6 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL नियुक्तियाँ रद्द करने का सरकारी आदेश निरस्त किया, CID जाँच जारी रहेगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL नियुक्तियाँ रद्द करने का सरकारी आदेश निरस्त किया, CID जाँच जारी रहेगी

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL नियुक्तियाँ रद्द करने का राज्य सरकार का आदेश निरस्त कर दिया — हज़ारों चयनित अभ्यर्थियों को राहत मिली। न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने माना कि कुछ की गड़बड़ी के लिए सबको दोषी नहीं ठहराया जा सकता। CID जाँच जारी रहेगी।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 6 नवंबर 2026 को JSSC CGL नियुक्तियाँ रद्द करने का राज्य सरकार का आदेश निरस्त किया।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने सफल अभ्यर्थी आकाश गौरव व अन्य की याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया।
राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को सीआईडी रिपोर्ट के आधार पर नियुक्तियाँ रद्द करने का आदेश जारी किया था।
परीक्षा में कथित अनियमितताओं की सीआईडी जाँच जारी रहेगी; विस्तृत लिखित आदेश अभी आना बाकी है।
जाँच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी और नोडल अधिकारी के रूप में आरके मल्लिक पहले से नियुक्त हैं।

झारखंड हाईकोर्ट ने 6 नवंबर 2026 को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा और उसके आधार पर की गई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने सफल अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद शुक्रवार को यह फैसला सुनाया, जिससे CGL के ज़रिये चयनित और नियुक्त हज़ारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।

मामले की पृष्ठभूमि

राज्य सरकार ने सीआईडी की जाँच रिपोर्ट और अभ्यर्थियों के आंदोलन का हवाला देते हुए 18 अगस्त 2026 को JSSC CGL सहित कुछ भर्ती परीक्षाओं और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए सफल अभ्यर्थी आकाश गौरव और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिकाएँ दाखिल की थीं।

याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क था कि कथित गड़बड़ी में शामिल लोगों की पहचान अलग से की जा सकती है। उनके अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों की कथित गलतियों के लिए पूरी चयन प्रक्रिया और सभी नियुक्तियों को एक साथ रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।

सरकार का पक्ष और अदालत का विचार

राज्य सरकार ने अदालत में सीलबंद रिपोर्ट सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और व्यवस्था की विफलता का पक्ष रखा था। दूसरी ओर, अदालत ने सुनवाई के दौरान यह विचार किया कि कथित गड़बड़ियों के आधार पर सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। उस दिन अदालत ने नियुक्तियाँ रद्द करने के सरकारी आदेश पर पहले से लगी अंतरिम रोक भी बरकरार रखी थी, जिससे प्रभावित कर्मचारी अंतिम फैसले तक अपने पदों पर काम जारी रख सके।

जाँच की निगरानी व्यवस्था

इससे पहले 18 सितंबर को हाईकोर्ट ने भर्ती में कथित अनियमितताओं की जाँच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया था। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके मल्लिक को जाँच प्रक्रिया में सहयोग के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया था।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि निष्पक्ष तरीके से चयनित अभ्यर्थियों को जाँच के नाम पर परेशान नहीं किया जाए। यह निर्देश इस बात का संकेत था कि न्यायपालिका सामूहिक दंड के सिद्धांत को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी।

फैसले का असर और आगे की राह

हाईकोर्ट के इस ताज़े फैसले से JSSC CGL नियुक्तियाँ रद्द करने के सरकारी आदेश को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा में कथित धाँधली से जुड़ी सीआईडी जाँच जारी रहेगी। फैसले का विस्तृत लिखित आदेश अभी आना बाकी है।

गौरतलब है कि यह मामला केवल नौकरशाही प्रक्रिया का नहीं, बल्कि उन हज़ारों युवाओं के भविष्य का है जिन्होंने वैध माध्यम से पद हासिल किए। अदालत का यह रुख — 'दोषियों को चिह्नित करो, निर्दोषों को दंडित मत करो' — राज्य की भर्ती प्रणाली के लिए एक अहम संवैधानिक संदेश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि यह प्रश्न अनुत्तरित रहा कि दोषियों की पहचान अलग से क्यों नहीं हो सकती। असली परीक्षण अब CID जाँच की गुणवत्ता और गति की होगी — यदि जाँच वर्षों तक खिंचती रही, तो चयनित अभ्यर्थियों पर अनिश्चितता की तलवार लटकती रहेगी। भर्ती घोटालों में प्रायः दोषी बच निकलते हैं और निर्दोष अभ्यर्थी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं — अदालत ने इस बार उस ढाँचे को चुनौती दी है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL मामले में क्या फैसला सुनाया?
झारखंड हाईकोर्ट ने 6 नवंबर 2026 को JSSC CGL नियुक्तियाँ रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने माना कि कथित गड़बड़ियों के आधार पर सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
झारखंड सरकार ने JSSC CGL नियुक्तियाँ क्यों रद्द की थीं?
राज्य सरकार ने CID की जाँच रिपोर्ट और अभ्यर्थियों के आंदोलन का हवाला देते हुए 18 अगस्त 2026 को JSSC CGL सहित कुछ भर्ती परीक्षाओं और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश जारी किया था। सरकार ने अदालत में सीलबंद रिपोर्ट सौंपकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का पक्ष रखा था।
क्या JSSC CGL परीक्षा में धाँधली की जाँच बंद हो गई है?
नहीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियुक्तियाँ बहाल होने के बावजूद परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की CID जाँच जारी रहेगी। जाँच की निगरानी सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी कर रहे हैं और आरके मल्लिक नोडल अधिकारी हैं।
JSSC CGL नियुक्त अभ्यर्थियों पर इस फैसले का क्या असर होगा?
फैसले से CGL के ज़रिये चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है — वे अपने पदों पर कार्यरत रह सकेंगे। पहले से लगी अंतरिम रोक की वजह से वे अंतिम फैसले तक काम कर रहे थे, अब सरकारी आदेश निरस्त होने से उनकी नौकरी पर तत्काल खतरा टल गया है।
इस मामले में हाईकोर्ट की अगली कार्यवाही क्या होगी?
फैसले का विस्तृत लिखित आदेश अभी आना बाकी है। CID जाँच न्यायिक निगरानी में जारी रहेगी और दोषी पाए गए अभ्यर्थियों के खिलाफ अलग से कार्रवाई हो सकती है। अदालत ने पहले निर्देश दिया था कि निष्पक्ष तरीके से चयनित अभ्यर्थियों को जाँच के नाम पर परेशान न किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 1 साल पहले