2 अक्टूबर 2026
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फॉर्म-6 विवाद: सलमान खुर्शीद का चुनाव आयोग से जवाब-तलब, ज्ञानेश कुमार को दी चेतावनी

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फॉर्म-6 विवाद: सलमान खुर्शीद का चुनाव आयोग से जवाब-तलब, ज्ञानेश कुमार को दी चेतावनी

सारांश

गुवाहाटी में सलमान खुर्शीद ने चुनाव आयोग से फॉर्म-6 बदलाव पर जवाब माँगा, मुख्य आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सजा की चेतावनी दी। साथ ही यूसीसी की राज्यवार भिन्नता और एनआरसी पर आरएसएस के दावे को भी खारिज किया।

मुख्य बातें

सलमान खुर्शीद ने 2 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में चुनाव आयोग से फॉर्म-6 बदलाव पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण की माँग की।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के मुद्दा उठाने के बाद आयोग ने बदलाव वापस लिया — इसका जवाब आयोग को देना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को राहुल गांधी की 'सजा मिलेगी' वाली चेतावनी से जोड़ते हुए खुर्शीद ने कहा कि उन्हें तैयार रहना चाहिए।
यूसीसी को लेकर खुर्शीद ने कहा कि असम , हिमाचल और गुजरात में अलग-अलग कानून होने से इसे 'यूनिफॉर्म' नहीं कहा जा सकता।
NRC को देशभर में लागू करने के RSS के बयान को उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि यह तय करना RSS का काम नहीं है।
रूस-यूक्रेन युद्ध में पुतिन की मोदी -प्रशंसा को उन्होंने 'शिष्टाचार' बताया, ठोस परिणाम आने पर ही सार्थकता मानने की बात कही।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने 2 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में मतदाता पंजीकरण फॉर्म फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर कड़े सवाल दागे। उन्होंने कहा कि आयोग ने पहले अवैध तरीके से यह बदलाव लागू किए और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मुद्दा उठाने के बाद उन्हें वापस ले लिया — अब इस पर स्पष्टीकरण देना आयोग की जिम्मेदारी है।

फॉर्म-6 विवाद का मूल

खुर्शीद ने कहा, 'राहुल गांधी ने फॉर्म-6 का मुद्दा उठाया और चुनाव आयोग ने मान लिया कि पुराना वाला फॉर्म ही लागू होना चाहिए। तो अब सवाल चुनाव आयोग से पूछा जाना चाहिए कि राहुल गांधी को यह कहने की जरूरत क्यों पड़ी कि आपने इसमें परिवर्तन किया है? जब उन्होंने यह बात उठाई तो आपने उस परिवर्तन को वापस ले लिया, ऐसा क्यों हुआ? इसका जवाब अब चुनाव आयोग को देना चाहिए।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाए हुए है। फॉर्म-6 वह दस्तावेज़ है जिसके माध्यम से नए मतदाता अपना नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज कराते हैं, और इसमें कोई भी बदलाव मतदाता पंजीकरण को सीधे प्रभावित करता है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चेतावनी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन करते हुए — जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र से खिलवाड़ करने वालों को सजा मिलेगी — खुर्शीद ने कहा, 'कोई भी व्यक्ति कितने भी बड़े पद पर क्यों न हो, अगर वह भारत के लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करेगा तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उसे सजा जरूर मिलेगी। इसलिए ज्ञानेश कुमार को उस सजा के लिए तैयार रहना चाहिए।'

गौरतलब है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार हाल के महीनों में विपक्षी दलों की आलोचना के केंद्र में रहे हैं, जो चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निर्णयों पर सवाल उठाते रहे हैं।

यूसीसी पर केंद्र सरकार को घेरा

खुर्शीद ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'यूसीसी कहाँ है? हर राज्य का अलग-अलग यूसीसी है तो उसे यूसीसी क्यों कहा जा रहा है? इसे स्टेट सिविल कोड कहना चाहिए। जो असम में लागू किया जा रहा है, वह हिमाचल में लागू नहीं है; जो हिमाचल में है, वह गुजरात में नहीं है। हर जगह अलग-अलग कानून बनाकर उसे यूसीसी का नाम दिया जा रहा है। अलग-अलग कानूनों को एक नाम कैसे दिया जा सकता है?'

उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ-जहाँ यूसीसी लागू किया जा रहा है, वहाँ मामला उच्च न्यायालय में पहुँच रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले पर नौ जजों की पीठ का फैसला अभी आना बाकी है, जिसका असर यूसीसी के मसले पर भी पड़ेगा।

पुतिन की मोदी-प्रशंसा पर संयमित प्रतिक्रिया

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के प्रयासों की सराहना पर खुर्शीद ने कहा कि बड़े नेताओं के बीच ऐसी शिष्टाचार-भरी बातें होती रहती हैं। उन्होंने कहा कि इसकी सार्थकता तभी समझ में आएगी जब भारत कोई ठोस पहल करके इस युद्ध को रोकने में सफल होगा — अभी तक युद्ध नहीं रुका है और केवल प्रयासों का दावा किया जा रहा है।

एनआरसी पर आरएसएस के बयान को खारिज किया

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को देशभर में लागू करने संबंधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बयान पर खुर्शीद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'यह तय करना आरएसएस का काम नहीं है। क्या आरएसएस ने अपने ऊपर छाप लगा रखी है कि वही भारतीय हैं और दूसरे भारतीय नहीं हैं? यह तय करने वाले वे कौन होते हैं।'

खुर्शीद के ये बयान बिहार और अन्य राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी कांग्रेस की रणनीतिक आक्रामकता को रेखांकित करते हैं — जहाँ लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता एक केंद्रीय चुनावी मुद्दा बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मतदाता पंजीकरण में किसी भी बदलाव का सीधा असर करोड़ों नागरिकों के मताधिकार पर पड़ता है — और आयोग द्वारा बिना सार्वजनिक सूचना के बदलाव करना और फिर वापस लेना, पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यूसीसी पर उनका तर्क — कि अलग-अलग राज्यों में अलग कानून 'यूनिफॉर्म' नहीं हो सकते — कानूनी दृष्टि से वज़नदार है और सर्वोच्च न्यायालय की सबरीमाला पीठ के फैसले से इसे और बल मिल सकता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि ये सभी मुद्दे — ECI, UCC, NRC — आगामी चुनावों में विपक्ष के एकीकृत आख्यान की कड़ियाँ हैं।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फॉर्म-6 में चुनाव आयोग ने क्या बदलाव किए थे और विवाद क्यों हुआ?
फॉर्म-6 वह दस्तावेज़ है जिससे नए मतदाता निर्वाचक नामावली में नाम दर्ज कराते हैं। कांग्रेस के अनुसार, चुनाव आयोग ने इसमें बिना उचित प्रक्रिया के बदलाव किए और राहुल गांधी के विरोध के बाद उन्हें वापस ले लिया। इस पूरी प्रक्रिया पर पारदर्शिता न होने से विवाद उत्पन्न हुआ।
सलमान खुर्शीद ने ज्ञानेश कुमार को 'सजा' की चेतावनी क्यों दी?
खुर्शीद ने राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया जिसमें कहा गया था कि लोकतंत्र से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को — चाहे वह कितने भी बड़े पद पर हो — सजा मिलेगी। इसी संदर्भ में उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए उन्हें 'तैयार रहने' की बात कही।
यूसीसी पर कांग्रेस की आपत्ति क्या है?
खुर्शीद का तर्क है कि असम, हिमाचल और गुजरात जैसे राज्यों में अलग-अलग नागरिक संहिताएँ लागू की जा रही हैं, इसलिए इसे 'समान' या 'यूनिफॉर्म' नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार इसे 'स्टेट सिविल कोड' कहना अधिक उचित होगा।
एनआरसी को लेकर खुर्शीद ने आरएसएस पर क्या कहा?
खुर्शीद ने NRC को देशभर में लागू करने संबंधी RSS के बयान को खारिज करते हुए कहा कि यह तय करना RSS का काम नहीं है कि कौन भारतीय है और कौन नहीं। उन्होंने इस दावे को संवैधानिक सीमाओं के विरुद्ध बताया।
पुतिन की मोदी-प्रशंसा पर खुर्शीद का क्या रुख रहा?
खुर्शीद ने इसे बड़े नेताओं के बीच की सामान्य 'शिष्टाचार' की बात बताया। उन्होंने कहा कि जब तक भारत यूक्रेन युद्ध रोकने में ठोस सफलता नहीं पाता, तब तक इस प्रशंसा की कोई व्यावहारिक सार्थकता नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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