ईवीएम विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह का विपक्ष पर पलटवार, कहा — 'गड़बड़ी का सबूत दो'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 4 अक्टूबर 2026 को गोंडा में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और ईवीएम विवाद पर विपक्ष को कड़ी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष देश की चुनाव प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि उसे स्पष्ट करना चाहिए कि चुनाव में गड़बड़ी कहाँ और कैसे हो रही है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सिंह का पक्ष
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट कानूनी ढाँचा नहीं था। 2023 के आसपास यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुँचा, जहाँ अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद संसद ने कानून बनाकर यह प्रक्रिया निर्धारित की।
उन्होंने बताया कि मौजूदा कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक व्यक्ति शामिल होते हैं। यह कानून अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती के अधीन है, लेकिन अब तक निरस्त नहीं किया गया है।
विपक्ष से ऐतिहासिक नज़ीर का सवाल
सिंह ने विपक्ष से पूछा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला और एम.एस. गिल की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई थी। यह सवाल उन्होंने विपक्ष की उस आलोचना के जवाब में उठाया, जिसमें मौजूदा नियुक्ति प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताया जाता रहा है।
गौरतलब है कि नवीन चावला की नियुक्ति और कार्यकाल को लेकर अपने समय में भी राजनीतिक विवाद रहा था। सिंह का तर्क था कि नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाना नई बात नहीं है, लेकिन इसे चुनावी परिणामों से जोड़ना भ्रामक है।
ईवीएम पर विपक्ष के आरोपों का खंडन
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि ईवीएम से पहले भी देश में चुनाव होते थे और उस समय चुनाव प्रक्रिया को इस तरह कठघरे में नहीं खड़ा किया जाता था। उनके अनुसार, 2014 के बाद BJP का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है और विपक्ष के राजनीतिक गढ़ एक-एक करके ढहते जा रहे हैं — इसीलिए वह चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को कई बार यह साबित करने का मौका मिला कि ईवीएम में गड़बड़ी हो रही है, लेकिन वह अब तक कोई ठोस प्रमाण नहीं दे पाया है।
बैलेट पेपर की माँग पर तीखी टिप्पणी
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की विपक्ष की माँग पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने कहा कि 'बैलेट का मतलब लूट है।' उन्होंने तर्क दिया कि पुरानी मतपत्र व्यवस्था में बूथ कैप्चरिंग और धाँधली की घटनाएँ कहीं अधिक थीं।
यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के सभी चुनावों को 'अवैध' करार देते हुए लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं को भंग कर बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव कराने की माँग की है।
रचनात्मक सुझाव की अपील
सिंह ने यह भी कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया में कोई वास्तविक कमी है, तो उसे दूर करने के लिए सुझाव दिए जाने चाहिए और व्यवस्था को बेहतर बनाने पर रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि आरोपों की राजनीति छोड़कर सुधार की दिशा में काम किया जाए।
यह विवाद आगामी चुनावी मौसम में और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव करीब आते जा रहे हैं।