4 अक्टूबर 2026
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ईवीएम विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह का विपक्ष पर पलटवार, कहा — 'गड़बड़ी का सबूत दो'

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ईवीएम विवाद पर बृजभूषण शरण सिंह का विपक्ष पर पलटवार, कहा — 'गड़बड़ी का सबूत दो'

सारांश

ईवीएम और चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर विपक्ष के तीखे हमलों के जवाब में BJP पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने खड़गे के 'अवैध चुनाव' वाले बयान को सीधी चुनौती दी — सबूत माँगा, ऐतिहासिक नज़ीर उठाई, और बैलेट पेपर को 'लूट' करार दिया।

मुख्य बातें

BJP पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 4 अक्टूबर 2026 को गोंडा में विपक्ष पर ईवीएम और चुनाव आयोग विवाद को लेकर पलटवार किया।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद BJP का प्रदर्शन मज़बूत होने के कारण विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
चुनाव आयुक्त नियुक्ति प्रक्रिया पर पूछा — पूर्व CEC नवीन चावला और एम.एस.
गिल की नियुक्ति किस नियम से हुई थी?
बैलेट पेपर की विपक्षी माँग को 'लूट की वापसी' बताया; कहा — विपक्ष ईवीएम गड़बड़ी का सबूत नहीं दे पाया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभी चुनावों को 'अवैध' बताते हुए लोकसभा और विधानसभाएँ भंग कर बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव कराने की माँग की है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 4 अक्टूबर 2026 को गोंडा में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और ईवीएम विवाद पर विपक्ष को कड़ी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष देश की चुनाव प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि उसे स्पष्ट करना चाहिए कि चुनाव में गड़बड़ी कहाँ और कैसे हो रही है।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सिंह का पक्ष

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट कानूनी ढाँचा नहीं था। 2023 के आसपास यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुँचा, जहाँ अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद संसद ने कानून बनाकर यह प्रक्रिया निर्धारित की।

उन्होंने बताया कि मौजूदा कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक व्यक्ति शामिल होते हैं। यह कानून अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती के अधीन है, लेकिन अब तक निरस्त नहीं किया गया है।

विपक्ष से ऐतिहासिक नज़ीर का सवाल

सिंह ने विपक्ष से पूछा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला और एम.एस. गिल की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई थी। यह सवाल उन्होंने विपक्ष की उस आलोचना के जवाब में उठाया, जिसमें मौजूदा नियुक्ति प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताया जाता रहा है।

गौरतलब है कि नवीन चावला की नियुक्ति और कार्यकाल को लेकर अपने समय में भी राजनीतिक विवाद रहा था। सिंह का तर्क था कि नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाना नई बात नहीं है, लेकिन इसे चुनावी परिणामों से जोड़ना भ्रामक है।

ईवीएम पर विपक्ष के आरोपों का खंडन

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि ईवीएम से पहले भी देश में चुनाव होते थे और उस समय चुनाव प्रक्रिया को इस तरह कठघरे में नहीं खड़ा किया जाता था। उनके अनुसार, 2014 के बाद BJP का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है और विपक्ष के राजनीतिक गढ़ एक-एक करके ढहते जा रहे हैं — इसीलिए वह चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को कई बार यह साबित करने का मौका मिला कि ईवीएम में गड़बड़ी हो रही है, लेकिन वह अब तक कोई ठोस प्रमाण नहीं दे पाया है।

बैलेट पेपर की माँग पर तीखी टिप्पणी

बैलेट पेपर से चुनाव कराने की विपक्ष की माँग पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने कहा कि 'बैलेट का मतलब लूट है।' उन्होंने तर्क दिया कि पुरानी मतपत्र व्यवस्था में बूथ कैप्चरिंग और धाँधली की घटनाएँ कहीं अधिक थीं।

यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के सभी चुनावों को 'अवैध' करार देते हुए लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं को भंग कर बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव कराने की माँग की है।

रचनात्मक सुझाव की अपील

सिंह ने यह भी कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया में कोई वास्तविक कमी है, तो उसे दूर करने के लिए सुझाव दिए जाने चाहिए और व्यवस्था को बेहतर बनाने पर रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि आरोपों की राजनीति छोड़कर सुधार की दिशा में काम किया जाए।

यह विवाद आगामी चुनावी मौसम में और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव करीब आते जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस असल बहस को टालता है जो चुनावी लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है। ईवीएम की तकनीकी विश्वसनीयता और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में कार्यपालिका के प्रभुत्व को लेकर जो सवाल उठते हैं, वे महज़ हारे हुए दलों की कुंठा नहीं हैं — सर्वोच्च न्यायालय तक ने इन पर टिप्पणी की है। पूर्व आयुक्तों की नियुक्तियों की नज़ीर देना एक-दूसरे पर उँगली उठाना है, समाधान नहीं। असली ज़रूरत एक निष्पक्ष, स्वतंत्र नियुक्ति ढाँचे की है जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को भरोसा हो — और यह बहस 'सबूत दो' के नारे से आगे जानी चाहिए।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृजभूषण शरण सिंह ने ईवीएम विवाद पर क्या कहा?
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि विपक्ष ईवीएम में गड़बड़ी का आज तक कोई ठोस सबूत नहीं दे पाया है और 2014 के बाद BJP के बेहतर प्रदर्शन से बौखलाकर वह चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। उन्होंने विपक्ष को सुझाव देने की जगह आरोपबाज़ी बंद करने की नसीहत दी।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनावों को 'अवैध' क्यों बताया?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के सभी चुनावों को 'अवैध' करार देते हुए लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं को भंग कर बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव कराने की माँग की है। यह बयान चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और ईवीएम की विश्वसनीयता पर चल रही बहस के बीच आया है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया क्या है?
2023 में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद संसद ने कानून बनाकर चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया निर्धारित की। मौजूदा कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक व्यक्ति शामिल होते हैं; यह कानून अभी सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती के अधीन है।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग पर BJP का क्या रुख है?
बृजभूषण शरण सिंह ने बैलेट पेपर व्यवस्था को 'लूट' का पर्याय बताया और कहा कि विपक्ष पुरानी व्यवस्था में लौटना चाहता है जिसमें बूथ कैप्चरिंग जैसी अनियमितताएँ अधिक थीं। उनके अनुसार, ईवीएम ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया है।
बृजभूषण शरण सिंह ने नवीन चावला और एम.एस. गिल का ज़िक्र क्यों किया?
उन्होंने यह सवाल विपक्ष की उस आलोचना के जवाब में उठाया जिसमें मौजूदा चुनाव आयुक्त नियुक्ति प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताया जाता है। सिंह का तर्क था कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला और एम.एस. गिल की नियुक्ति भी बिना किसी स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया के हुई थी, जो उस समय विपक्ष में रही पार्टियों के दौर में था।
राष्ट्र प्रेस
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