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संयुक्त राष्ट्र सुधार: भारत ने UNGA में माँगा सुरक्षा परिषद विस्तार, तीन क्षेत्रों में बदलाव का आह्वान

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संयुक्त राष्ट्र सुधार: भारत ने UNGA में माँगा सुरक्षा परिषद विस्तार, तीन क्षेत्रों में बदलाव का आह्वान

सारांश

न्यूयॉर्क में UNGA पूर्ण सत्र में भारत ने दो दशक पुरानी माँग को नए ज़ोर के साथ दोहराया — सुरक्षा परिषद में स्थायी और निर्वाचित सदस्यता विस्तार अब अटकाया नहीं जा सकता। साथ ही महासभा के कामकाज में तीन ठोस बदलावों का प्रस्ताव रखकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका का दावा पेश किया।

मुख्य बातें

जोशी ने 9 अक्टूबर 2026 को UNGA पूर्ण सत्र में भारत का पक्ष रखा।
भारत ने सुरक्षा परिषद में स्थायी और निर्वाचित — दोनों श्रेणियों में सदस्यता विस्तार की माँग दोहराई।
महासभा की कार्यप्रणाली में तीन सुधार प्रस्तावित — एजेंडा प्रबंधन, समिति समन्वय, और मानवाधिकार परिषद कार्य की पुनरावृत्ति समाप्त करना।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन में महासभा की अधिक महत्वपूर्ण भूमिका का समर्थन किया।
सुरक्षा परिषद की अक्षमता को संयुक्त राष्ट्र की समग्र विश्वसनीयता के लिए खतरा बताया गया।

भारत ने 9 अक्टूबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के पूर्ण सत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि महासभा का पुनरुद्धार व्यापक संयुक्त राष्ट्र सुधारों का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए, ताकि संगठन अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और अपने मूल उद्देश्यों को पूरा करने में सक्षम बन सके। भाजपा सांसद सी.पी. जोशी ने भारत का पक्ष रखते हुए निर्वाचित और स्थायी — दोनों श्रेणियों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता विस्तार की माँग को दोहराया।

सुरक्षा परिषद सुधार: भारत का स्पष्ट रुख

जोशी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अपने दायित्व को प्रभावी ढंग से निभाने में सुरक्षा परिषद की अक्षमता समग्र रूप से संयुक्त राष्ट्र के कामकाज पर गंभीर संदेह उत्पन्न करती है। उन्होंने कहा कि स्थायी और निर्वाचित — दोनों श्रेणियों में सदस्यता विस्तार सहित सुरक्षा परिषद में प्रभावी सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता।

उनका जोर था कि यह आवश्यक है कि सुरक्षा परिषद आज की वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करे और संयुक्त राष्ट्र को वर्तमान चुनौतियों का समाधान करने में सक्षम बनाए। गौरतलब है कि भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का दावेदार रहा है और यह मुद्दा नई दिल्ली की बहुपक्षीय कूटनीति के केंद्र में है।

महासभा के कामकाज में तीन सुधारों का प्रस्ताव

जोशी ने महासभा की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए तीन ठोस क्षेत्र रेखांकित किए। पहला, एजेंडे को अधिक व्यावहारिक और प्रबंधनीय बनाया जाए — समान या परस्पर संबंधित विषयों को समेकित किया जाए और कुछ विषयों पर विचार-विमर्श दो या तीन वर्षों के अंतराल पर किया जाए, जिससे चर्चाएँ अधिक सार्थक और केंद्रित हों।

दूसरा, महासभा की मुख्य समितियों के बीच, तथा इन समितियों और पूर्ण सत्रों के बीच बेहतर समन्वय, सामंजस्य और पूरकता सुनिश्चित की जाए। तीसरा, मानवाधिकार परिषद — जिसकी स्थापना लगभग दो दशक पहले महासभा के एक सहायक अंतर-सरकारी निकाय के रूप में एक विशिष्ट जनादेश के साथ हुई थी — के कार्य को न्यूयॉर्क में दोहराना अनावश्यक है; प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन पर भारत का रुख

जोशी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के अगले सदस्य के चयन को एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में महासभा की अधिक महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए और भारत इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अन्य सदस्य देशों के साथ सक्रिय रूप से काम करने के लिए तत्पर है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र कई भू-राजनीतिक संकटों और संस्थागत विश्वसनीयता की चुनौतियों का सामना कर रहा है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

भारत का यह रुख उसकी दीर्घकालिक नीति का विस्तार है जिसमें वह बहुपक्षीय संस्थाओं में विकासशील और वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व की माँग करता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब G4 देश — भारत, जापान, जर्मनी और ब्राज़ील — सुरक्षा परिषद सुधार के लिए नए सिरे से समन्वित प्रयास कर रहे हैं। जोशी ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंगों का पुनरुद्धार केवल महासभा तक सीमित नहीं रह सकता — यह एक समग्र, संरचनात्मक बदलाव की माँग है। भारत की इस पहल पर सदस्य देशों की प्रतिक्रिया आने वाले सत्रों में स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन P5 की आपसी अड़चन ने इसे जमे रहने दिया है। असली सवाल यह है कि क्या UNGA के मंच से दोहराई गई यह माँग इस बार ठोस राजनीतिक गठबंधन में तब्दील होगी, या वैश्विक दक्षिण की आवाज़ फिर प्रस्तावों की फाइलों में दब जाएगी। भारत G4 समूह के साथ समन्वय में है, लेकिन चीन के वीटो की दीवार अभी भी खड़ी है। जब तक सुधार की माँग को बाध्यकारी संरचनात्मक तंत्र से नहीं जोड़ा जाता, बयानबाज़ी और बदलाव के बीच की खाई बनी रहेगी।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UNGA में भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुधार पर क्या माँग रखी?
भारत ने 9 अक्टूबर 2026 को UNGA पूर्ण सत्र में माँग की कि सुरक्षा परिषद में स्थायी और निर्वाचित — दोनों श्रेणियों में सदस्यता का विस्तार किया जाए। साथ ही यह भी कहा कि महासभा का पुनरुद्धार व्यापक संयुक्त राष्ट्र सुधारों का हिस्सा होना चाहिए।
सी.पी. जोशी ने महासभा की कार्यप्रणाली में कौन-से तीन सुधार सुझाए?
भाजपा सांसद सी.पी. जोशी ने तीन क्षेत्रों में सुधार का प्रस्ताव रखा — पहला, एजेंडे को व्यावहारिक और प्रबंधनीय बनाना; दूसरा, समितियों और पूर्ण सत्रों के बीच बेहतर समन्वय; और तीसरा, न्यूयॉर्क में मानवाधिकार परिषद के काम की अनावश्यक पुनरावृत्ति समाप्त करना।
भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की माँग क्यों कर रहा है?
भारत का तर्क है कि मौजूदा सुरक्षा परिषद की संरचना आज की वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती। भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश और प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जबकि वह परिषद में स्थायी सदस्य नहीं है। यह माँग G4 देशों — भारत, जापान, जर्मनी और ब्राज़ील — की साझा प्राथमिकता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन में भारत किस भूमिका का समर्थन करता है?
भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव के अगले सदस्य के चयन में महासभा की अधिक महत्वपूर्ण और केंद्रीय भूमिका होनी चाहिए। भारत इस उद्देश्य के लिए अन्य सदस्य देशों के साथ सक्रिय रूप से काम करने को तैयार है।
संयुक्त राष्ट्र सुधार में भारत की यह माँग कितनी पुरानी है?
भारत दशकों से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और व्यापक संयुक्त राष्ट्र सुधार की माँग करता आया है। यह माँग G4 देशों के सहयोग से बहुपक्षीय मंचों पर बार-बार उठाई जाती है, लेकिन P5 सदस्यों — विशेषकर चीन — के विरोध के कारण अब तक ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
राष्ट्र प्रेस
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