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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर मीरवाइज की शर्तें: अनुच्छेद 370 बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई भी एजेंडे में हो

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर मीरवाइज की शर्तें: अनुच्छेद 370 बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई भी एजेंडे में हो

सारांश

नेशनल कॉन्फ्रेंस के जंतर-मंतर धरने में शामिल होने का निमंत्रण मिलने के बाद मीरवाइज उमर फारूक ने साफ कर दिया — केवल स्टेटहुड नहीं, अनुच्छेद 370, राजनीतिक कैदी और कश्मीर के शांतिपूर्ण समाधान की माँग भी एजेंडे में होनी चाहिए। यह शर्त नेशनल कॉन्फ्रेंस और हुर्रियत के बीच की खाई को उजागर करती है।

मुख्य बातें

मीरवाइज उमर फारूक ने 10 जुलाई को श्रीनगर की जामिया मस्जिद में नेशनल कॉन्फ्रेंस के जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शर्तें रखीं।
शर्तों में अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली, राजनीतिक कैदियों के अधिकार और बिना मुकदमे के हिरासत में रखे युवाओं की रिहाई शामिल है।
फारूक अब्दुल्ला ने देश के 52 प्रमुख नेताओं और नागरिक समाज को जंतर-मंतर धरने का निमंत्रण भेजा है।
प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित है।
5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाने के समय केंद्र ने संसद में राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन दिया था, जो 2024 में चुनाव के बाद भी पूरा नहीं हुआ।

मीरवाइज उमर फारूक ने 10 जुलाई को श्रीनगर की जामिया मस्जिद में शुक्रवार की नमाज के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कई अहम शर्तें रख दीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की बहाली का यह आंदोलन केवल राज्य का दर्जा वापस दिलाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

मीरवाइज की प्रमुख शर्तें

मीरवाइज ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला से निमंत्रण मिलने की उन्होंने पुष्टि की और कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के हक के लिए कोई भी नेक प्रयास स्वागत योग्य है। हालाँकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इस आंदोलन के एजेंडे में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए की बहाली, संवैधानिक सुरक्षा उपायों का संरक्षण, राजनीतिक कैदियों के अधिकार, बिना मुकदमे के या जमानत के बावजूद हिरासत में रखे गए युवाओं की रिहाई और कश्मीर संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान भी शामिल होना चाहिए।

नेशनल कॉन्फ्रेंस का जंतर-मंतर धरना: पृष्ठभूमि

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने देश के 52 प्रमुख राजनीतिक नेताओं, जम्मू-कश्मीर के विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण भेजा है। मीरवाइज को भी यह औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था।

डॉ. फारूक अब्दुल्ला का पत्र और दिए गए तर्क

डॉ. अब्दुल्ला ने अपने निमंत्रण पत्र में कहा कि वे यह अपील केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन के दीर्घ अनुभव के आधार पर कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने, जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने और राज्य का दर्जा समाप्त किए जाने के समय केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट आश्वासन दिया था कि उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने इन आश्वासनों पर भरोसा करते हुए किसी भी आंदोलन की राह छोड़ लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लिया। वर्ष 2024 में शांतिपूर्ण विधानसभा चुनाव हुए और जनता ने अपना जनादेश दिया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में निर्वाचित सरकार कार्यरत है, परंतु राज्य का दर्जा अभी तक बहाल नहीं किया गया है।

राजनीतिक महत्व और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है। गौरतलब है कि मीरवाइज की शर्तें नेशनल कॉन्फ्रेंस के मूल एजेंडे से कहीं आगे जाती हैं, जो मुख्यतः स्टेटहुड बहाली पर केंद्रित है। यह देखना अहम होगा कि उमर अब्दुल्ला सरकार इन शर्तों पर किस हद तक सहमति जताती है और क्या मीरवाइज अंततः जंतर-मंतर प्रदर्शन में शरीक होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राज्य का दर्जा न मिलना उनकी सरकार की सबसे बड़ी राजनीतिक कमज़ोरी बनती जा रही है। जंतर-मंतर धरना इस कमज़ोरी को राष्ट्रीय मंच पर उठाने का प्रयास है, मगर मीरवाइज की शर्तें यह भी दर्शाती हैं कि कश्मीर की जटिल राजनीति को एकसूत्र में पिरोना अभी भी आसान नहीं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीरवाइज उमर फारूक ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के लिए क्या शर्तें रखी हैं?
मीरवाइज ने कहा कि आंदोलन में अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली, संवैधानिक सुरक्षा उपायों का संरक्षण, राजनीतिक कैदियों के अधिकार, बिना मुकदमे के हिरासत में रखे युवाओं की रिहाई और कश्मीर संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान शामिल होना चाहिए। केवल राज्य के दर्जे की बहाली तक सीमित रहना उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का जंतर-मंतर प्रदर्शन कब और क्यों हो रहा है?
यह प्रदर्शन संसद के मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित है। पार्टी का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कराने की माँग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है, क्योंकि 5 अगस्त 2019 के बाद से यह दर्जा समाप्त है।
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने किन-किन को निमंत्रण भेजा है?
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने देश के 52 प्रमुख राजनीतिक नेताओं, जम्मू-कश्मीर के विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों को निमंत्रण भेजा है। मीरवाइज उमर फारूक को भी औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया है।
जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा कब समाप्त हुआ था और क्या आश्वासन दिया गया था?
5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के साथ जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर राज्य का दर्जा समाप्त किया गया था। उस समय केंद्र सरकार ने संसद में आश्वासन दिया था कि उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, जो 2024 में चुनाव के बाद भी पूरा नहीं हुआ है।
क्या मीरवाइज नेशनल कॉन्फ्रेंस के जंतर-मंतर धरने में शामिल होंगे?
मीरवाइज ने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है। उन्होंने निमंत्रण की पुष्टि करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के अधिकारों के लिए कोई भी नेक प्रयास स्वागत योग्य है, लेकिन उनकी शर्तों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रतिक्रिया के बाद ही उनकी भागीदारी तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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