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NFDB की 13वीं बैठक: केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मछली उत्पादन 197.75 लाख टन पहुँचने पर जताई प्रसन्नता

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NFDB की 13वीं बैठक: केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मछली उत्पादन 197.75 लाख टन पहुँचने पर जताई प्रसन्नता

सारांश

हैदराबाद में NFDB की 13वीं गवर्निंग बॉडी बैठक में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मछली उत्पादन में 56 लाख टन की वृद्धि को रेखांकित किया और बोर्ड से मापने योग्य परिणामों पर आधारित सक्रिय विकास संस्थान बनने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने हैदराबाद में NFDB की 13वीं गवर्निंग बॉडी बैठक की अध्यक्षता की।
देश का मछली उत्पादन 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर 197.75 लाख टन तक पहुँचा।
वर्तमान में भारत का सीफूड निर्यात लगभग ₹70,000 करोड़ का है।
पूर्वोत्तर और आंतरिक राज्यों को प्राथमिकता के आधार पर विशेष सहयोग देने का निर्देश।
FFPOs , स्टार्टअप्स और सहकारी समितियों के ज़रिए निजी निवेश व उद्यमिता बढ़ाने का आह्वान।
PMMSY लाभार्थियों के लिए सतत प्रशिक्षण और पोषण जागरूकता अभियानों पर सहमति बनी।

केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने हैदराबाद में नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड (NFDB) की 13वीं गवर्निंग बॉडी बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश का मछली उत्पादन 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर 197.75 लाख टन तक पहुँच गया है — एक महत्वपूर्ण उपलब्धि। 6 नवंबर 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने NFDB को एक सक्रिय विकास संस्थान के रूप में अपनी भूमिका सुदृढ़ करने का स्पष्ट निर्देश दिया।

मापने योग्य परिणाम पर जोर

मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि NFDB के भविष्य के कार्यों का मूल आधार मापने योग्य परिणाम होने चाहिए। उन्होंने परियोजनाओं को समय पर प्रारंभ करने और पूर्ण करने तथा आवंटित फंड का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि इससे मछुआरों की आय और आजीविका सुरक्षा दोनों में सुधार आएगा।

पूर्वोत्तर और आंतरिक राज्यों पर विशेष ध्यान

केंद्रीय मंत्री ने NFDB को पूर्वोत्तर और आंतरिक राज्यों को प्राथमिकता के आधार पर विशेष सहयोग देने का निर्देश दिया। उनके अनुसार, इससे उत्पादन, आपूर्ति और खपत के बीच की खाई को पाटने में मदद मिलेगी और इन क्षेत्रों को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जाया जा सकेगा। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार मत्स्य पालन क्षेत्र में क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने पर बल दे रही है।

सीफूड निर्यात और एक्वाकल्चर विस्तार

मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने एक्वाकल्चर (जलीय कृषि) के विस्तार और सीफूड निर्यात को सुदृढ़ करने में विभाग एवं राज्यों के प्रयासों की जानकारी दी। वर्तमान में सीफूड निर्यात का मूल्य लगभग ₹70,000 करोड़ है। उन्होंने NFDB की डिजिटल उपस्थिति को मजबूत करने, हितधारकों के लिए फीडबैक तंत्र सरल बनाने और सहकारी समितियों, फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FFPOs), स्टार्टअप्स तथा निजी उद्यमियों के ज़रिए निजी निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।

राज्यों की माँगें और सुझाव

बैठक में उपस्थित राज्यों के मत्स्य मंत्रियों ने मत्स्य पालन बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मछली मंडियों और इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क्स की स्थापना के लिए केंद्र से निरंतर वित्तीय सहयोग की माँग की। मंत्रियों ने अमृत सरोवरों, जलाशयों एवं अन्य जल निकायों के उत्पादक उपयोग के लिए मत्स्य पालन और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय की ज़रूरत भी रेखांकित की।

प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आगे की राह

मंत्रियों ने मछुआरों, उद्यमियों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और अधिकारियों के लिए बेहतर प्रशिक्षण तथा अंतर-राज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव-अवसर बढ़ाने की माँग की। साथ ही, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के लाभार्थियों को सतत प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया। NFDB के मुख्य कार्यकारी डॉ. विजय कुमार बेहरा ने बोर्ड की चल रही गतिविधियों और क्षेत्र विकास के प्रयासों की विस्तृत जानकारी गवर्निंग बॉडी को दी। पोषण जागरूकता अभियानों के ज़रिए मछली की खपत बढ़ाने पर भी सहमति बनी, जो मत्स्य क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु असली प्रश्न यह है कि क्या NFDB इस वृद्धि का लाभ ज़मीनी स्तर के मछुआरों तक पहुँचा पा रहा है। 'मापने योग्य परिणाम' की बात बार-बार होती रही है, लेकिन स्वतंत्र मूल्यांकन तंत्र की अनुपस्थिति में यह देखना मुश्किल है कि ₹70,000 करोड़ के सीफूड निर्यात का कितना हिस्सा छोटे और सीमांत मछुआरों तक पहुँचता है। पूर्वोत्तर राज्यों पर ध्यान सही दिशा में कदम है, किंतु मछली मंडियों और एक्वा पार्क्स के लिए राज्यों की निरंतर माँगें यह संकेत देती हैं कि ज़मीन पर बुनियादी ढाँचे की खाई अभी पाटी नहीं गई।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NFDB की 13वीं गवर्निंग बॉडी बैठक में क्या हुआ?
हैदराबाद में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने की, जिसमें मछली उत्पादन में वृद्धि, सीफूड निर्यात, पूर्वोत्तर राज्यों को विशेष सहयोग और NFDB को सक्रिय विकास संस्थान बनाने पर चर्चा हुई। बैठक में राज्यों के मत्स्य मंत्री, विभागीय सचिव और NFDB के मुख्य कार्यकारी भी उपस्थित थे।
भारत का मछली उत्पादन अभी कितना है?
आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत का मछली उत्पादन 2019-20 के 141.64 लाख टन से बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है। यह वृद्धि लगभग 40% है और सरकार इसे मत्स्य पालन क्षेत्र की उल्लेखनीय उपलब्धि मान रही है।
भारत का सीफूड निर्यात कितने का है?
मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी के अनुसार, वर्तमान में भारत के सीफूड निर्यात का मूल्य लगभग ₹70,000 करोड़ है। सरकार एक्वाकल्चर विस्तार और बेहतर बुनियादी ढाँचे के ज़रिए इसे और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
NFDB से पूर्वोत्तर राज्यों के लिए क्या निर्देश दिए गए?
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने NFDB को पूर्वोत्तर और आंतरिक राज्यों को प्राथमिकता के आधार पर विशेष सहयोग देने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में उत्पादन, आपूर्ति और खपत के बीच की खाई को कम करना और आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का बैठक में क्या उल्लेख हुआ?
बैठक में राज्यों के मत्स्य मंत्रियों ने PMMSY लाभार्थियों को सतत प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। साथ ही, मछुआरों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों के लिए क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव-अवसर बढ़ाने की माँग भी रखी गई।
राष्ट्र प्रेस
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