12 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बृजभूषण शरण सिंह का विपक्ष पर तीखा हमला: सीईसी विरोध 'बेबुनियाद', बैलेट पेपर से लौटेगा जंगलराज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बृजभूषण शरण सिंह का विपक्ष पर तीखा हमला: सीईसी विरोध 'बेबुनियाद', बैलेट पेपर से लौटेगा जंगलराज

सारांश

BJP के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने CEC के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन को सत्ता पाने की नाकाम कोशिश का हथियार बताया और बैलेट पेपर की माँग को सीधे 'जंगलराज की वापसी' करार दिया — 1991 के अपने खुद के कड़वे अनुभव का हवाला देते हुए।

मुख्य बातें

BJP के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 12 अक्टूबर 2026 को गोंडा में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी विरोध-प्रदर्शनों की निंदा की।
उन्होंने बैलेट पेपर व्यवस्था की वापसी की माँग को नकारते हुए इसे 'जंगलराज की पुनर्स्थापना' बताया।
बृजभूषण ने 1991 के गोंडा चुनाव का हवाला दिया जिसमें उनके सैकड़ों कार्यकर्ता घायल हुए थे और बूथ कैप्चरिंग हुई थी।
उन्होंने विपक्ष पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया — जीत पर EVM सही, हार पर EVM गलत।
विपक्ष को चुनौती दी कि वह प्रमाण के साथ खामियाँ बताए, केवल सवाल उछालने से काम नहीं चलेगा।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 12 अक्टूबर 2026 को गोंडा में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों की कड़े शब्दों में निंदा की और बैलेट पेपर व्यवस्था की वापसी की माँग को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक विफलताओं को छुपाने की कोशिश कर रहा है।

विपक्ष पर सीधा हमला

पूर्व सांसद ने कहा कि 2014 के बाद से — चाहे लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा — भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि विपक्ष के पास अब राजनीतिक रूप से छिपने का कोई रास्ता नहीं बचा है, इसलिए वह देश की लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया पर ही निशाना साध रहा है। बृजभूषण ने दोहरे मानदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि जहाँ विपक्ष चुनाव जीतता है, वहाँ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर कोई आपत्ति नहीं होती, और जहाँ हार होती है, वहाँ मशीन पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को कई अवसर दिए गए कि वह प्रमाण के साथ बताए कि चुनाव में धाँधली कैसे हो रही है, लेकिन आज तक कोई भी ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया।

बैलेट पेपर युग की 'अराजकता' का ज़िक्र

बृजभूषण ने बैलेट पेपर के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव के दौरान व्यापक हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और हत्याएँ आम बात थीं। उन्होंने कहा कि विपक्ष वही पुरानी व्यवस्था चाहता है जिसमें 'जो दबंग है, वही वोट डाल ले।'

पूर्व सांसद ने बताया कि वह खुद इस अराजकता के भुक्तभोगी रहे हैं। 1991 में जब उन्होंने गोंडा से पहला चुनाव लड़ा था, तब उनके सैकड़ों कार्यकर्ता घायल हुए थे, बूथों पर पोलिंग एजेंट तक नहीं मिलते थे और कार्यकर्ताओं को खुलेआम पीटा जाता था।

चुनाव की तैयारी 'युद्ध जैसी' थी

बृजभूषण ने उस दौर का वर्णन करते हुए कहा कि तब चुनाव की तैयारी किसी युद्ध से कम नहीं होती थी — किस पोलिंग बूथ पर 20, किस पर 30 और किस पर 50 कार्यकर्ता तैनात करने हैं, इसकी रणनीति बनानी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि देश अब उस अंधेरे दौर में वापस नहीं जाएगा और बैलेट पेपर की वापसी का अर्थ होगा 'जंगलराज की पुनर्स्थापना।'

विपक्ष से रचनात्मक सुझाव की माँग

पूर्व सांसद ने विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया में कोई वास्तविक खामी है, तो उन्हें विस्तार से बताना चाहिए कि वह खामी क्या है और उसे कैसे दूर किया जाए। उन्होंने आलोचना की कि विपक्ष के नेता 'सवाल उछालकर भाग जाते हैं' और कभी कोई ठोस विकल्प नहीं सुझाते। उनके अनुसार, यही रवैया विपक्ष की राजनीतिक अपरिपक्वता को दर्शाता है।

आगे की स्थिति

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध अभी जारी है। बृजभूषण जैसे BJP नेताओं की प्रतिक्रियाएँ यह संकेत देती हैं कि EVM बनाम बैलेट पेपर की बहस आने वाले समय में और तेज़ हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद न केवल चुनाव आयोग की स्वायत्तता, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनता के भरोसे को भी प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सत्तापक्ष का 'कुछ साबित करो' वाला तर्क संस्थागत जवाबदेही की माँग को कमज़ोर करने का जोखिम उठाता है। बैलेट पेपर के दौर की हिंसा की आलोचना जायज़ है, लेकिन इसे EVM की निर्दोषता के प्रमाण के रूप में पेश करना तार्किक रूप से खोखला है। जब तक चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं की स्वतंत्र ऑडिट की अनुमति नहीं देता, यह बहस समाप्त होने वाली नहीं है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृजभूषण शरण सिंह ने CEC के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन पर क्या कहा?
BJP के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से BJP लगातार जीतती आ रही है और विपक्ष अपनी हार छुपाने के लिए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
बृजभूषण ने बैलेट पेपर व्यवस्था की वापसी का विरोध क्यों किया?
बृजभूषण ने कहा कि बैलेट पेपर के दौर में बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और हत्याएँ होती थीं। उनके अनुसार बैलेट पेपर की वापसी से देश में 'जंगलराज' फिर लौट आएगा।
बृजभूषण ने 1991 के चुनाव का ज़िक्र क्यों किया?
उन्होंने 1991 में गोंडा से लड़े अपने पहले चुनाव का हवाला दिया, जब उनके सैकड़ों कार्यकर्ता घायल हुए थे और पोलिंग एजेंट तक नहीं मिलते थे। इसे उन्होंने बैलेट पेपर युग की अराजकता का व्यक्तिगत प्रमाण बताया।
बृजभूषण ने EVM पर विपक्ष के दोहरे मानदंड का क्या आरोप लगाया?
उन्होंने कहा कि जहाँ विपक्ष चुनाव जीतता है वहाँ EVM पर कोई आपत्ति नहीं होती, और जहाँ हारता है वहाँ EVM पर सवाल उठाए जाते हैं। उनके अनुसार विपक्ष आज तक यह साबित नहीं कर पाया है कि EVM से चुनाव में धाँधली हुई।
बृजभूषण ने विपक्ष से क्या माँग की?
पूर्व सांसद ने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया में कोई वास्तविक खामी है तो विपक्ष को ठोस सुझाव देने चाहिए, न कि केवल सवाल उछालकर भाग जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता कभी विस्तार से कोई विकल्प नहीं बताते।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 4 दिन पहले
  4. 6 दिन पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 सप्ताह पहले