची और जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को वर्ष 2021 के एक पुराने मामले में गिरफ्तार करने का प्रयास किया। माकपा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने इसे संसदीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया।
आइशी घोष पर क्या मामला दर्ज है?
आइशी घोष के खिलाफ वर्ष 2021 में जेएनयू परिसर में हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा मामला लंबित बताया गया है। ब्रिटास के अनुसार, उन पर जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में भाग लेने का भी आरोप है।
माकपा सांसद की मुख्य आपत्ति क्या थी?
डॉ. ब्रिटास की सबसे बड़ी आपत्ति यह थी कि पुलिसकर्मी बिना वर्दी के आए थे, जो दिल्ली पुलिस की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी करने वाले अधिकारियों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए।
इस मामले में सरकार से क्या माँग की गई है?
माकपा सांसद ने राज्यसभा सभापति के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री से माँग की है कि वे सदन में पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण दें। उन्होंने इसे सभी राजनीतिक दलों से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा।
क्या यह मामला केवल माकपा से जुड़ा है?
नहीं। ब्रिटास ने स्पष्ट कहा कि यह किसी एक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत के बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों की स्वतंत्रता और स्वायत्तता से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
राष्ट्र प्रेस
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