बृजभूषण शरण सिंह का विपक्ष पर तीखा हमला: सीईसी विरोध 'बेबुनियाद', बैलेट पेपर से लौटेगा जंगलराज
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 12 अक्टूबर 2026 को गोंडा में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों की कड़े शब्दों में निंदा की और बैलेट पेपर व्यवस्था की वापसी की माँग को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक विफलताओं को छुपाने की कोशिश कर रहा है।
विपक्ष पर सीधा हमला
पूर्व सांसद ने कहा कि 2014 के बाद से — चाहे लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा — भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि विपक्ष के पास अब राजनीतिक रूप से छिपने का कोई रास्ता नहीं बचा है, इसलिए वह देश की लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया पर ही निशाना साध रहा है। बृजभूषण ने दोहरे मानदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि जहाँ विपक्ष चुनाव जीतता है, वहाँ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर कोई आपत्ति नहीं होती, और जहाँ हार होती है, वहाँ मशीन पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को कई अवसर दिए गए कि वह प्रमाण के साथ बताए कि चुनाव में धाँधली कैसे हो रही है, लेकिन आज तक कोई भी ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया।
बैलेट पेपर युग की 'अराजकता' का ज़िक्र
बृजभूषण ने बैलेट पेपर के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव के दौरान व्यापक हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और हत्याएँ आम बात थीं। उन्होंने कहा कि विपक्ष वही पुरानी व्यवस्था चाहता है जिसमें 'जो दबंग है, वही वोट डाल ले।'
पूर्व सांसद ने बताया कि वह खुद इस अराजकता के भुक्तभोगी रहे हैं। 1991 में जब उन्होंने गोंडा से पहला चुनाव लड़ा था, तब उनके सैकड़ों कार्यकर्ता घायल हुए थे, बूथों पर पोलिंग एजेंट तक नहीं मिलते थे और कार्यकर्ताओं को खुलेआम पीटा जाता था।
चुनाव की तैयारी 'युद्ध जैसी' थी
बृजभूषण ने उस दौर का वर्णन करते हुए कहा कि तब चुनाव की तैयारी किसी युद्ध से कम नहीं होती थी — किस पोलिंग बूथ पर 20, किस पर 30 और किस पर 50 कार्यकर्ता तैनात करने हैं, इसकी रणनीति बनानी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि देश अब उस अंधेरे दौर में वापस नहीं जाएगा और बैलेट पेपर की वापसी का अर्थ होगा 'जंगलराज की पुनर्स्थापना।'
विपक्ष से रचनात्मक सुझाव की माँग
पूर्व सांसद ने विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया में कोई वास्तविक खामी है, तो उन्हें विस्तार से बताना चाहिए कि वह खामी क्या है और उसे कैसे दूर किया जाए। उन्होंने आलोचना की कि विपक्ष के नेता 'सवाल उछालकर भाग जाते हैं' और कभी कोई ठोस विकल्प नहीं सुझाते। उनके अनुसार, यही रवैया विपक्ष की राजनीतिक अपरिपक्वता को दर्शाता है।
आगे की स्थिति
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध अभी जारी है। बृजभूषण जैसे BJP नेताओं की प्रतिक्रियाएँ यह संकेत देती हैं कि EVM बनाम बैलेट पेपर की बहस आने वाले समय में और तेज़ हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद न केवल चुनाव आयोग की स्वायत्तता, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनता के भरोसे को भी प्रभावित कर सकता है।