UNSC चुनाव 2028-29: भारत ने शांति स्थापना को बताई सर्वोच्च प्राथमिकता, 3 लाख सैनिकों की तैनाती का हवाला
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 के कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी के संदर्भ में शांति स्थापना (पीसकीपिंग) को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया है। 6 नवंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की चौथी समिति में आयोजित वार्षिक बहस के दौरान भारत के मिशन में सैन्य सलाहकार कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति अभियानों को सुदृढ़ करना और शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की अटूट प्रतिबद्धता है।
भारत की उम्मीदवारी और प्राथमिकताएँ
कर्नल तरुणेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, 'हम शांति स्थापना को इस संस्था के मुख्य उद्देश्य के लिए अपरिहार्य मानते हैं। यही कारण है कि भारत ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में अपनी उम्मीदवारी के लिए इसे एक प्राथमिकता के रूप में चुना है।' इस कार्यकाल के लिए परिषद के चुनाव 2027 में होने हैं। भारत ने 50 मिशनों में 3 लाख से अधिक सैनिक तैनात किए हैं, जो उसे अब तक का सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता देश बनाता है।
शांति सैनिकों की सुरक्षा और जवाबदेही
कर्नल सिंह ने याद दिलाया कि जब भारत पिछली बार सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष था, तब उसने शांति सैनिकों की सुरक्षा और हमलावरों को न्याय के कटघरे में लाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई थी। उन्होंने बताया कि अगस्त 2021 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने परिषद में एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें शांति सैनिकों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने की माँग की गई थी। उस प्रस्ताव में कहा गया था कि शांति सैनिकों पर लक्षित हमले संयुक्त राष्ट्र अभियानों के लिए 'बड़ी चुनौती' हैं।
सिंह ने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र के 'ब्लू हेलमेट' आज असममित और तकनीक-आधारित खतरों का सामना कर रहे हैं। उनका कहना था कि शांति सैनिकों पर हमला करने वालों को हर हाल में जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
सैनिक-योगदानकर्ता देशों की भूमिका
भारत के प्रतिनिधि ने माँग की कि जिन देशों के सैनिक और पुलिसकर्मी संयुक्त राष्ट्र मिशनों में तैनात हैं, उन्हें परिषद द्वारा तय किए जाने वाले जनादेश को आकार देने में व्यवस्थित और संस्थागत भूमिका मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी जनादेश को लागू करने या उसकी समीक्षा से पहले सैनिक व पुलिस बल देने वाले देशों के साथ विचार-विमर्श की संस्थागत व्यवस्था होनी चाहिए। यह माँग इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि योगदानकर्ता देशों को अक्सर जनादेश निर्धारण प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।
सफल शांति अभियानों की शर्तें
कर्नल सिंह ने स्पष्ट किया कि शांति स्थापना अभियानों के सफल होने की संभावना तब सबसे अधिक होती है, जब एक व्यापक राजनीतिक प्रक्रिया हो, जिसका राजनीतिक परिणाम स्पष्ट रूप से तय हो और शांति सैनिकों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तैनाती की मंजूरी देते समय ही क्षमताओं को बढ़ाने और ज़रूरी संसाधन उपलब्ध कराने का इंतजाम कर लिया जाए।' गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई सक्रिय संयुक्त राष्ट्र मिशनों को संसाधन और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
आगे क्या
भारत के UNSC चुनाव 2027 में होने हैं और तब तक भारत शांति स्थापना के मुद्दे को अपनी कूटनीतिक प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाता रहेगा। भारत की यह सक्रियता उसकी व्यापक बहुपक्षीय कूटनीति का हिस्सा है, जिसमें वह संयुक्त राष्ट्र सुधार और वैश्विक शासन में अधिक प्रतिनिधित्व की माँग करता रहा है।