'अनुपमा' की अद्रिजा रॉय ने साझा किया दीपावली का सफर: बचपन की धूम से शांत पलों तक
सारांश
मुख्य बातें
टीवी सीरियल 'अनुपमा' में राही का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री अद्रिजा रॉय ने 6 नवंबर 2026 को दीपावली से जुड़ी अपनी खास यादें साझा कीं और बताया कि बचपन की उत्साह भरी दीपावली से लेकर अब तक उनके लिए इस त्योहार का मायने किस तरह बदल गए हैं। अद्रिजा के अनुसार, त्योहार का जश्न अब सजावट और पटाखों से हटकर अपनों के साथ बिताए उन अनमोल पलों में सिमट गया है जो वर्षों बाद भी याद रहते हैं।
बचपन की दीपावली: उत्साह और बेसब्री
अद्रिजा ने बताया कि बचपन में वे दीपावली के आने के दिन गिनती थीं। त्योहार की तैयारियों को लेकर उनके मन में गजब का उत्साह रहता था। उन्होंने कहा, ''मैं बचपन में दीपावली के आने के दिन गिना करती थी, क्योंकि त्योहार को लेकर बहुत उत्साह रहता था।''
उस दौर में त्योहार का केंद्र यह था कि दीपावली उन्हें क्या दे रही है — नए कपड़े, मिठाइयाँ, पटाखे और उत्सव का शोर। यह एक सामान्य बचपन की दीपावली का आनंद था, जिसे अद्रिजा आज भी स्नेह से याद करती हैं।
सोच में बदलाव: लेने से देने और बाँटने तक
समय के साथ अद्रिजा की प्राथमिकताएँ बदलीं। उन्होंने कहा, ''पहले मेरे लिए यह मायने रखता था कि त्योहार मुझे क्या दे रहा है, लेकिन अब मैं इस बात पर ज़्यादा ध्यान देती हूँ कि मैं अपने आसपास के लोगों के साथ क्या बाँट सकती हूँ।''
अभिनेत्री के अनुसार अब उनके लिए असली जश्न अपनों के साथ बातचीत करने, हँसने और ऐसे पल बिताने में है, ''जो सजावट हट जाने के बाद भी याद रहते हैं।'' यह बदलाव महज व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उस व्यापक सामाजिक प्रवृत्ति को भी दर्शाता है जिसमें बड़े होने के साथ उत्सव का अर्थ भौतिकता से भावनात्मक जुड़ाव की ओर खिसकता है।
इस साल का उत्साह: नए परिवार के साथ नई परंपराएँ
अद्रिजा ने बताया कि इस साल वे विग्नेश और अपने ससुराल वालों के साथ दीपावली मनाने को लेकर खासतौर पर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा, ''नए परिवार की परंपराओं का हिस्सा बनना और उनमें अपनी कुछ परंपराएँ जोड़ना बहुत अच्छा लगता है।''
वे छोटी-छोटी खुशियों में आनंद ढूँढना चाहती हैं — साथ में तैयार होना, त्योहार का खाना खाना या बिना समय देखे सबके साथ बैठकर वक्त बिताना। उनके लिए नई गृहस्थी में पुरानी और नई परंपराओं का संगम इस दीपावली को और भी यादगार बनाता है।
काम और त्योहार का तालमेल
अभिनय के पेशे में तय शेड्यूल का अभाव एक बड़ी चुनौती होती है। अद्रिजा ने बताया कि उन्होंने मिलने वाले समय का पूरा उपयोग करना सीख लिया है। उन्होंने कहा, ''परिवार के साथ बिना किसी रुकावट के बिताए गए कुछ घंटे भी किसी बड़े जश्न से कम नहीं होते।''
उनका मानना है कि यादें बनाने के लिए पूरे दिन की छुट्टी का इंतजार करना ज़रूरी नहीं। यह सोच उन लाखों पेशेवरों के लिए प्रासंगिक है जो व्यस्त जीवन में त्योहार के लिए समय निकालने की जद्दोजहद करते हैं।
अद्रिजा का संदेश: खुशियाँ मनाने के लिए सही वक्त का इंतजार न करें
अभिनेत्री ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, ''खुशियाँ मनाने के लिए किसी खास मौके या सही समय का इंतजार नहीं करना चाहिए। सालों बाद दीपावली की सजावट नहीं, बल्कि उन लोगों के साथ बिताए गए पल और उनसे जुड़ी यादें ही हमारे साथ रहेंगी।''
उन्होंने सभी से अपील की कि वे अपने करीबियों से मिलें, परिवार के साथ वक्त बिताएँ और उन लोगों की अहमियत समझें जो उनकी ज़िंदगी को खास बनाते हैं। अद्रिजा रॉय इन दिनों 'अनुपमा' में अपने किरदार राही के ज़रिए दर्शकों के दिलों में जगह बना रही हैं, और उनकी यह बात त्योहार के असली अर्थ को नए सिरे से परिभाषित करती है।