26 अक्टूबर 2026
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कठुआ में संदिग्ध घुसपैठिए देखे जाने पर हाई अलर्ट, करनाडी में सेना-पुलिस का संयुक्त सर्च ऑपरेशन

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कठुआ में संदिग्ध घुसपैठिए देखे जाने पर हाई अलर्ट, करनाडी में सेना-पुलिस का संयुक्त सर्च ऑपरेशन

सारांश

कठुआ में ग्रामीणों की सतर्कता एक बार फिर सुरक्षा तंत्र की परीक्षा बन गई। करनाडी और उज्जा नाले के पास संदिग्ध गतिविधि की सूचना पर सेना, पुलिस, SOG और CRPF की संयुक्त टीम सक्रिय है — जम्मू संभाग में यह इस वर्ष का एक और बड़ा घेराबंदी अभियान।

मुख्य बातें

26 अक्टूबर 2026 को कठुआ जिले के करनाडी क्षेत्र में ग्रामीणों की सूचना पर बहु-एजेंसी सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ।
जम्मू-कश्मीर पुलिस , SOG , सेना और CRPF की संयुक्त टीम जंगली व नदी तटीय इलाकों में तलाशी अभियान चला रही है।
कोटे पनु और पुंडोरी गाँवों में उज्जा नाले के पास भी संदिग्ध गतिविधि को लेकर अलर्ट जारी किया गया।
3 सितंबर को BSF की 44वीं बटालियन ने कानाचक के पास कथित पाकिस्तानी घुसपैठिए को पकड़ा था।
2026 में सांबा, राजौरी और पुंछ में संदिग्ध ड्रोन घुसपैठ और हथियार-नशीले पदार्थों की बरामदगी पहले ही हो चुकी है।
तलाशी अभियान जारी है; अधिकारियों ने क्षेत्रवासियों से सतर्क रहने की अपील की है।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को ग्रामीणों ने सीमावर्ती इलाके में कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की मौजूदगी की सूचना दी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने तत्काल घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस, स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG), सेना और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की एक संयुक्त टीम ने करनाडी और आसपास के जंगली क्षेत्रों में व्यापक सर्च अभियान चलाया। यह ऑपरेशन ऐसे समय में शुरू हुआ है जब जम्मू संभाग में सीमा पार से संदिग्ध गतिविधियों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

करनाडी और नदी वाले इलाकों में स्थानीय ग्रामीणों की सतर्कता के बाद अलर्ट जारी किया गया। इसके अतिरिक्त कोटे पनु और पुंडोरी गाँवों में उज्जा नाले के निकट भी नदी मार्ग से संदिग्ध गतिविधि की आशंका को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन सूचनाओं की पुष्टि और क्षेत्र में सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बहु-एजेंसी अभियान तत्काल प्रभाव से शुरू किया गया।

सुरक्षा बल अभी तक किसी ठोस परिणाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं कर पाए हैं। अभियान जारी बताया जा रहा है।

पिछली घटनाओं का संदर्भ

गौरतलब है कि 20 अगस्त को कठुआ के बिलावर क्षेत्र में भी संदिग्धों के देखे जाने की सूचना पर कई एजेंसियों ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाया था। इसी क्रम में 3 सितंबर को जम्मू जिले के कानाचक इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के पास BSF की 44वीं बटालियन के जवानों ने एक कथित पाकिस्तानी घुसपैठिए को हिरासत में लिया था।

इस महीने पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LOC) के पास संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने और सीमा पार से संभावित गतिविधियों की सूचनाओं के बाद भी घुसपैठ-रोधी अभियान चलाए गए और स्थानीय निवासियों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए।

व्यापक सुरक्षा चुनौती

2026 की शुरुआत से ही सुरक्षा बलों ने सांबा, राजौरी और पुंछ में संदिग्ध ड्रोन घुसपैठ का पता लगाया और संदिग्ध सैटेलाइट फोन सिग्नल भी ट्रैक किए। अधिकारियों के अनुसार, इन अभियानों के दौरान हथियार और नशीले पदार्थ भी बरामद किए गए। यह लगातार दूसरा महीना है जब कठुआ जिले में इस प्रकार की संयुक्त कार्रवाई की ज़रूरत पड़ी है।

सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि सर्दियों से पहले सीमावर्ती इलाकों में इस प्रकार की गतिविधियों में वृद्धि देखी जाती है, जब बर्फबारी से पहले घुसपैठ के प्रयास तेज़ हो जाते हैं। हालाँकि अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को किसी विशेष खतरे से जोड़ने से फिलहाल परहेज़ किया है।

सुरक्षा बलों की तैयारी

अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LOC) के निकटवर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती को पहले से ही मज़बूत किया गया है। ग्रामीण-सुरक्षाबल समन्वय इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ — स्थानीय नागरिकों ने समय पर सूचना देकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की। अधिकारियों ने क्षेत्रवासियों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत सुरक्षा बलों को देने की अपील की है।

आगे की स्थिति

तलाशी अभियान जारी है और अधिकारियों ने कहा है कि जब तक क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, ऑपरेशन बंद नहीं किया जाएगा। कठुआ में हाई अलर्ट बरकरार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ इस वर्ष बिलावर, कानाचक, पुंछ और सांबा में एक के बाद एक ऑपरेशन हो चुके हैं। उल्लेखनीय यह है कि हर बार ग्रामीण ही पहली चेतावनी देते हैं, जो यह भी बताता है कि सीमावर्ती इलाकों में तकनीकी निगरानी की सीमाएँ अभी भी हैं। बार-बार होने वाले ये ऑपरेशन सफलता की कहानी भी हैं और एक अनुत्तरित प्रश्न भी — कि ड्रोन, सैटेलाइट फोन और नदी-मार्गों के ज़रिये घुसपैठ के प्रयास रुक क्यों नहीं रहे।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कठुआ में सर्च ऑपरेशन क्यों शुरू हुआ?
स्थानीय ग्रामीणों ने करनाडी और नदी वाले इलाकों में संदिग्ध व्यक्तियों की मौजूदगी की सूचना सुरक्षा बलों को दी, जिसके बाद 26 अक्टूबर 2026 को जम्मू-कश्मीर पुलिस, SOG, सेना और CRPF की संयुक्त टीम ने तत्काल घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया।
कठुआ सर्च ऑपरेशन में कौन-सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
इस अभियान में जम्मू-कश्मीर पुलिस, स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG), भारतीय सेना और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टीम शामिल है। यह बहु-एजेंसी तालमेल सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों से निपटने के लिए मानक प्रक्रिया है।
क्या इससे पहले कठुआ में इस तरह के ऑपरेशन हुए हैं?
हाँ, 20 अगस्त को कठुआ के बिलावर में भी संदिग्धों के देखे जाने पर कई एजेंसियों ने संयुक्त तलाशी अभियान चलाया था। 3 सितंबर को जम्मू जिले के कानाचक में BSF की 44वीं बटालियन ने एक कथित पाकिस्तानी घुसपैठिए को भी पकड़ा था।
उज्जा नाले के पास अलर्ट क्यों जारी हुआ?
कोटे पनु और पुंडोरी गाँवों में उज्जा नाले के पास नदी मार्ग से संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर वहाँ भी अलर्ट जारी किया गया। नदी और जंगली रास्ते अक्सर घुसपैठ के वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल होने की आशंका रहती है।
जम्मू-कश्मीर में 2026 में सुरक्षा की समग्र स्थिति कैसी है?
2026 की शुरुआत से सांबा, राजौरी, पुंछ और कठुआ में संदिग्ध ड्रोन घुसपैठ, सैटेलाइट फोन सिग्नल और हथियार-नशीले पदार्थों की बरामदगी के मामले सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा बल IB और LOC के पास सतर्कता लगातार बनाए हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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