एनसीएलटी ने वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत को दिवालिया घोषित किया, SBI ₹12,668 करोड़ वसूलेगा
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई बेंच ने 6 नवंबर 2026 को वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को दिवालिया घोषित कर दिया। ट्रिब्यूनल ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की याचिका स्वीकार करते हुए वीडियोकॉन समूह को दिए गए ऋणों पर दी गई व्यक्तिगत गारंटी के एवज में ₹12,668.06 करोड़ से अधिक की बकाया राशि की वसूली का मार्ग प्रशस्त किया। यह आदेश उस पर्सनल इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया के विफल होने के बाद आया है, जिसमें लेनदारों ने धूत की भुगतान योजना को खारिज कर दिया था।
मामले की पृष्ठभूमि
वीडियोकॉन समूह द्वारा ऋण न चुकाने के बाद SBI ने फरवरी 2018 में धूत की व्यक्तिगत गारंटियों को लागू किया था। इन गारंटियों का संबंध वीडियोकॉन ग्रुप की विभिन्न कंपनियों — जिनमें वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड भी शामिल है — को दिए गए टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल सुविधाओं और अन्य ऋणों से था। SBI के अनुसार, 30 सितंबर 2026 तक ब्याज और जुर्माने सहित धूत पर कुल ₹12,668.06 करोड़ की देनदारी बनती है।
रिजॉल्यूशन प्रक्रिया क्यों विफल हुई
पर्सनल इनसॉल्वेंसी कार्यवाही के दौरान धूत ने एक भुगतान योजना प्रस्तुत की थी, जिसमें सिलीगुड़ी में एक रियल एस्टेट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के माध्यम से तीन वर्षों में ₹600 करोड़ चुकाने का प्रस्ताव था। गौरतलब है कि यह राशि कुल स्वीकृत दावों के 1 प्रतिशत से भी कम थी।
रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्तियाँ जताईं। उनके अनुसार, यह योजना भविष्य में मिलने वाली परियोजना मंजूरियों और अनिश्चित नकदी प्रवाह पर टिकी थी, और इसमें कोई अग्रिम भुगतान प्रस्तावित नहीं था। लेनदारों ने भी इस योजना को अस्वीकार कर दिया।
एनसीएलटी का आदेश और बैंकरप्सी ट्रस्टी की नियुक्ति
ट्रिब्यूनल ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 123 के तहत SBI की बैंकरप्सी याचिका स्वीकार की और आशीष नारायण को बैंकरप्सी ट्रस्टी नियुक्त किया। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि धूत की संपत्ति तत्काल बैंकरप्सी ट्रस्टी के हवाले की जाए, ताकि वे उसका प्रबंधन कर लेनदारों के बीच वितरण सुनिश्चित कर सकें।
इसके अतिरिक्त, बैंकरप्सी ट्रस्टी को निर्देश दिया गया है कि वे लेनदारों से उनके दावे आमंत्रित करें, धूत की संपत्तियों को नियंत्रण में लें और 90 दिनों के भीतर ट्रिब्यूनल को एक प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपें। उल्लेखनीय है कि ट्रिब्यूनल ने इस वर्ष जुलाई में ही इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया समाप्त कर लेनदारों को बैंकरप्सी कार्यवाही की अनुमति दे दी थी, जिसके बाद SBI ने निर्धारित समय-सीमा में याचिका दायर की।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पर्सनल गारंटर के खिलाफ IBC के तहत बैंकरप्सी कार्यवाही के बड़े प्रकरणों में से एक है। वीडियोकॉन समूह के खिलाफ कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, और अब व्यक्तिगत स्तर पर वसूली की यह कोशिश बैंकिंग क्षेत्र में बड़े डिफॉल्टरों के खिलाफ प्रवर्तन कार्यों को नई धार देती है। बैंकरप्सी ट्रस्टी की प्रारंभिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि वसूली योग्य संपत्तियाँ कितनी हैं और लेनदारों को कितनी राशि मिलने की संभावना है।