शहनाज गिल का खुलासा: 'इश्कनामा' से पहले बोलीं — दूरी प्यार को गहरा करती है, पर शक भी जन्म देती है
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री शहनाज गिल अपनी आगामी पंजाबी फिल्म 'इश्कनामा' की 24 जुलाई की रिलीज से पहले प्यार और रिश्तों की जटिलताओं पर खुलकर बात कर रही हैं। एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि दूरी एक तरफ जहाँ प्रेम की कद्र बढ़ाती है, वहीं दूसरी तरफ रिश्तों में अनिश्चितता और संदेह की जड़ें भी मज़बूत कर सकती है। यह फिल्म 1981 से 1988 के बीच भारत-पाकिस्तान सीमा की पृष्ठभूमि पर एक सच्ची प्रेम कहानी को पर्दे पर उतारती है।
दूरी और प्यार पर शहनाज के विचार
जब शहनाज से पूछा गया कि क्या दूरी रिश्तों को मज़बूत बनाती है या कमज़ोर, तो उन्होंने कहा, 'जब दूरी होती है, तो प्यार की वैल्यू बढ़ जाती है। दूरी दिलों को और करीब ला देती है। इंसान को सामने वाले की अहमियत ज़्यादा महसूस होने लगती है, लेकिन हाँ… आपको यह नहीं पता होता कि दूसरा इंसान आपके पीछे क्या कर रहा है। इसलिए शक भी बढ़ सकता है।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'रिश्तों में प्यार और भरोसा सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता है। दूरी कई बार रिश्ते की गहराई को समझने का मौका देती है, लेकिन साथ ही यह भरोसे की परीक्षा भी बन सकती है।' यह टिप्पणी खासतौर पर तब प्रासंगिक है जब फिल्म की कहानी खुद एक ऐसे दौर में बुनी गई है जब दो देशों की सीमाएँ दो दिलों के बीच दीवार बन गई थीं।
'इश्कनामा' की कहानी और पृष्ठभूमि
फिल्म 'इश्कनामा' किताब 'हिंद पाक बॉर्डरनामा' से प्रेरित है और असल ज़िंदगी के प्रेमी जोड़े निम्मा और नसीमा की दास्तान को पर्दे पर जीवंत करती है। यह पीरियड रोमांटिक ड्रामा 1981 से 1988 के बीच भारत-पाकिस्तान सीमा के इर्द-गिर्द की पृष्ठभूमि पर आधारित है — एक ऐसा कालखंड जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर था।
फिल्म का निर्देशन अरविंदर एस. खैरा ने किया है, जबकि इसका निर्माण सौरभ राणा और रवनीत कौर चहल ने किया है। मुख्य भूमिकाओं में जय रंधावा, शहनाज गिल और सौरभ सचदेवा नज़र आएँगे।
संगीत और रिलीज़ की जानकारी
फिल्म का संगीत जाने-माने संगीतकार बी प्राक ने तैयार किया है, और गीतों के बोल जानी ने लिखे हैं — यह जोड़ी पंजाबी संगीत जगत में पहले से ही अपनी अलग पहचान रखती है। 'इश्कनामा' भारत के साथ-साथ कनाडा और ब्रिटेन में एक साथ 24 जुलाई को रिलीज़ होगी।
आज के दौर में सच्चे प्यार पर शहनाज का नज़रिया
जब शहनाज से पूछा गया कि डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया के इस युग में क्या निम्मा-नसीमा जैसा प्यार आज भी संभव है, तो उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि चाहे प्यार का कोई भी तरीका हो, लेकिन अगर उसमें सच्चा प्रेम है, तो वह ज़िंदगी भर साथ रहता है। प्यार आज का हो या पुराने समय का, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। प्यार को किसी एक दौर या तरीके से नहीं बाँधा जा सकता।'
गौरतलब है कि शहनाज गिल अपनी बेबाक और भावनात्मक रूप से ईमानदार अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती हैं, और 'इश्कनामा' उनके करियर में एक अलग तरह की भूमिका के रूप में देखी जा रही है। फिल्म की रिलीज के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ऐतिहासिक प्रेम कहानी आज के दर्शकों के दिलों को छू पाती है।