2028 तक 25 करोड़ स्मार्ट मीटर: रोज़ाना 2.5 लाख इंस्टॉलेशन की ज़रूरत, केयरएज रेटिंग्स रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत को मार्च 2028 तक 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित करने होंगे — जो वित्त वर्ष 2025-26 की औसत दैनिक गति से ढाई गुना से अधिक है। 6 नवंबर 2026 को जारी केयरएज रेटिंग्स की ताज़ा रिपोर्ट में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है।
मौजूदा प्रगति और अंतराल
अप्रैल 2026 तक देशभर में करीब 6.5 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके थे, जो कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्रतिदिन औसतन 99,000 मीटर इंस्टॉल किए गए, जबकि लक्ष्य हासिल करने के लिए यह संख्या 2.5 लाख प्रतिदिन तक पहुँचानी होगी।
हालांकि वार्षिक इंस्टॉलेशन के आँकड़े उत्साहजनक रुझान दिखाते हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में 48 लाख, वित्त वर्ष 2024-25 में 1.47 करोड़ और वित्त वर्ष 2025-26 में 3.63 करोड़ मीटर लगाए गए। यह वृद्धि उल्लेखनीय है, परंतु शेष अंतराल और भी बड़ी चुनौती की ओर इशारा करता है।
राज्यवार प्रदर्शन
राज्यों में महाराष्ट्र अग्रणी स्थान पर है, जहाँ लगभग 1.1 करोड़ स्मार्ट मीटर लग चुके हैं — यह देश के कुल इंस्टॉलेशन का करीब 17 प्रतिशत है। महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश मिलकर देश के कुल इंस्टॉलेशन का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्यों के बीच प्रगति की गति समान नहीं है। उत्तर प्रदेश में स्वीकृत क्षमता का लगभग 32 प्रतिशत इंस्टॉलेशन हुआ है, जबकि बिहार में यह आँकड़ा करीब 52 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन क्षमता और राज्य सरकारों की सक्रिय भूमिका लक्ष्य प्राप्ति में निर्णायक साबित होगी।
डिस्कॉम के लिए संभावित आर्थिक लाभ
केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि स्मार्ट मीटरों का पूर्ण पैमाने पर उपयोग वित्त वर्ष 2030-31 तक बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए लगभग ₹1.84 लाख करोड़ का अतिरिक्त संचयी राजस्व उत्पन्न कर सकता है। यह लाभ मुख्यतः बिलिंग व वसूली दक्षता में सुधार और एटीएंडसी (AT&C) हानियों में कमी से संभव होगा।
बिजली वितरण क्षेत्र में सुधार के संकेत पहले से दिखने लगे हैं। AT&C नुकसान वित्त वर्ष 2019-20 के 20.73 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2024-25 में 15.04 प्रतिशत पर आ गया है। इसी अवधि में बिलिंग दक्षता लगभग 88 प्रतिशत और संग्रहण दक्षता करीब 97 प्रतिशत तक पहुँची है।
रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्ट मीटरों के व्यापक उपयोग से बिलिंग दक्षता 97-98 प्रतिशत, प्रीपेड मॉडल से संग्रहण दक्षता 99 प्रतिशत से अधिक और AT&C नुकसान घटकर लगभग 12 प्रतिशत तक आ सकता है।
प्रीपेड मोड और तकनीकी चुनौतियाँ
रिपोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कमज़ोरी की ओर भी ध्यान दिलाया। अप्रैल 2026 तक लगाए गए 6.5 करोड़ मीटरों में से केवल लगभग 9 प्रतिशत ही प्रीपेड मोड में संचालित हो रहे थे, जो स्मार्ट मीटरिंग के वास्तविक लाभों को सीमित करता है। इसके अतिरिक्त, वर्तमान में लगभग 89 प्रतिशत बिजली बिल वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर बनाए जा रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल 49 प्रतिशत मामलों में स्वचालित रीडिंग प्रणाली का उपयोग हो रहा है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
केयरएज रेटिंग्स के निदेशक रवलीन सेठी ने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बिजली वितरण कंपनियाँ इंस्टॉलेशन को परिचालन सुधार में कितनी प्रभावी तरह बदल पाती हैं। उनके अनुसार, 'सटीक मीटर रीडिंग को बिलिंग और भुगतान प्रणाली से जोड़ना होगा तथा उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए आवश्यक साधन और भरोसा देना होगा।'
गौरतलब है कि स्मार्ट मीटर परियोजना केंद्र सरकार की 'रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम' (RDSS) का अहम हिस्सा है। आने वाले महीनों में राज्य सरकारों और डिस्कॉम की गति यह तय करेगी कि 2028 का यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य समय पर पूरा होगा या नहीं।