3 अक्टूबर 2026
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शिवराज सिंह चौहान का कांग्रेस पर हमला: जनादेश का अपमान पुरानी आदत, ईवीएम विवाद पर भी पलटवार

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शिवराज सिंह चौहान का कांग्रेस पर हमला: जनादेश का अपमान पुरानी आदत, ईवीएम विवाद पर भी पलटवार

सारांश

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के 'अवैध' वाले बयान को संवैधानिक संस्थाओं पर हमला और जनादेश का अपमान करार दिया। ईवीएम पर दोहरे मापदंड और चुनाव आयुक्त नियुक्ति के इतिहास को लेकर भाजपा का यह पलटवार आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ा सकता है।

मुख्य बातें

शिवराज सिंह चौहान ने 3 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, खड़गे के 'अवैध' वाले बयान को जनादेश का अपमान बताया।
चौहान ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 पारदर्शी और संवैधानिक तरीके से पारित हुआ है।
दशकों तक कांग्रेस ने बिना किसी कानून के 'प्रधानमंत्री कार्यालय की पर्ची' पर चुनाव आयुक्त नियुक्त किए — यह आरोप चौहान ने लगाया।
सर्वोच्च न्यायालय बार-बार ईवीएम की विश्वसनीयता पर मुहर लगा चुका है; कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि देश का लोकतंत्र बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान की नींव पर अडिग है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को 'अवैध' बताना संवैधानिक संस्थाओं तथा जनादेश का घोर अपमान है। चौहान के अनुसार, यह बयान कांग्रेस की हताशा, पराजय की मानसिकता और संवैधानिक संस्थाओं पर प्रहार की पुरानी रणनीति का एक और उदाहरण है।

जनादेश और लोकतंत्र पर सवाल

चौहान ने कहा कि जिस प्रधानमंत्री को देश की जनता ने पूर्ण बहुमत और रिकॉर्ड जनादेश के साथ चुना है, उनके विरुद्ध इस प्रकार की टिप्पणी कांग्रेस के लोकतांत्रिक व्यवस्था में अविश्वास को उजागर करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस की नजर में लोकतंत्र केवल तभी वैध होता है, जब गांधी परिवार सत्ता में हो। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एक विविधतापूर्ण और विशाल लोकतंत्र में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में चुना जाना जनता के ऐतिहासिक विश्वास का प्रमाण है।

चुनाव आयुक्त नियुक्ति विवाद पर पलटवार

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि खड़गे ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 को संसद के दोनों सदनों द्वारा पूरी तरह पारदर्शी और संवैधानिक तरीके से पारित किया गया है। इस कानून में नेता प्रतिपक्ष को चयन समिति का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है — जो विपक्ष की आवाज की गारंटी देता है।

चौहान ने कांग्रेस के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि दशकों तक कांग्रेस सरकारों ने बिना किसी कानून या पारदर्शी चयन समिति के, केवल प्रधानमंत्री कार्यालय की एक पर्ची पर मनमाने तरीके से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की — और बाद में उन्हें मंत्री पद तथा सांसद का इनाम दिया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना, फर्जी और दोहरे नाम हटाना, और योग्य नागरिकों को जोड़ना चुनाव आयोग की एक सतत और वैधानिक प्रक्रिया है।

ईवीएम विवाद: दोहरा मापदंड का आरोप

चौहान ने कांग्रेस पर ईवीएम को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब कांग्रेस कर्नाटक, तेलंगाना या हिमाचल प्रदेश में जीतती है, तब उसे ईवीएम पर कोई आपत्ति नहीं होती — लेकिन जब जनता उसे नकारती है तो हार का ठीकरा तुरंत ईवीएम पर फोड़ दिया जाता है। उन्होंने जोड़ा कि सर्वोच्च न्यायालय बार-बार ईवीएम की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर अपनी मुहर लगा चुका है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष के एक वर्ग ने हाल के चुनावी परिणामों के बाद ईवीएम की प्रक्रिया पर फिर से सवाल उठाए हैं। चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश को 1980 और 90 के दशक के बूथ कैप्चरिंग और मतपेटी लूट के दौर में वापस धकेलना चाहती है।

भाजपा का संविधान और लोकतंत्र पर रुख

चौहान ने कहा कि कांग्रेस आज मुद्दों से विहीन हो चुकी है और अपनी लगातार चुनावी हारों को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करना और देश के लोकतंत्र को वैश्विक मंच पर बदनाम करना ही उसका एजेंडा बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस 'गरीबों' और 'मुस्लिम अल्पसंख्यकों' के नाम पर डर और भ्रम का माहौल बनाकर अपनी तुष्टीकरण की राजनीति को जिंदा रखना चाहती है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से चौहान ने स्पष्ट किया कि देश का लोकतंत्र बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान की नींव पर अडिग है और जनता ऐसे आधारहीन बयानों का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से बार-बार देती रहेगी। यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भाजपा की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो विपक्ष को 'संस्थाविरोधी' साबित करने पर केंद्रित है। दिलचस्प यह है कि जिस चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को पारदर्शी बताया जा रहा है, उस पर सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएँ लंबित हैं और मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पैनल को हटाने पर विपक्ष की आपत्ति अभी भी अनसुलझी है। ईवीएम पर कांग्रेस के दोहरे मापदंड का आरोप राजनीतिक रूप से धारदार है, लेकिन यह उन नागरिकों और विशेषज्ञों की तकनीकी चिंताओं को नहीं खारिज करता जो प्रणाली की स्वतंत्र ऑडिट की माँग करते हैं। असली जवाबदेही की परीक्षा तब होगी जब संसदीय समितियाँ इन संस्थाओं की निष्पक्षता की समीक्षा करें — न कि केवल राजनीतिक मंचों से।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
चौहान ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे द्वारा राहुल गांधी के निर्देश पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को 'अवैध' बताना संवैधानिक संस्थाओं और जनादेश का अपमान है। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी हार के बाद बार-बार ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया।
चुनाव आयुक्त नियुक्ति विवाद क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 के तहत नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया गया है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष को चयन समिति में शामिल किया गया है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा इसे पारदर्शी और संवैधानिक बताती है।
ईवीएम पर कांग्रेस और भाजपा के बीच विवाद क्यों है?
चौहान के अनुसार, कांग्रेस जब कर्नाटक, तेलंगाना या हिमाचल प्रदेश में जीतती है तो ईवीएम पर कोई आपत्ति नहीं करती, लेकिन हार होने पर ईवीएम को दोष देती है। सर्वोच्च न्यायालय बार-बार ईवीएम की विश्वसनीयता पर अपनी स्वीकृति दे चुका है।
कांग्रेस के किस बयान पर शिवराज चौहान ने प्रतिक्रिया दी?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को 'अवैध' बताने वाला बयान दिया था, जिसे राहुल गांधी के निर्देश पर दिया गया बताया जा रहा है। इसी बयान के जवाब में चौहान ने यह पलटवार किया।
भाजपा के अनुसार कांग्रेस की 'पुरानी परिपाटी' क्या है?
भाजपा का आरोप है कि जब-जब जनता कांग्रेस को चुनावों में नकारती है, तब-तब वह लोकतंत्र, चुनाव आयोग, ईवीएम और जनादेश को बदनाम करने की कोशिश करती है। चौहान ने यह भी कहा कि दशकों तक कांग्रेस ने बिना कानून के मनमाने तरीके से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की।
राष्ट्र प्रेस
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