20 सितंबर 2026
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ऑपरेशन सोहन: कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ में हाईअलर्ट, जंगलों में तीसरे दिन भी तलाशी जारी

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ऑपरेशन सोहन: कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ में हाईअलर्ट, जंगलों में तीसरे दिन भी तलाशी जारी

सारांश

'ऑपरेशन सोहन' तीसरे दिन भी जारी है — मजालता के जंगलों में दो पाकिस्तानी आतंकवादी मारे जा चुके हैं और एक घायल आतंकवादी अभी भी फरार है। कठुआ से किश्तवाड़ तक फैला यह सुरक्षा घेरा जम्मू संभाग के घुसपैठ के पुराने रास्ते को बंद करने की बड़ी कोशिश है।

मुख्य बातें

20 सितंबर 2026 को कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ में हाईअलर्ट जारी।
'ऑपरेशन सोहन' 16 सितंबर की रात शुरू हुआ; 17 सितंबर को मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के दो पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए।
एक तीसरा आतंकवादी घायल अवस्था में जंगल में छिपे होने की आशंका, तलाश जारी।
व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF संयुक्त अभियान में ड्रोन, थर्मल हेलीकॉप्टर और स्निफर डॉग का उपयोग कर रहे हैं।
एक संदिग्ध 'ओवर-ग्राउंड वर्कर' हिरासत में; मारे गए आतंकवादियों के मोबाइल फोन फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजे गए।
नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने व्हाइट नाइट कॉर्प्स की कार्रवाई की सराहना की।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ जिलों में सुरक्षा बलों ने 20 सितंबर 2026 को व्यापक हाईअलर्ट जारी किया, क्योंकि मजालता के घने जंगलों में 'ऑपरेशन सोहन' अपने तीसरे दिन भी जारी रहा। 16 सितंबर की रात को शुरू हुए इस ऑपरेशन में 17 सितंबर को सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए थे। एक तीसरा आतंकवादी, जिसके घायल होने की आशंका जताई जा रही है, अभी भी जंगल में छिपा हो सकता है।

ऑपरेशन सोहन: मुख्य घटनाक्रम

ऑपरेशन सोहन की शुरुआत 16 सितंबर की रात बर्तल, सोहन और खुब्बन के घने जंगलों में हुई थी। 17 सितंबर की सुबह सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू संभाग में घुसपैठ की गतिविधियाँ पिछले कुछ महीनों में तेज़ हुई हैं।

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह इलाका घुसपैठ के एक पुराने और संवेदनशील रास्ते से जुड़ा है जो कठुआ-सांबा बॉर्डर से मजालता, बसंतगढ़ और रामनगर होते हुए डोडा, भद्रवाह और किश्तवाड़ तक और आगे दक्षिण कश्मीर तक जाता है। यही कारण है कि सुरक्षा घेरे को बहुत व्यापक रूप दिया गया है।

तलाशी अभियान का विस्तार और तकनीकी साजो-सामान

मुठभेड़ के बाद सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) ने संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान तेज़ कर दिया है। सुरक्षा बल स्निफर डॉग, ड्रोन और थर्मल सर्विलांस से लैस हेलीकॉप्टरों का उपयोग कर रहे हैं।

मारे गए आतंकवादियों से बरामद मोबाइल फोन और अन्य सामान को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है ताकि उनके संभावित स्थानीय संपर्कों और सपोर्ट नेटवर्क का पता लगाया जा सके। फॉरेंसिक टीमें घायल आतंकवादी के भागने के संभावित रास्ते पर मिले खून के धब्बों और अन्य निशानों की जाँच में भी जुटी हैं।

संदिग्ध ओवर-ग्राउंड वर्कर हिरासत में

इस बीच, एक संदिग्ध 'ओवर-ग्राउंड वर्कर' को हिरासत में लिया गया है। उस पर आतंकवादी समूह को लॉजिस्टिकल सहायता और पनाह देने के आरोप हैं और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी तलाशी ली जा रही है।

जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे सहित प्रमुख सड़कों पर और मजालता, रामनगर, बसंतगढ़, बिल्लावर तथा रामकोट के आसपास के इलाकों में सुरक्षा जाँच को और कड़ा कर दिया गया है। अतिरिक्त संयुक्त चेकपॉइंट भी स्थापित किए गए हैं।

सेना कमांडर की सराहना

रिपोर्टों के अनुसार, नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने 'ऑपरेशन सोहन' के दौरान व्हाइट नाइट कॉर्प्स की कार्रवाई की सराहना की और सेना, पुलिस तथा CRPF के बीच तालमेल की तारीफ की। गौरतलब है कि यह संयुक्त कार्रवाई उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत जम्मू संभाग में घुसपैठ के परंपरागत रास्तों को बंद करने की कोशिश की जा रही है।

आगे क्या होगा

सर्च ऑपरेशन के जारी रहने के कारण सुरक्षा बल पूरी तरह अलर्ट पर हैं। घायल तीसरे आतंकवादी की तलाश प्राथमिकता बनी हुई है। फॉरेंसिक साक्ष्य और हिरासत में लिए गए संदिग्ध से मिलने वाली जानकारी आने वाले दिनों में ऑपरेशन की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पुलिस और CRPF का संयुक्त तालमेल उल्लेखनीय है, लेकिन असली चुनौती घायल तीसरे आतंकवादी और स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क का भंडाफोड़ करना है। फॉरेंसिक साक्ष्य और हिरासत में लिए गए संदिग्ध से मिलने वाली जानकारी यह तय करेगी कि यह ऑपरेशन सिर्फ एक मुठभेड़ तक सीमित रहता है या किसी बड़े नेटवर्क को उजागर करता है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन सोहन' क्या है और यह कब शुरू हुआ?
'ऑपरेशन सोहन' जम्मू-कश्मीर के मजालता क्षेत्र में 16 सितंबर 2026 की रात शुरू किया गया सुरक्षा अभियान है, जो बर्तल, सोहन और खुब्बन के घने जंगलों में चलाया गया। 17 सितंबर को हुई मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े दो पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए और एक के घायल होकर फरार होने की आशंका है।
मुठभेड़ के बाद कितने जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया है?
मुठभेड़ के बाद कठुआ, सांबा, उधमपुर, डोडा और किश्तवाड़ — कुल पाँच जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों के जंगलों और सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त संयुक्त चेकपॉइंट भी स्थापित किए गए हैं।
तलाशी अभियान में किन तकनीकों का उपयोग हो रहा है?
सुरक्षा बल ड्रोन, थर्मल सर्विलांस से लैस हेलीकॉप्टर और स्निफर डॉग का इस्तेमाल कर रहे हैं। मारे गए आतंकवादियों के मोबाइल फोन और बरामद सामान फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजे गए हैं ताकि स्थानीय संपर्क नेटवर्क का पता चल सके।
इस ऑपरेशन में कौन-कौन सी सुरक्षा एजेंसियाँ शामिल हैं?
सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF संयुक्त रूप से यह अभियान चला रहे हैं। नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने तीनों बलों के तालमेल की सराहना की है।
संदिग्ध ओवर-ग्राउंड वर्कर कौन है और उसे क्यों हिरासत में लिया गया?
एक संदिग्ध ओवर-ग्राउंड वर्कर को आतंकवादी समूह को लॉजिस्टिकल सहायता और पनाह देने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। उससे पूछताछ के दौरान मिली सूचनाओं के आधार पर अन्य संदिग्ध ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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