6 नवंबर 2026
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एनसीएलटी ने वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत को दिवालिया घोषित किया, SBI ₹12,668 करोड़ वसूलेगा

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एनसीएलटी ने वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत को दिवालिया घोषित किया, SBI ₹12,668 करोड़ वसूलेगा

सारांश

एनसीएलटी ने वीडियोकॉन के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल धूत को दिवालिया घोषित कर SBI की ₹12,668 करोड़ वसूली याचिका मंजूर कर ली। धूत की ₹600 करोड़ की भुगतान योजना — कुल दावे का मात्र 1% — लेनदारों ने खारिज कर दी थी। IBC के तहत पर्सनल गारंटर के खिलाफ यह बड़ी कार्यवाहियों में से एक है।

मुख्य बातें

एनसीएलटी की मुंबई बेंच ने 6 नवंबर 2026 को वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित किया।
SBI की ₹12,668.06 करोड़ की बैंकरप्सी याचिका IBC की धारा 123 के तहत स्वीकार की गई।
धूत की ₹600 करोड़ की भुगतान योजना — कुल दावों का 1% से कम — लेनदारों ने अस्वीकार कर दी।
इनसॉल्वेंसी प्रोफेशनल आशीष नारायण को बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया गया; 90 दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट अपेक्षित।
बैंकरप्सी ट्रस्टी को निर्देश — धूत की संपत्ति नियंत्रण में लें और लेनदारों से दावे आमंत्रित करें।
SBI ने फरवरी 2018 में गारंटियाँ लागू की थीं; बकाया में ब्याज और जुर्माना भी शामिल।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई बेंच ने 6 नवंबर 2026 को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित कर दिया। ट्रिब्यूनल ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की याचिका स्वीकार करते हुए वीडियोकॉन समूह को दिए गए ऋणों पर दी गई व्यक्तिगत गारंटी के एवज में ₹12,668.06 करोड़ से अधिक की बकाया राशि की वसूली का मार्ग प्रशस्त किया। यह आदेश उस पर्सनल इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया के विफल होने के बाद आया है, जिसमें लेनदारों ने धूत की भुगतान योजना को खारिज कर दिया था।

मामले की पृष्ठभूमि

वीडियोकॉन समूह द्वारा ऋण न चुकाने के बाद SBI ने फरवरी 2018 में धूत की व्यक्तिगत गारंटियों को लागू किया था। इन गारंटियों का संबंध वीडियोकॉन ग्रुप की विभिन्न कंपनियों — जिनमें वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड भी शामिल है — को दिए गए टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल सुविधाओं और अन्य ऋणों से था। SBI के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक ब्याज और जुर्माने सहित धूत पर कुल ₹12,668.06 करोड़ की देनदारी बनती है।

रिजॉल्यूशन प्रक्रिया क्यों विफल हुई

पर्सनल इनसॉल्वेंसी कार्यवाही के दौरान धूत ने एक भुगतान योजना प्रस्तुत की थी, जिसमें सिलीगुड़ी में एक रियल एस्टेट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के माध्यम से तीन वर्षों में ₹600 करोड़ चुकाने का प्रस्ताव था। गौरतलब है कि यह राशि कुल स्वीकृत दावों के 1 प्रतिशत से भी कम थी।

रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्तियाँ जताईं। उनके अनुसार, यह योजना भविष्य में मिलने वाली परियोजना मंजूरियों और अनिश्चित नकदी प्रवाह पर टिकी थी, और इसमें कोई अग्रिम भुगतान प्रस्तावित नहीं था। लेनदारों ने भी इस योजना को अस्वीकार कर दिया।

एनसीएलटी का आदेश और बैंकरप्सी ट्रस्टी की नियुक्ति

ट्रिब्यूनल ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 123 के तहत SBI की बैंकरप्सी याचिका स्वीकार की और आशीष नारायण को बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि धूत की संपत्ति तत्काल बैंकरप्सी ट्रस्टी के हवाले की जाए, ताकि वे उसका प्रबंधन कर लेनदारों के बीच वितरण सुनिश्चित कर सकें।

इसके अतिरिक्त, बैंकरप्सी ट्रस्टी को निर्देश दिया गया है कि वे लेनदारों से उनके दावे आमंत्रित करें, धूत की संपत्तियों को नियंत्रण में लें और 90 दिनों के भीतर ट्रिब्यूनल को एक प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपें। उल्लेखनीय है कि ट्रिब्यूनल ने इस वर्ष जुलाई में ही इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया समाप्त कर लेनदारों को बैंकरप्सी कार्यवाही की अनुमति दे दी थी, जिसके बाद SBI ने निर्धारित समय-सीमा में याचिका दायर की।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पर्सनल गारंटर के खिलाफ IBC के तहत बैंकरप्सी कार्यवाही के बड़े प्रकरणों में से एक है। वीडियोकॉन समूह के खिलाफ कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, और अब व्यक्तिगत स्तर पर वसूली की यह कोशिश बैंकिंग क्षेत्र में बड़े डिफॉल्टरों के खिलाफ प्रवर्तन कार्यों को नई धार देती है। बैंकरप्सी ट्रस्टी की प्रारंभिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि वसूली योग्य संपत्तियाँ कितनी हैं और लेनदारों को कितनी राशि मिलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्रियान्वयन में जटिल। ₹12,668 करोड़ के दावे के सामने धूत का ₹600 करोड़ का प्रस्ताव — और वह भी अनिश्चित रियल एस्टेट परियोजना पर आधारित — दर्शाता है कि पर्सनल गारंटर अक्सर वसूली को कितनी चतुराई से टालते हैं। असली सवाल यह है कि बैंकरप्सी ट्रस्टी को वास्तव में कितनी संपत्ति मिलेगी, क्योंकि बड़े डिफॉल्ट मामलों में संपत्ति हस्तांतरण और कानूनी उलझनें वसूली को वर्षों तक खींच देती हैं। यह मामला IBC के पर्सनल इनसॉल्वेंसी ढाँचे की साख और बैंकिंग क्षेत्र में गारंटी की विश्वसनीयता दोनों के लिए एक अग्निपरीक्षा है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीएलटी ने वेणुगोपाल धूत को दिवालिया क्यों घोषित किया?
एनसीएलटी की मुंबई बेंच ने SBI की याचिका पर वेणुगोपाल धूत को दिवालिया घोषित किया, क्योंकि उन्होंने वीडियोकॉन समूह के ऋणों के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी के तहत ₹12,668 करोड़ से अधिक की राशि नहीं चुकाई। इससे पहले उनकी पर्सनल इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया भी विफल हो गई थी।
SBI को धूत से कितनी राशि वसूलनी है?
SBI के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक ब्याज और जुर्माने सहित धूत पर कुल ₹12,668.06 करोड़ की देनदारी है। यह बकाया वीडियोकॉन समूह की कंपनियों को दिए गए टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल और अन्य ऋणों पर दी गई व्यक्तिगत गारंटियों से जुड़ी है।
धूत की भुगतान योजना क्यों खारिज हुई?
धूत ने सिलीगुड़ी में एक रियल एस्टेट परियोजना के माध्यम से तीन वर्षों में ₹600 करोड़ चुकाने का प्रस्ताव दिया था, जो कुल स्वीकृत दावों के 1% से भी कम था। रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने कहा कि यह योजना अनिश्चित भविष्य की मंजूरियों पर निर्भर थी और इसमें कोई अग्रिम भुगतान नहीं था, जिसके बाद लेनदारों ने इसे अस्वीकार कर दिया।
बैंकरप्सी ट्रस्टी की भूमिका क्या होगी?
एनसीएलटी ने आशीष नारायण को बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया है। उन्हें धूत की संपत्तियों को नियंत्रण में लेना होगा, लेनदारों से दावे आमंत्रित करने होंगे और 90 दिनों के भीतर ट्रिब्यूनल को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपनी होगी।
IBC की धारा 123 के तहत पर्सनल गारंटर के खिलाफ कार्यवाही कैसे होती है?
इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 123 के तहत किसी कंपनी के प्रमोटर या निदेशक जैसे पर्सनल गारंटर के खिलाफ सीधे दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की जा सकती है। इसके तहत उनकी व्यक्तिगत संपत्तियाँ बैंकरप्सी ट्रस्टी के नियंत्रण में आ जाती हैं और लेनदारों को भुगतान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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