31 जुलाई 2026
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उमर खालिद की जमानत याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को नोटिस जारी किया, 27 अगस्त को अगली सुनवाई

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उमर खालिद की जमानत याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को नोटिस जारी किया, 27 अगस्त को अगली सुनवाई

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दंगों की कथित साजिश में बंद उमर खालिद की जमानत याचिका पर पुलिस को नोटिस जारी किया है। ट्रायल कोर्ट पहले ही याचिका खारिज कर चुका है। 27 अगस्त को सह-आरोपी शरजील इमाम की याचिका के साथ एक साथ सुनवाई होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 जुलाई को उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम.
सिंह और विकास महाजन की खंडपीठ ने नियमित और अंतरिम — दोनों याचिकाओं पर नोटिस दिया।
अगली सुनवाई 27 अगस्त को; उसी दिन सह-आरोपी शरजील इमाम की याचिका पर भी सुनवाई।
ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को दोनों की जमानत याचिकाएँ खारिज की थीं; यह तीसरा प्रयास है।
खालिद सितंबर 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं; मामला यूएपीए के तहत दर्ज है।
2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में कथित तौर पर 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।

अदालत में क्या हुआ

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने शुक्रवार को उमर खालिद की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा। खंडपीठ ने खालिद की अंतरिम जमानत की अलग याचिका पर भी नोटिस जारी किया। 27 अगस्त को उसी दिन सह-आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका पर भी सुनवाई होनी है।

ट्रायल कोर्ट का फैसला और कानूनी पृष्ठभूमि

ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को उमर खालिद और शरजील इमाम दोनों की जमानत याचिकाएँ खारिज कर दी थीं, जिसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) मामलों में लंबे मुकदमे के आधार पर जमानत देने के प्रश्न को बड़ी पीठ को भेज रखा है। जब तक उस कानूनी विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं आता, निचली अदालत इस आधार पर जमानत देने में असमर्थ है।

पहले भी खारिज हो चुकी हैं याचिकाएँ

यह खालिद और इमाम की जमानत की तीसरी कोशिश है। इससे पहले दो बार दोनों की याचिकाएँ ट्रायल कोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक खारिज हो चुकी हैं। गौरतलब है कि उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और वे तब से न्यायिक हिरासत में हैं।

2020 दंगों का संदर्भ

यह मामला नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों से जुड़ा है, जिनमें कथित तौर पर 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि खालिद ने दंगे भड़काने की एक बड़ी साजिश में भूमिका निभाई थी — हालाँकि यह आरोप अभी न्यायालय में विचाराधीन है और सिद्ध नहीं हुआ है।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट की खंडपीठ 27 अगस्त को दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। यह सुनवाई महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यूएपीए के तहत जमानत के मानदंडों पर सर्वोच्च न्यायालय की बड़ी पीठ का फैसला भी प्रतीक्षित है, जो इस और ऐसे अन्य मामलों की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तब तक विचाराधीन कैदी इंतज़ार करते रहते हैं। हाईकोर्ट की यह सुनवाई इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसका असर केवल खालिद तक सीमित नहीं — यूएपीए के दर्जनों मामलों की दिशा इस पर निर्भर करती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर खालिद कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
उमर खालिद पूर्व जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र हैं, जिन्हें सितंबर 2020 में 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज है, जो अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 जुलाई को क्या आदेश दिया?
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की खंडपीठ ने उमर खालिद की नियमित जमानत याचिका और अंतरिम जमानत याचिका — दोनों पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। अगली सुनवाई 27 अगस्त के लिए निर्धारित की गई है।
ट्रायल कोर्ट ने जमानत याचिका क्यों खारिज की थी?
ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को याचिका खारिज करते हुए कहा कि यूएपीए मामलों में लंबे मुकदमे के आधार पर जमानत देने का प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय की बड़ी पीठ के समक्ष विचाराधीन है। जब तक उस पर अंतिम निर्णय नहीं आता, निचली अदालत इस आधार पर जमानत नहीं दे सकती।
शरजील इमाम का इस मामले से क्या संबंध है?
शरजील इमाम इस मामले में सह-आरोपी हैं और उनकी जमानत याचिका भी ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को खारिज की थी। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर भी 27 अगस्त को उमर खालिद की याचिका के साथ एक साथ सुनवाई तय की है।
2020 के दिल्ली दंगे किस कारण हुए थे और इनका दायरा क्या था?
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़की थी, जिसमें कथित तौर पर 50 से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए। दंगों को भड़काने की साजिश के आरोप में कई लोगों को यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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