सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगे कांग्रेस सांसद, राहुल गांधी के आरोपों को बताया तथ्य-आधारित
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और कर्मवीर सिंह बौद्ध ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग दोहराई और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) तथा सीईसी के मुद्दे पर उठाए गए सवालों का पूरजोर समर्थन किया। दोनों सांसदों ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने अपने संवैधानिक पद का दुरुपयोग किया है और यदि वे स्वयं नहीं हटते तो सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।
कांग्रेस सांसदों के मुख्य आरोप
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि सच्चाई देश की जनता के सामने आ चुकी है। उनके अनुसार राहुल गांधी पिछले तीन वर्षों से लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं और अब यह मामला सबके सामने है। सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा दे देना चाहिए — और यदि वे ऐसा नहीं करते, तो केंद्र सरकार को उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने कहा कि राहुल गांधी की बातें तथ्यों पर आधारित हैं और पूरा विपक्ष सीईसी के इस्तीफे की एकजुट माँग कर रहा है। उन्होंने सत्ता पक्ष के सांसदों से भी अपील की कि यदि वे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान में विश्वास करते हैं — और उसी संविधान की बदौलत मंत्री, विधायक या सांसद बने हैं — तो उन्हें संविधान की रक्षा के लिए आवाज़ उठानी ही होगी।
एसआईआर पर गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसदों ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और हरियाणा में एसआईआर की प्रक्रिया के नाम पर कथित तौर पर वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए और नए नाम जोड़े गए। यह आरोप अभी सत्यापित नहीं हुए हैं और चुनाव आयोग की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि एसआईआर अर्थात विशेष सारांश पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूचियों को अद्यतन करता है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग किया जा रहा है।
चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल
कांग्रेस सांसद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने कहा कि भारतीय संविधान ने चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार दिया है — वे किसी भी राजनीतिक दल या सरकार के अधीन नहीं हैं। हालाँकि उनका आरोप है कि इन संस्थाओं ने अपनी स्वतंत्रता और नियम-कायदों को कमज़ोर कर लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की बैठकों में दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने समय-समय पर आवाज़ उठाई, लेकिन कथित तौर पर उन्हें दबाने की कोशिश की गई। बौद्ध ने चेतावनी दी कि यदि संवैधानिक संस्थाएँ इसी तरह कमज़ोर होती रहीं तो इसका असर संसद और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी पड़ेगा।
राजनीतिक परिदृश्य और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं। विपक्ष की यह माँग संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह उठाई जा रही है। अभी तक केंद्र सरकार या चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों का कोई आधिकारिक खंडन या जवाब सामने नहीं आया है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और व्यापक राजनीतिक बहस में केंद्रीय स्थान ले सकता है, खासतौर पर तब जब कई राज्यों में चुनावी प्रक्रियाएँ क्षितिज पर हैं।