दिल्ली पुलिस ने पहाड़गंज में ₹2.65 लाख की नकली करेंसी समेत दो को दबोचा, बिहार से आए थे आरोपी
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के पहाड़गंज थाना पुलिस ने 6 नवंबर 2026 को गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए ₹2,65,100 की नकली भारतीय करेंसी के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने इस ऑपरेशन में एक सक्रिय नकली मुद्रा आपूर्ति नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
गिरफ्तारी और बरामदगी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी दिनेश कुमार झा (36 वर्ष) और सतीश कुमार (20 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस टीम ने पहाड़गंज स्थित नीलम गेस्ट हाउस में छापेमारी के दौरान दोनों को पकड़ा। उनके कब्जे से ₹2,65,100 मूल्य की नकली भारतीय करेंसी बरामद की गई।
आरोपियों की योजना क्या थी
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे नकली नोट बेचने के इरादे से दिल्ली आए थे और ग्राहकों की तलाश में थे। उनकी कथित योजना ₹1 लाख की नकली करेंसी को ₹25,000 से ₹30,000 की असली रकम के बदले बेचने की थी। हालाँकि, पुलिस ने पकड़ने से पहले ही कार्रवाई कर दी, और कोई सौदा पूरा नहीं हो सका।
पुराना आपराधिक रिकॉर्ड और आपूर्तिकर्ता का सुराग
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों में से एक 2023 में पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया थाने में दर्ज नकली करेंसी के एक पुराने मामले में भी शामिल रहा है। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें यह नकली मुद्रा 'एस' नाम के एक अज्ञात व्यक्ति ने उपलब्ध कराई थी। पुलिस अब इस सप्लायर की पहचान और नेटवर्क की पूरी कड़ी उजागर करने में जुटी है।
जाँच की स्थिति
पुलिस ने बताया कि नकली मुद्रा के स्रोत, उसकी आपूर्ति-श्रृंखला और इस नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों का पता लगाने के लिए जाँच जारी है। दोनों आरोपियों की मेडिकल जाँच कराई जा चुकी है और उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है।
क्षेत्र में पहले भी हो चुकी हैं ऐसी गिरफ्तारियाँ
गौरतलब है कि इससे पहले अक्टूबर 2026 में दिल्ली से सटे गौतमबुद्धनगर के थाना नॉलेज पार्क पुलिस ने जाली भारतीय करेंसी के साथ चार आरोपियों — अर्जुन सिंह, शशांक गुप्ता, शांतनु सिंह और वैभव शुक्ला — को 16 अक्टूबर को ग्राम कोंडली पुस्ता के पास से गिरफ्तार किया था। उनके पास से ₹200-₹200 के कुल 920 जाली नोट, यानी ₹1,84,000 की नकली मुद्रा बरामद की गई थी। ये दोनों घटनाएँ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नकली मुद्रा के बढ़ते प्रचलन की ओर इशारा करती हैं।