5 अक्टूबर 2026
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फॉर्म-6 विवाद: 'आप' का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर इस्तीफे का दबाव, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सियासी तूफान

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फॉर्म-6 विवाद: 'आप' का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर इस्तीफे का दबाव, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सियासी तूफान

सारांश

फॉर्म-6 में बदलाव का मामला अब सड़क से सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच गया है। 'आप' का दावा है कि चुनाव आयोग ने अदालत का नाम लेकर भ्रामक दावा किया — और सुनवाई ने उसे उजागर कर दिया। अब 10 अक्टूबर का जंतर-मंतर प्रदर्शन और अदालती रिकॉर्ड तय करेंगे कि विवाद कहाँ जाता है।

मुख्य बातें

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 5 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की।
मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 बदलावों को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से जोड़ना कथित तौर पर भ्रामक था।
26 सितंबर 2026 की चुनाव आयोग प्रेस रिलीज पर 'आप' ने सवाल उठाए, जिसमें बदलावों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से जोड़ा गया था।
'आप' ने मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध अदालत की अवमानना की कार्यवाही की माँग भी की।
10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की घोषणा की गई है।
इन आरोपों पर चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष अभी सार्वजनिक नहीं है।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 5 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीखा मोर्चा खोलते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की माँग की, यह आरोप लगाते हुए कि फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति से जोड़कर पेश करना कथित तौर पर भ्रामक था। पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि सोमवार की अदालती सुनवाई में चुनाव आयोग की स्थिति कमज़ोर पड़ी है।

मुख्य आरोप क्या हैं

'आप' नेता मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने नए मतदाताओं के पंजीकरण में उपयोग होने वाले फॉर्म-6 में अपनी ओर से बदलाव किए — न तो सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति ली गई और न ही दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति। सिसोदिया के अनुसार, 26 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस रिलीज में यह दावा किया गया था कि ये बदलाव सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी के बाद हुए हैं। उन्होंने कहा कि अदालत की हालिया टिप्पणी ने इस दावे पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका

सिसोदिया ने दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में बदलाव के लिए उसकी ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई थी। सौरभ भारद्वाज ने भी इस बात को दोहराते हुए कहा कि सोमवार की सुनवाई में अदालत ने ऐसा कोई आदेश देने से इनकार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग सर्वोच्च न्यायालय के नाम का उपयोग किसी ऐसे दावे के लिए कर सकता है, जिसे स्वयं अदालत ने स्वीकार नहीं किया। गौरतलब है कि इन आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

लोकतांत्रिक अधिकारों का सवाल

सिसोदिया ने कहा कि फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण का आधार है, इसलिए इसमें कोई भी बदलाव सीधे नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित करता है। उनके अनुसार यदि इन बदलावों के कारण आम लोगों के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाना कठिन होता है, तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक प्रभावित हो सकते हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं और जो दोबारा नाम जुड़वाना चाहते हैं।

अवमानना और इस्तीफे की माँग

भारद्वाज ने माँग की कि यदि अदालत के नाम पर गलत जानकारी दी गई है तो मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध अदालत की अवमानना की कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर भी इन आरोपों को दोहराया। यह ऐसे समय में आया है जब संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर राजनीतिक बहस पहले से तेज़ है।

आगे क्या होगा

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, अब इस मामले में चुनाव आयोग का विस्तृत स्पष्टीकरण और सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही का आधिकारिक रिकॉर्ड निर्णायक साबित होगा। 'आप' के आरोप गंभीर हैं, लेकिन चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया के बिना पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होती। 10 अक्टूबर का जंतर-मंतर प्रदर्शन और आने वाली अदालती सुनवाई इस विवाद की अगली कड़ी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही को सीधे विवाद से जोड़ा जाना मामले को अलग आयाम देता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि फॉर्म-6 बदलाव किस हद तक वास्तविक मतदाताओं को प्रभावित करते हैं — आरोप और खंडन से परे इस प्रश्न का स्वतंत्र सत्यापन ज़रूरी है। चुनाव आयोग का अब तक सार्वजनिक प्रतिउत्तर न आना इस विवाद को और गहरा बनाता है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फॉर्म-6 क्या है और इसमें किए गए बदलाव क्यों विवादास्पद हैं?
फॉर्म-6 वह दस्तावेज़ है जिसके ज़रिए नए मतदाता मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाते हैं। 'आप' का आरोप है कि चुनाव आयोग ने इसमें बदलाव सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के बिना किए और फिर अदालत की मंजूरी का कथित तौर पर भ्रामक दावा किया — जिससे मताधिकार पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?
'आप' नेताओं के अनुसार सोमवार की सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने फॉर्म-6 बदलावों के लिए कोई आदेश देने से इनकार किया और स्पष्ट किया कि ऐसी कोई अनुमति उसकी ओर से नहीं दी गई थी। हालाँकि, इस दावे की पुष्टि के लिए अदालत की आधिकारिक कार्यवाही का रिकॉर्ड निर्णायक होगा।
'आप' ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की माँग क्यों की?
पार्टी का तर्क है कि यदि संवैधानिक संस्था ने अदालत का नाम लेकर गलत जानकारी दी, तो यह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाता है। मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज दोनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग की है।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर क्या होने वाला है?
'आप' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने ऐलान किया है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते तो 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा।
चुनाव आयोग का इस विवाद पर क्या पक्ष है?
अभी तक इस विवाद पर चुनाव आयोग की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। चुनाव आयोग का आधिकारिक स्पष्टीकरण और सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही का रिकॉर्ड इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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