दिल्ली पुलिस का नकली नोट नेटवर्क पर शिकंजा, पहाड़गंज से बिहार के दो आरोपी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के निकट पहाड़गंज स्थित एक गेस्ट हाउस में छापेमारी करते हुए नकली भारतीय मुद्रा की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़ किया और बिहार के दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने 6 नवंबर को बताया कि आरोपियों के पास से ₹2,65,100 मूल्य के नकली भारतीय नोट जब्त किए गए हैं।
गिरफ्तारी और बरामदगी का विवरण
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी दिनेश कुमार झा (36 वर्ष) और सतीश कुमार (20 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पहाड़गंज इलाके में दो व्यक्ति नकली नोटों की आपूर्ति और उन्हें प्रचलन में लाने की कोशिश कर रहे हैं। इस सूचना के आधार पर गठित पुलिस टीम ने 'नीलम गेस्ट हाउस' में छापेमारी की और दोनों संदिग्धों को धर दबोचा।
तलाशी के दौरान उनके पास से ₹2,65,100 मूल्य के नकली नोट बरामद हुए। बरामद मुद्रा की जाँच के लिए क्राइम टीम और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की विशेषज्ञ टीम को मौके पर बुलाया गया।
एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
पहाड़गंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 179, 180 और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। गौरतलब है कि आरोपी दिनेश कुमार झा इससे पहले भी नकली मुद्रा के एक मामले में संलिप्त रहा है — 2023 में दिल्ली के पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया पुलिस स्टेशन में उसके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 489B, 489C और 34 के तहत मामला दर्ज था।
पूछताछ में खुलासे
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे नकली नोट बेचने के इरादे से दिल्ली आए थे और खरीदार तलाश रहे थे। उन्होंने कथित तौर पर बताया कि उनकी योजना ₹1 लाख अंकित मूल्य के नकली नोटों को ₹25,000 से ₹30,000 (असली मुद्रा) में बेचने की थी। हालाँकि, गिरफ्तारी से पहले वे कोई भी सौदा नहीं कर पाए थे।
आरोपियों ने यह भी कथित तौर पर खुलासा किया कि उन्हें यह नकली करेंसी 'एस' नाम के एक व्यक्ति ने उपलब्ध कराई थी, जिसकी पहचान अभी जाँच का विषय है।
आगे की जाँच का दायरा
पुलिस ने बताया कि नकली नोटों के स्रोत, कथित आपूर्तिकर्ता की पहचान और इस नेटवर्क की व्यापकता का पता लगाने के लिए जाँच जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा एजेंसियाँ देशभर में नकली भारतीय मुद्रा के प्रचलन को रोकने के लिए अभियान चला रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली मुद्रा नेटवर्क अक्सर राज्यों की सीमाओं के पार फैले होते हैं और इनकी जड़ें बड़े संगठित गिरोहों से जुड़ी होती हैं। इस मामले में 'एस' नाम के सप्लायर की पहचान और उसकी गिरफ्तारी जाँच की प्राथमिकता बताई जा रही है।