8 अक्टूबर 2026
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झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC-CGL नियुक्ति रद्द मामले में फैसला सुरक्षित रखा, अंतरिम राहत जारी

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झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC-CGL नियुक्ति रद्द मामले में फैसला सुरक्षित रखा, अंतरिम राहत जारी

सारांश

झारखंड सरकार ने 18 अगस्त 2026 को JSSC-CGL समेत कई भर्तियाँ रद्द कर दी थीं। हज़ारों नियुक्त अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा — अंतरिम राहत बरकरार है, लेकिन अंतिम निर्णय का इंतज़ार जारी है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को JSSC-CGL नियुक्ति रद्द मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा।
न्यायमूर्ति दीपक रौशन की पीठ ने नियुक्ति रद्दीकरण आदेश पर अंतरिम रोक बरकरार रखी — प्रभावित कर्मी अभी भी कार्यरत रहेंगे।
राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की नियुक्तियाँ एकमुश्त रद्द की थीं।
18 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने कथित अनियमितताओं की जाँच निगरानी हेतु सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया था।
सेवानिवृत्त आईपीएस आर.के.
मल्लिक को नोडल अधिकारी बनाया गया; अदालत ने कहा — निष्पक्ष चयनितों को परेशान न किया जाए।
मुख्य कानूनी प्रश्न: व्यक्तिगत भूमिका जाँचे बिना क्या सभी नियुक्तियाँ एकसाथ रद्द की जा सकती हैं?

झारखंड हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) के माध्यम से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की पीठ ने राज्य सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC), JSSC और प्रार्थियों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।

अंतरिम रोक बरकरार

सुनवाई के दौरान अदालत ने नियुक्ति रद्दीकरण आदेश पर पहले से लगाई गई अंतरिम रोक को जारी रखा। इसका अर्थ यह है कि अंतिम निर्णय आने तक संबंधित कर्मचारियों पर सरकार का रद्दीकरण आदेश प्रभावी नहीं होगा। हाईकोर्ट पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि नियमित नियुक्तियाँ समाप्त करने से पूर्व प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन अनिवार्य है, और इसी आधार पर प्रभावित कर्मियों को राहत प्रदान की गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

झारखंड राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों को एकमुश्त रद्द कर दिया था। इस निर्णय से प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। अदालत के समक्ष JPSC की CDPO परीक्षा तथा JSSC-CGL से जुड़ी नियुक्तियों सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं से संबंधित याचिकाएँ भी विचाराधीन हैं।

बुधवार, 7 अक्टूबर को भी सुनवाई हुई थी, किंतु बहस अधूरी रह गई थी, जिसके बाद अदालत ने गुरुवार को कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया था।

जाँच और निगरानी का आदेश

18 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए भर्ती में कथित अनियमितताओं की जाँच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया था। इसके साथ ही सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आर.के. मल्लिक को इस प्रक्रिया में सहयोग हेतु नोडल अधिकारी बनाया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जाँच के दौरान निष्पक्ष रूप से चयनित अभ्यर्थियों को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

मुख्य कानूनी प्रश्न

इस पूरे विवाद में अदालत के समक्ष एक केंद्रीय प्रश्न यह है कि यदि भर्ती प्रक्रिया के किसी चरण में गड़बड़ी हुई है, तो क्या प्रत्येक अभ्यर्थी की व्यक्तिगत भूमिका और स्थिति की जाँच किए बिना सभी नियुक्तियाँ एक साथ रद्द की जा सकती हैं। हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा था कि सभी नियुक्तियों को एक ही दृष्टि से नहीं देखा जा सकता।

किन वकीलों ने पेश की दलीलें

गुरुवार की सुनवाई में प्रार्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राज्य के पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स, कुमार हर्ष, सोनल तिवारी और सुभाष रसिक सोरेन सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा और महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय ने दलीलें प्रस्तुत कीं। JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने, तथा हस्तक्षेप याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता टी. सिंहदेव ने अपनी दलीलें रखीं।

अब सभी की निगाहें न्यायमूर्ति दीपक रौशन के उस फैसले पर टिकी हैं, जो हज़ारों नियुक्त कर्मियों के भविष्य और राज्य की भर्ती प्रक्रिया की वैधता — दोनों को एक साथ तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हाईकोर्ट की अंतरिम टिप्पणियाँ इसी ओर इशारा करती हैं। जाँच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति यह संकेत देती है कि अदालत सरकार के 'सब दोषी हैं' वाले तर्क से असहमत है। असली सवाल यह है कि यदि अनियमितताएँ हुई भी हैं, तो उसकी जिम्मेदारी निर्दोष अभ्यर्थियों पर क्यों डाली जाए? अंतिम फैसला न केवल इन अभ्यर्थियों, बल्कि राज्य की भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए भी एक मिसाल बनेगा।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC-CGL नियुक्ति रद्द मामले में क्या आदेश दिया?
हाईकोर्ट ने 8 अक्टूबर 2026 को सभी पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रख लिया। नियुक्ति रद्दीकरण आदेश पर अंतरिम रोक जारी है, जिससे प्रभावित कर्मी अंतिम निर्णय तक कार्यरत रहेंगे।
झारखंड सरकार ने JSSC-CGL नियुक्तियाँ कब और क्यों रद्द कीं?
राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 को भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए JSSC-CGL समेत कई भर्तियाँ रद्द कर दी थीं। इसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएँ दायर कीं।
हाईकोर्ट ने जाँच के लिए किसे नियुक्त किया है?
18 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने भर्ती में कथित अनियमितताओं की जाँच निगरानी के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आर.के. मल्लिक को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
क्या JSSC-CGL से नियुक्त कर्मचारी अभी भी काम पर हैं?
हाँ, हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के कारण प्रभावित कर्मचारी अभी कार्यरत हैं। जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, सरकार का रद्दीकरण आदेश प्रभावी नहीं होगा।
इस मामले में मुख्य कानूनी विवाद क्या है?
मुख्य प्रश्न यह है कि क्या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी होने पर भी प्रत्येक अभ्यर्थी की व्यक्तिगत भूमिका जाँचे बिना सभी नियुक्तियाँ एकसाथ रद्द की जा सकती हैं। हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा है कि सभी नियुक्तियों को एक ही नज़र से नहीं देखा जा सकता और प्राकृतिक न्याय का पालन जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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